भारत में 50 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार

बाल मुकुन्द ओझा

द स्टेट ऑफ द वर्ल्डस चिल्ड्रन के अनुसार, दुनिया में पांच साल से कम उम्र का हर तीसरा बच्चा यानि 70 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार है। यूनिसेफ के अनुसार बच्चों में पोषण की कमी का सीधा प्रभाव उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। भारत में हालात और भी बदतर हैं जहां करीब 50 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। जिसका परिणाम न केवल उनके बचपन पर पड़ रहा है बल्कि उनका भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है।
पौष्टिक आहार को लेकर दुनियां में व्यापक हलचल मची है। आहार मनुष्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना कोई भी प्राणी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया है की विश्व में हर साल लाखों लोगों की मौत पौष्टिक आहार न लेने की वजह से हो रही है। ये मौतें जागरूकता के आभाव में हो रही है जब की दुनियां में पौष्टिक आहार की कोई कमी नहीं है। गरीब और अमीर सभी वर्ग के लोग पौष्टिक आहार नहीं लेने से अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे है जो बेहद चिंताजनक है। दुनिया में प्रचुर खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद लोगों के लिए स्वास्थ्यपरक आहार आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके चलते प्रतिवर्ष 1.10 करोड़ लोगों की समयपूर्व मौत होने का अनुमान है। स्वास्थ्यकर भोजन अपनाने से इन मौतों को रोका जा सकता है। रिपोर्ट में 190 देशों के खान-पान के आंकड़े एकत्र किए गए हैं। इसमें पौष्टिक भोजन की कमी और जरूरत से ज्यादा कैलोरी भोजन लेने से उत्पन्न कारणों का जिक्र करते हुए बीमारियों के खतरे का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार बीमारियों के 11 बड़े कारणों में खान-पान से जुड़ा खतरा सबसे बड़ा है। आने वाले समय में यह चुनौती और बड़ी होगी।
हमारे जीवन में भोजन की बहुत जरूरत है। भोजन है तो हमारा जीवन है। खाना खाने से ही हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और उस ही ऊर्जा से हम अपने दिन भर के सारे काम करते हैं। अगर हम भोजन नहीं करते हैं तो हमारा शरीर काम भी नहीं कर पाता है। मानव शरीर अपनी ऊर्जा के लिए खानपान पर निर्भर रहता है। हमारे शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए पोषक पदार्थों की जरूरत होती है। ये पोषक पदार्थ अलग-अलग तरह के भोजन से हमें मिलते हैं, यानि ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद और मीट वगैरह आदि। शारीरिक श्रम करना, सोना और आराम करने की तरह ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है। भोजन का मतलब यह नहीं होता कि आप कुछ भी खा रहे हैं। ऐसा भोजन करें जो स्वच्छ और पोषण तत्वों से भरपूर हो । इससे न सिर्फ हम बीमारियों से दूर रहते हैं, बल्कि शारीरिक विकास भी अच्छी तरह होता है। संतुलित आहार के अनेक फायदे नहीं है जैसे आप के शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और अच्छी नींद को बढ़ावा भी देता ह। संतुलित आहार शरीर में वसा कम करता है साथ ही शरीर को अच्छे से काम करने के लिए प्रेरित करता है। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों व महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे वह आसानी से कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। कुपोषण की जानकारी होना जरूरी है। कुपोषण प्राय पर्याप्त संतुलित आहार के अभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है।
आहार हमारे जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। इससे हमें ऊर्जा मिलती है । जब तक आहार में पौष्टिक तत्व नहीं होंगे तब तक शरीर का विकास उचित प्रकार से नहीं होता है। आहार में पौष्टिक तत्व होने आवश्यक है जो शरीर का वर्द्धन करें। हमारे देश में गरीबी एवं अज्ञानता के कारण भोजन में पौषक तत्वों की कमी रहती है। इन्ही कारणों से बच्चों में कुपोषण एवं वयस्कों में कई विकार उत्पन्न होते है। आहार में कार्बोज, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण एवं विटामिन विद्यमान हो तभी व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि एवं विकास होगा। इस प्रकार के आहार में जल एवं फाइबर की भी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार भोजन में अनाज और दालों का अनुपात 5 और 1 होना चाहिए। लेकिन भारतीय आहार में भोजन का 60 प्रतिशत हिस्सा तो अनाज का होता है। अनाज भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। लेकिन उनमें आवश्यक अमीनो एसिड नहीं होता हैं। मिथियोनीन नामक प्रोटीन दालों में मिलता है, जो विकास और ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है।

 

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