लौट के बुद्धू घर को आये

राजस्थान के सियासी संग्राम का पटाक्षेप

बाल मुकुन्द ओझा

राजस्थान की गहलोत सरकार पर पिछले एक महीने से मंडराता संकट फिलहाल टल गया है। राहुल गांधी और सचिन पायलट के बीच हुई मुलाकात के बाद कांग्रेस के बागी नेता ने अपने हथियार डालते हुए गहलोत सरकार के साथ रहने की बात कही है। एक माह की पांच सितारा बाड़ाबंदी के बाद कांग्रेस का संकट खत्म होगया हो ऐसा लगता नहीं है। सचिन पायलट के बयान को देखकर तो ऐसा ही लगता है। इसे पायलट की बिना शर्त वापसी बताया जा रहा है। अशोक गहलोत का जादू काम कर गया। दिल मिले ना मिले मगर सचिन पायलट जैसे तैसे अपनी इज्जत बचाने में लगे हुए है। उनकी मांगे तुरंत नहीं मानी गयी और एक कमेटी बना कर लॉलीपॉप थमा दिया गया। पायलट खेमे को फिलहाल तो कुछ भी हाथ नहीं लगा। भाजपा भी कांग्रेस के खेल को देखकर हक्की बक्की सी रह गयी। कांग्रेस के इस खेल को खत्म होने का संकेत तभी मिल गया था जब पायलट खेमे के बड़बोले विधायक भंवर लाल शर्मा सरेंडर हो गए और गहलोत से मिलने जयपुर पहुँच गए। एक महीने से चुप्पी साधे हुए पायलट यह तो समझ चुके थे कि वह अपने 19 विधायकों के साथ राज्य सरकार को नहीं गिरा सकते हैं।
अपनी बगावत को पद और प्रतिष्ठा की बात कहने वाले सचिन पायलट ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया है, जो कि सचिन पायलट की सभी समस्याओं का समाधान करेगी। इन वादों के साथ ही सचिन पायलट मान गए हैं और जल्द ही वो कांग्रेस में किसी बड़े पद पर दिखाई दे सकते हैं। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पार्टी में भाईचारा बरकरार है। तीन सदस्यों की कमेटी बनाई गई है, जो सभी विवादों को सुलझाएगी। बीजेपी की ओर से सरकार गिराने की कोशिश की गई, लेकिन हमारे विधायक एक साथ हैं और एक भी व्यक्ति हमें छोड़कर नहीं गया।
इस दौरान राजस्थान में कई चौंकाने वाले घटनाक्रम भी देखने को मिले। पार्टी उनकी बगावत को शांत कर राहत की सांस ले पाती कि इससे पहले राजस्थान से एक और खबर आ गई है। गहलोत के खेमे के विधायक इस नए घटनाक्रम से नाराज हो गए हैं। रविवार को हुई कांग्रेस विधायकों की बैठक में सीएम अशोक गहलोत के करीबी एक कैबिनेट मंत्री ने कहा था कि अब वे बागी विधायकों की वापसी नहीं चाहते हैं। उनका ये बयान एक तरह से अशोक गहलोत का बयान माना जा रहा था। लेकिन सोमवार को अचानकर घटनाक्रम बदल गया तो अब ये विधायक खुद को ठगा से महसूस कर रहे हैं।
सच तो यह है पायलट गुस्से में थे और अशोक गहलोत को सबक सिखाना चाहते थे। उन्होंने बीजेपी से भी हाथ मिला लिए। यह कहा जाने लगा कि सचिन पायलट अशोक गहलोत की सरकार सरकार गिराएंगे और बीजेपी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बनेंगे। मगर इस बीच इन के 3 साथी चेतन डूडी, रोहित बोहरा और दानिश अबरार दिल्ली के पंडारा रोड थाने का बहाना बनाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास जयपुर पहुंच गए और सारा प्लान धरा का धरा रह गया। गहलोत और पायलट के हाथ क्या लगेगा यह तो पता नहीं पर जानकारों का कहना है कि दोनों नेताओं का अहम इतना बड़ा है कि सियासी झगड़े में इस पड़ाव को बस युद्ध विराम की संज्ञा दे सकते हैं। कोंग्रेसी सूत्रों की माने तो पार्टी आलाकमान ने 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री बनाने का भरोसा दिया है। यहीं नहीं, उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनने का भी प्रस्ताव है। एक महीने की बाड़ाबंदी में यदि किसी को नुक्सान हुआ है तो वह राजस्थान की जनता है, जिसके कोरोना काल में कल्याणकारी कार्य और विकास पूरी तरह ठप्प हो गया।

 

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