जड़ से मिटेगा कैंसर, कीमोथेरेपी की नहीं पड़ेगी जरूरत

कैंसर के खिलाफ जंग में एक नया हथियार मिला है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक हाईटेक पेन ईजाद किया है, जो कोल्ड प्लाज्मा की मदद से उन कैंसर कोशिकाओं के खात्मे में सक्षम होगा, जो ट्यूमर हटाने के बाद भी शरीर में बची रह जाती हैं। इन कोशिकाओं के चलते मरीज में कैंसर के दोबारा उभरने और शरीर के बाकी हिस्सों में फैलने का डर बना रहता है।
मुख्य शोधकर्ता जॉन बटलर के मुताबिक ‘केनेडी हीलियोज कोल्ड प्लाज्मा सिस्टम’ कैंसर कोशिकाओं पर हमले के लिए प्लाज्मा की मदद लेता है। प्लाज्मा का उत्पादन तब होता है, जब आवेषित कण हीलियम सहित अन्य गैस से गुजरते हैं। इससे 20 हजार डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा पैदा होती है, जो सूर्य के तापमान से कहीं ज्यादा है। हालांकि, ‘केनेडी हीलियोज कोल्ड प्लाज्मा सिस्टम’ कैंसर कोशिकाओं पर कोल्ड प्लाज्मा विकिरणों का स्त्राव करता है।
फ्री-रैडिकल से वार-
-बटलर की मानें तो पेन की नजर जैसे ही कैंसरग्रस्त कोशिका पर पड़ती है, यह कोल्ड प्लाज्मा का स्त्राव करता है। कोल्ड प्लाज्मा कैंसर कोशिकाओं में ज्यादा मात्रा में फ्री-रैडिकल का उत्पादन सुनिश्चित करता है, ताकि वे खुद इससे नष्ट हो जाएं। इस प्रक्रिया में आसपास मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का जोखिम न के बराबर होता है।
दोबारा नहीं पनपेगी बीमारी-
-बटलर के अनुसार बड़े ट्यूमर दवाओं से नहीं गलते। इन्हें सर्जरी के जरिये शरीर से बाहर निकालने की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर सर्जरी के दौरान ट्यूमर के कुछ मिलीमीटर के दायरे में मौजूद स्वस्थ ऊतकों को भी काट देते हैं। हालांकि, कई मामलों में कैंसर कोशिकाएं शरीर में छूट जाती हैं। ये कैंसर कोशिकाओं को और आक्रामक रूप से फैलने की क्षमता प्रदान करती हैं।
सर्जरी के बाद इस्तेमाल-
-ट्यूमर निकालने के बाद सर्जन कुछ मिनट के लिए उसके आसपास के हिस्सों में प्लाज्मा पेन घुमाते हैं। पेन बची-कुची कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर प्लाज्मा विकिरणों का स्त्राव करता है, ताकि ज्यादा मात्रा में फ्री-रैडिकल पैदा होने से वे दम तोड़ दें। वाशिंगटन डीसी में पेन का परीक्षण शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर सर्जरी के दौरान कैंसर कोशिकाओं की पहचान और खात्मे में इसकी उपयोगिता आंकने की कोशिशों में जुटे हैं।
पूरी तरह से सुरक्षित तकनीक-
-शोधकर्ताओं ने दावा किया कि ‘केनेडी हीलियोज कोल्ड प्लाज्मा सिस्टम’ मानव शरीर पर इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। यह गर्म प्लाज्मा का स्त्राव नहीं करता, जो कोशिकाओं को जलाने की कूव्वत रखती हैं। अलबत्ता इससे कोल्ड प्लाज्मा निकलता है, जिसका अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। यह सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को ही नेस्तनाबूद करता है। स्वस्थ कोशिकाओं इसके प्रकोप से अछूती रहती हैं।
कीमोथेरेपी की नहीं पड़ेगी जरूरत-
-‘केनेडी हीलियोज कोल्ड प्लाज्मा सिस्टम’ जानवरों पर आजमाइश में खरा उतरा है। इससे महज दो मिनट में ट्यूमर के आसपास मौजूद कैंसर कोशिकाओं का खात्मा मुमकिन हो सका। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह तकनीक कैंसर रोगियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं होगी। सर्जरी के बाद कैंसर को दोबारा उभरने से रोकने के लिए उन्हें कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी जैसी मुश्किल चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

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