नीरज कुमार सिंह : युवाओं के प्रेरणा स्रोत

पटना। 15 अगस्त 2020 को हम लोग आजादी की 73वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। 15 अगस्त के दिन ही सन् 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था । इस आजादी के लिए न जाने कितने लोगों ने कुर्बानियाँ दी थी । आज आजादी के इतने सालों के बाद भी हमारा देश आतंकवाद एवं नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है । देश की इस गंभीर समस्या पर काबू पाने के लिए आज भी आंतरिक सुरक्षा में विभिन्न बलों को तैनात किया गया है, जिसमें सी आर पी एफ़ की भूमिका काफी अहम् रही है ।                                 आज हम बात करते हैं सी आर पी एफ के ऐसे ही एक वीर सपूत, बिहार के लाल नीरज कुमार सिंह कि जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा को दुरुस्त बनाने में अपना महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हुए भारत के विभिन्न हिस्सों चाहे वह छत्तीसगढ़ का बीहड़ जंगल हो या असम का दुर्गम क्षेत्र या कैमूर की पहाड़ियाँ हो, ऐसे सभी जगहों जहाँ नक्सलवाद एवं आतंकवाद एक बड़ी समस्या के रूप में मुँह बाये खड़ा है में अपनी सेवाएं एवं योगदान दिया है । ज्ञातव्य हो कि इन्हें गणतंत्र दिवस’ 2017 के अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा दी जाने वाली पुरुस्कारों में ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया था । 9 अप्रैल, 2018 को शौर्य दिवस के अवसर पर इन्हें भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम् वेंकैया नायडू के द्वारा ‘पुलिस पदक, प्रदान कर सम्मानित किया गया । गौरतलब है कि इन्हें यह सम्मान 20 मार्च’ 2015 को सीआरपीएफ, आर्मी और असम पुलिस बल के संयुक्त अभियान का नेतृत्व करने एवं ऑपरेशन के दौरान मौके वारदात पर देशद्रोहियों को मार गिराने एवं अपने घायल साथियों को घटना स्थल से सकुशल निकालने हेतु प्रदान किया गया था । इस पुरे अभियान में कई देशद्रोही जिंदा गिरफ्तार हुए तथा भाड़ी मात्रा में  गोला एवं बारूद भी बरामद किया गया था । इस प्रकरण में नीरज कुमार सिंह की अदम्य साहस, बहादुरी एवं देश के प्रति अनुकरणीय योगदान को देखते हुए 26 जनवरी’ 2017 को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया था । विदित हो कि नीरज कुमार सिंह पटना जिला के बाढ़ के बिचली मलाही ग्राम के निवासी है । उन्होंने प्राथमिक शिक्षा, मैट्रिक एवं स्नातक बाढ़ से किया । इससे पहले वे सीबीआई के लिए भी चयनित हुए हैं तथा सीआईएसएफ में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बचपन से ही नीरज कुमार काफी मेहनती रहे हैं । सरकारी सेवा में आने से पहले वे कृषि एवं खाद, बीज एवं कीटनाशक के दुकान पर कार्य किया करते थे । बचपन से उन्हें खेल में काफी लगाव था । खासकर क्रिकेट में उनकी अहम् भूमिका रही है। अभी भी उन्हें जब कभी ड्यूटी से हटकर समय मिलता है तो वह अपना समय जनसेवा एवं युवाओं के मार्गदर्शन में देते हैं ।  समय-समय पर वे गांव-गांव जाकर युवाओं को सेना एवं पैरामिलिट्री में जाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। साथ ही खेल के माध्यम से भी अपना भविष्य बनाने के लिए वे युवाओं को प्रेरित करते हैं। अगर देखा जाए तो आज के युवाओं के लिए नीरज कुमार सिंह प्रेरणा के स्रोत हैं । पटना जिला में खासकर बाढ़ जहाँ के वे निवासी हैं, वहाँ के युवा भी उन्हीं की तरह बनना चाहते हैं तथा उनका अनुकरण करते हैं । बाढ़ के युवाओं में भी नीरज सिंह की ही तरह देश सेवा में जाना का जज़्बा दिखता है तथा वे चाहते हैं कि बल में भर्ती होकर देश की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दें ।

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