बदहाल मक्का किसान

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पटना।लॉकडाउन ने मक्का उत्पादित किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। बिहार का खगड़िया जिला मक्के की खेती के कारण राष्ट्रीय मानचित्र पर ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर भी अपनी पहचान बना चुका है। खगड़िया के साथ ही साथ आसपास के जिले में भी व्यापक पैमाने पर मक्के की खेती होती है यहां से सीधे बांग्लादेश को मक्के का आयात किया जाता है।कोसी कछार का इलाका मक्के की तीन-तीन फसल उगाने के लिए अनुकूल है।प्रदेश में भले ही मक्की का कोई खास महत्व नहीं पड़ती, देसी कंपनियां यहां उत्पादित मक्के को खरीदती हैं और फिर उन देशों में यहां के मक्के से गुलकोज अथवा अन्य खाद्य सामग्रियां बनाई जाती है।   मक्का आधारित देश के कई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी बिहार के इन क्षेत्रों में उत्पादित होने वाले मक्के से ही संचालित होता है पर मक्का की खेती करने वाले किसानों को इस बार काफी घाटा का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि लॉकडाउन के कारण किसान अपने मक्के की फसल को महानगरों तक भेजने में असमर्थ हैं। यहां के अधिकांश लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों ने कर्ज लेकर मेहनत से मक्के की खेती की थी। लेकिन इस बार लॉकडाउन ने किसानों के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। किसान आसिफ इक़बाल ने बताया कि लॉकडाउन के कारण किसान अपने उत्पादकों को महानगरों तक नहीं भेज पा रहे हैं। नतीजन किसानों को औने-पौने भाव में ही बिचोलियों के हाथों फसल को बेचना पड़ रहा है। इसके कारण किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना था कि पिछले साल मक्का की फसल से काफी लाभ हुआ था। लेकिन इस बार मक्का फसल अनुदानित मूल्य पर नहीं बिकने के कारण उनके चेहरे पर मायूसी है। खरीफ फसलों की तरह ही मक्का की फसलों को भी पैक्स के माध्यम से खरीदा जाए ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके। किसान लाल बाबु ने बताया कि इस बार पांच एकड़ में मक्का की खेती की थी। मक्का का रेट घटने के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंच रहा है। किसान सद्दाम हुसैन ने बताया कि इस बार तीन एकड़ में मक्का की खेती की थी सोचा था कि इस बार अगर मक्का का भाव अच्छा रहा तो गृह निर्माण कार्य आसानी से कर लेंगे।कर्ज की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। लेकिन इस बार मक्के का भाव नहीं रहने के कारण गृह निर्माण कार्य भी अधूरा रह जाएगा। किसान सनाउल रहमान ने बताया कि सरकार मक्का की अनुदानित मूल्य निर्धारित कर दो हजार प्रति क्विंटल के हिसाब से पैक्स के माध्यम से खरीदारी कराए तभी किसानों की जान बच सकती है। किसान अब्दुल कलाम आज़ाद , जाबीर आलम , जहाँगीर आलम ,आदि ने कहा कि अगर सरकार मक्का की अनुदानित मूल्य निर्धारित नहीं करती है तो किसान आत्मदाह करने को बाध्य होंगे।

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