आपकी मुट्ठी में होगा आपका स्वास्थ्य

बाल मुकुन्द ओझा

हमारा देश अब धीरे धीरे आत्मनिर्भर भारत की और अपने कदम बढ़ा रहा है। वन नेशन वन राशन कार्ड की भांति देश में वन नेशन वन हेल्थ कार्ड पर काम शुरू हो गया है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल माध्यम से लोगों तक आसानी से पहुंचाने की दिशा में काम करते हुए केंद्र सरकार ने यह अहम कदम उठाया है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का एलान किया। इस खास योजना से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए काफी फायदा होगा। डिजिटल हेल्थ मिशन का मकसद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। सरकार ने इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा। योजना के तहत हर किसी को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसमें उस व्यक्ति से जुड़ी स्वास्थ्य की सभी जानकारी सीधे जुड़ सकेगी। उसकी उम्र से लेकर ब्लड ग्रुप, हेल्थ हिस्ट्री, मेडिकेशन, एलर्जी जैसी कई जानकारी होंगी। वहीं इस मिशन में डॉक्टर, हेल्थ फैसिलिटी, जैसे हॉस्पिटल, क्लीनिक लैब के लिए प्लेटफॉर्म भी होंगे। सम्बद्ध नागरिक का यह रिकॉर्ड्स व्यक्ति तक ही सीमित रहेगा। जब एक व्यक्ति अपने रिकॉर्ड दिखाने की अनुमति देगा तभी दूसरा डॉक्टर या व्यक्ति उस नागरिक की सारी जानकारी देख पाएगा। इस योजना को भारत के हेल्थ सेक्टर में क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है।
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन चार पिलर यानि कि स्तंभ पर काम करेगा। हर नागरिक को एक यूनिक हेल्थ आईडी दी जाएगी और विकल्प दिया जाएगा कि वह उसे अपने आधार से लिंक करवाए या नहीं। ये आईडी राज्यों, अस्पतालों, पैथालॉजिकल लैब और फार्मा कंपनियों में उपयुक्त होगी। ये आईडी पूरी तरह से स्वैच्छिक तरीके से काम करेगी।
अगर कोई व्यक्ति किसी तरह का कैश ट्रांसफर स्कीम का लाभ उठाना चाहता है तो ही उसे अपनी हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से लिंक करना होगा और अगर ऐसा नहीं है तो आधार कार्ड से लिंक करने की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए देश के हर डॉक्टर को यूनिक पहचानकर्ता दिया जाएगा। ये नंबर रजिस्ट्रेशन नंबर से अलग होगा। रजिस्ट्रेशन नंबर राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की ओर से हर डॉक्टर को दिया जाएगा। डॉक्टर को डिजिटल हस्ताक्षर दिया जाएगा, जिसकी मदद से वो मरीजों को प्रिसक्रिप्शन लिखा जाएगा।
भारत में डिजिटल हस्ताक्षर बनाने के लिए फीस देनी होती है। हालांकि इस सेवा के लिए ना ही यूजर और ना ही डॉक्टर को भुगतान करना होता है। इसके तहत डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन को भी एकत्रित करने की योजना है, जो कि हर राज्य में अलग-अलग होगा।
यही इस एप का सबसे बड़ा फायदा है कि अगर शख्स या मरीज की सहमति नहीं होगी तो सरकार भी उसका डाटा देख नहीं पाएगा।