ब्यूरोक्रेटस ने खेती और किसानी की राह पकड़ी

विमलेश शर्मा

एक तरफ जहां युवा सरकारी उच्च पदों पर पहुंचने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं तो दूसरी तरफ वर्षों तक सरकारी महकमों में उच्च पदों पर रहे लोग शहरों की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी से नाता तोड़ रहे हैं। वे अब खुले आसमान तले शुद्ध हवा में सांस लेने की सोच के साथ शहरी आपाधापी से दूर गांवों और खेतों में बस रहे हैं। कोरोनाकाल के बाद तो वैसे भी हर आम और खास भी शहरों से तौबा कर गांवों की तरफ जाना चाह रहे हैं। इनमें ब्यूरोक्रेटस भी शामिल हैं जो आलीशान कोठियों के बजाय खेत.खलिहानों में रमने लगे हैं। सुनी पड़ी गांवों की गलियों और खेतों में इन दिनों एकाएक रौनक लौट आई हैं।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी अश्विनी शर्मा को ही ले,जिन्होंने सरकारी फ़ाइलों से माथापच्ची छोड़ हल थाम लिया। वे पिछले कुछ समय से खेती व गौ पालन में नवाचारों के साथ कृषि क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनाने में जुटे हुए हैं। वे ऑर्गेनिक खेती से मुनाफा भी कमा रहे हैं।
प्रकृति प्रेम ने बनाया किसान
शर्मा का प्रकृति से प्रेम यूं तो बचपन से रहा हैं उनकी कविताओं में भी गांव. गुवाड़ से लेकर खेत.खलिहानों का सुंदर चित्रण पढ़ने को मिल जाएगा पर हल से खेत जोतनेए निराईए गुनाई इससे पहले कभी नहीं की। ऐसे में शर्मा का मजदूरों की तरह खेत में जुटे दिखाई देना किसी सातवें आश्चर्य से कम नहीं। प्रकृति प्रेम के साथ कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने की सोच उन्हें खेतों में खींच लाई वर्ना सिया के राम व कई अन्य धारावाहिको के अभिनेता आशीष शर्मा व जयपुर की राजकुमारी सांसद दीया कुमारी के ओएसडी श्रेयांश के पिता अश्विनी शर्मा को खेतों में पसीना बहाने की कोई आवश्यकता नहीं। रोजी.रोटी के लिए तो उन्हें मिलने वाली पेंशन ही काफी हैं।
’पंछियों की चहचहाट में रमा मन’
उबड़ खाबड़ जमीन को समतल कर उपजाऊ बनाना और स्वछंद वातावरण में रहने के लिए खेत में ही कुटिया बना अधिकतर समय गुजारने वाले वाले शर्मा ने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए 25 वर्ष तो भाजपा.कांग्रेस सरकारों में मंत्रियों के सहयोगी के रूप में नीति निर्धारण तय करने में गुजारे हैं। प्रशासनिक अनुभवों को देखते हुए शर्मा के लिए काम की कोई कमी नहीं पर उनका मन फ़ाइलों में माथा खपाने की बजाय अब गायों के तबलेए लहलहाते खेतों के बीच पंछियों की करलव चहचहाट में रम गया हैं।
’स्वर्ण कपिला फार्म’
जयपुर से 100 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर जिले में मित्रपुरा के पास एक छोटे से गांव थनेरा में 28 बीघा में बना स्वर्ण कपिला फार्म हाउस स्वर्ग का सा अहसास करवा रहा हैं। प्रकृति की गोद में जाकर बसने की अश्विनी शर्मा की कल्पना को साकार रूप देने में उनकी पत्नी सरिता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया हैं। सरिता भी पति के साथ खेतों की सार संभाल में जुटी हैं। दोनों पति.पत्नी कोरोना काल के बाद तो अधिक समय फार्म हाउस पर ही गुजार रहे हैं।
