हंगामेदार रह सकता है संसद का मानसून सत्र, विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए सरकार भी तैयार

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 14 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। कोरोना महामारी के बीच होने जा रहा यह सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कोरोना महामारी, लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प जैसे मुद्दों पर विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ेगा। बीजेपी ने भी खुद को इसके लिए तैयार कर लिया है।
विपक्ष, मुख्य रूप से कांग्रेस लगातार कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। साथ ही कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष की घटना की जानकारी देने के बारे में पारदर्शी तरीका नहीं अपनाया गया।
भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, “चीन और महामारी के बारे में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का पहले ही जवाब दिया जा चुका है और वे केवल राजनीति के लिए इन मुद्दों का उपयोग कर रहे हैं।” पार्टी के पदाधिकारी के मुताबिक, इस साल मार्च में हुए सत्र में 10 अध्यादेश पारित किए गए थे, जिन्हें विचार के लिए लाया जाएगा। आपको बता दें कि अध्यादेश छह महीने के बाद समाप्त हो जाते हैं और उन्हें एक बिल के रूप में पास करना अनिवार्य होता है।
जिन अध्यादेशों को लिया जाएगा उनमें महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश- 2020, वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020, किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 भी शामिल हैं। साथ ही सांसदों के वेतन से संबिधत अध्यादेश भी सदन के पटल पर लाए जा सकते हैं।
बीजेपी के एक दूसरे पदाधिकारी ने कहा, ”डेटा प्रोटेक्शन बिल और लेबर कोड सहित अन्य विधायी मुद्दे भी हैं जिसे सत्र के दौरान विचार के लिए लाए जाने की संभावना है।”
दिसंबर 2019 में शीतकालीन सत्र में पेश किया गया डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019, डेटा संग्रहण और साझा करने के नियमों से संबंधित है, जो कि नागरिकों के लिए उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर परिभाषित करता है। वर्तमान में एक संयुक्त संसदीय समिति द्वारा इसकी जांच की जा रही है।

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