चुप्पी ने तोड़े सब के अरमान

सियासी संग्राम -

बाल मुकुंद ओझा

सचिन और वसुंधरा की चुप्पी ने लगता है सब के अरमानों पर एक बारगी पानी फेर दिया है। सचिन ने राहुल और प्रियंका से मुलाकात कर अपनी लम्बी चुप्पी को आखिर तोड़ ही दिया और दिल की बातें उगलदी। बताते है यह मुलाकात अब्दुल्ला परिवार ने दोनों पक्षों में करवाई। सच्चाई तो भगवन ही जाने मगर यह सच है की लम्बी इंतजारी के बाद मुलाकात जरूर हो गयी और उसके रंग भी जल्द ही दिखेंगे। इसके साथ ही राजस्थान के सियासी संग्राम पर विराम लग जायेगा। इस दौरान भाजपा फूंक फूंख कर कदम रख रही है। एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार भाजपा को पत्ता था की सचिन के पास पर्याप्त नंबर गेम नहीं है इसलिए उसने जल्द बाज़ी में कोई कदम नहीं उठाया। भाजपा ने ज्योतिराव सिंधिया को आगे किया था। सिंधिया ने बात कर वास्तविकता से भाजपा को अवगत करा दिया जिसके फलस्वरूप भाजपा आलाकमान ने राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के अपने कदम रोक लिए। दूसरी तरफ वसुंधरा राजे भी ऐसा कोई कदम उठाने के पक्ष में नहीं थी। समझौते के अनुसार सचिन का मान सामान फिर बहाल किया जायेगा। यदि वे उप मुख्यमंत्री बनने को राजी नहीं होते है तो उनके एक सामर्थक को यह पद दिया जा सकता है। दीपेंद्र सिंह शेखावत उपमुख्यमंत्री बनाये जा सकते है। पायलट कोटे से पांच केबिनेट मंत्री भी बनाये जा सकते है। पायलट ने प्रभारी महासचिव पांडेय का प्रभार हटाने की
मांग की है जिस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है।कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत को फ़िलहाल हटाने से मना कर दिया है और पायलट को महासचिव बनाने का प्रस्ताव किया है जिस पर पायलट अपने समर्थक विधायकों से बात कर बताने को कहा है। बहरहाल एक माह से चल रहा सियासी संग्राम अब समाप्त होने के आसार बन गए है और एक दो दिन में सारी स्थिति साफ़ हो जाएगी।

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