’आसमान में तारों की बारात’
यहां पहाड़ियों की ओट में बसे फार्म हाउस में हरीतिमा के बीच उदय व अस्त होते सूर्य के विहंगम दृश्य तो देखने को मिलते ही हैं। उसके साथ रात में चंद्रमा दूधिया रोशनी बिखेरता तारों की बारात के साथ नजर आता हैं। भला इससे अधिक सुकून कहां मिल सकता है।
’नवाचार’
रिटायर्ड आरएएस अधिकारी अश्विनी शर्मा का जिस क्षेत्र में फार्म हाउस हैं उस इलाके में ज्यादातर किसान परम्परागत फसल ही लेते हैएजबकि शर्मा ने एकीकृत खेती को अपना फलए सब्जीए विभिन्न खाद्यान्नों के साथ हरे चारे व औषधीय पौधों से फार्म हाउस को सरसब्ज कर डाला।
इन नवाचारों ने मात्र तीन सालों में शर्मा को भी उन्नत खेती वाले सफल किसानों की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया।
’बागवानी’
बागवानी में उनके फार्म पर अमरूदए अनारए आंवलाएबिलए निम्बूएलेहसुआ की तो सघन खेती हैं ही। इसके साथ आमएचीकूए कटहलएजामुनए करौंदाए आदि के भी काफी पेड़ हैं। खरबूजा व तरबूज की तो ऐसी वेरायटी है जिसे देख अन्य किसान इनकी खेती करने लगे हैं।
’सब्जी और खाद्यान्न’
सब्जी में तोरियाएघीयाएभिंडीए करेलाएदेशी खीराए पोदीनाए धनियांए गाजरए मूलीए मटरएटमाटर सहित कई तरह की सब्जियों की पैदावार हो रही है। बेलदार फसल के लिए छावण का जो क्षेत्र विकसित कर रखा हैं उसमें तो एक से अधिक पैदावार हो ही रही है। उसके साथ गेहूंए सरसोए चनाए सौंफए उडदए चंवलाए बाजराए गंवारए तिल आदि की पैदावार भी भरपूर हो रही हैं।
’हरा चारा’
हरे चारे में उनके फार्म हाउस में परंपरागत फसलों वाले हरे चारे के अलावा सेवनए नेपियरए बांसए अरडूए मोरंगा हैं।
’औषधीय पौधे’
कई तरह के औषधीय पौधे भी शर्मा के फार्म पर हैं उनमें अश्वगंधाए एलोवेराए गड़ तुम्बाएतुलसीए नीम गिलोय शामिल हैं। जहां पेड़ की छावं दूर.दूर तक नजर नहीं आती थी उसी जमीं में नीमए शीशम आदि के चार सौ पेड़ खड़े हैं। पानी का लेबल सुधार के जतनों का प्रतिफल भी देखने को मिला। उनके कुएं में 20 से 25 फ़ीट पर पानी है। बिजली खर्च बचाने के लिए सोलर प्लांट लगा हुआ है।
’गौ पालन’
फार्म हाउस पर बनी गौशाला में छोटी और बड़ी 25 गिर नस्ल की गाये है। एक कांकरेज नस्ल की गाय भी है वह भी उत्तम नस्ल की गाय मानी जाती हैं।
’खाद. कीटनाशक’
ऑर्गेनिक खेती व बागवानी के लिए देशी तरीके से ऑर्गेनिक खाद और कीटनाशक का निर्माण तथा उन्हें उपयोग में लेने के गुर कोई इनसे सीखे। खाद और पेस्टिसाइड तैयार करने की तो उन्होंने देशी प्रयोगशाला ही अपने कृषि फार्म पर बना डाली हैं। उनके यहां बेस्ट डी कम्पोज़रए माइक्रो न्यूट्रिनए एंजायनएजीवामृतए फंगीसाइड बर्मी कंपोस्टए बर्मी बेस्टए 20 तरह की जड़ी बूंटी वाला पेस्टिसाइडए निम्बोली पेस्टिसाइड आदि खाद व कीटनाशक का न केवल निर्माण हो रहा हैंए बल्कि अधिकतर निर्माण सामग्री भी उनके फार्म व आसपास के इलाके में बहुतायत में उपलब्ध हैं।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.