कोरोना कहर और जल संकट


बाल मुकुन्द ओझा
भारत में कोरोना कहर के दौरान देश में आसन्न जल संकट की तरफ अभी हमारा ध्यान नहीं गया है जो कोरोना से भी अधिक खतरनाक है। कोरोना ने हमारी बुनियादी समस्याओं से एक बारगी हमारा ध्यान हटा दिया है जो निश्चय ही चिंताजनक है। इनमें पेयजल प्रमुख है जो मानव की मूलभूत जरुरत है। कोरोना का मुकाबला अवश्य करें मगर जल संकट से भी सचेत होने की महती जरुरत है। भारत विश्व के उन 17 देशों में शामिल है जो बहुत गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। गंभीर जल संकट वाले देशों की सूची में भारत को 13वें स्थान पर रखा गया है और इसकी जनसंख्या इस श्रेणी के अन्य 16 देशों की जनसंख्या से तीन गुना से अधिक है। उत्तर भारत के प्रदेशों में भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है।
जल ही जीवन है कहते हम थकते नहीं मगर जल बचाने के लिए कुछ करते धरते भी नहीं। शायद यह सोचकर चुप बैठ जाते है कि मेरा पडोसी जल बचाएगा मुझे क्या जरुरत है। हमारी यही धकियानुसी सोच हमें बर्बादी की और ले जा रही है और वह दिन दूर नहीं जब हमारे प्यासे मरने की नौबत आ जाएगी। तब तक बहुत देर हो जाएगी। भारत सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की माने तो देश इस समय भीषण जल संकट से गुजर रहा है और इस आसन्न संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो हालत बदतर होने की सम्भावना है। नीति आयोग द्वारा गुरुवार को जारी जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार भारत अब तक के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है। आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के करीब 60 करोड़ लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। करीब 75 प्रतिशत घरों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, देश में करीब 70 प्रतिशत पानी पीने लायक नहीं है। आयोग का कहना है कि इस संकट के चलते लाखों लोगों की आजीविका और जिंदगी खतरे में है।
जल जीवन का सबसे आवश्यक घटक है और जीविका के लिए महत्वपूर्ण है। यह समृद्र, नदी, तालाब, पोखर, कुआं, नहर इत्यादि में पाया जाता है। हमारे दैनिक जीवन में जल का बहुत महत्व है। हमारा जीवन तो इसी पर निर्भर है। यह पाचन कार्य करने के लिए शरीर में मदद करता है और हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यह हमारी धरती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमारे जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण घटक है और सार्वभौमिक है। जल वनस्पति एवम् प्राणियों के जीवन का आधार है उसी से हम मनुष्यों, पशुओं एवम् वृक्षों को जीवन मिलता है।
धरती पर जब तक जल नहीं था तब तक जीवन नहीं था और जल ही नहीं रहेगा तो जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। वर्त्तमान समय में जल संकट एक विकराल समस्या बन गया है। नदियों का जल स्तर गिर रहा है. कुएं, बावडी, तालाब जैसे प्राकृतिक स्त्रोत सूख रहे हैं. घटते वन्य क्षेत्र के कारण भी वर्षा की कमी के चलते जल संकट बढ़ रहा है. वहीं उद्योगों का दूषित पानी की वजह से नदियों का पानी प्रदूषित होता चला गया लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
सरकार को जनता में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रबन्ध और उपाय करने होंगे। है। आम आदमी को जल संरक्षण एवं समझाइश के माध्यम से पानी की बचत का सन्देश देना होगा। वर्षा की अनियमितता और भूजल दोहन के कारण भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझे और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।

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