चुप्पी में भी छिपे है बड़े बड़े राज

राजस्थान के सियासी संग्राम

बाल मुकुंद ओझा

कहते है चुप्पी में भी छिपे है बड़े बड़े राज। राजस्थान के सियासी संग्राम में दो बड़े नेताओं ने चुप्पी साध रखी है जो आने वाले तूफ़ान का संकेत है।तीसरे नेता वोकल हो रहे है। देखा जाये तो सम्पूर्ण प्रदेश की सियासत इन तीनों के इर्द गिर्द ही घूमती है। चुप्पी साद्ये नेता है कांग्रेस के बागी सचिन पायलट और भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। जब से सियासी संग्राम शुरू हुआ है तभी से दोनों नेताओं ने चुप्पी साध राखी है।सचिन पायलट ने अपने १८ विधायकों के साथ बागी रुख अख्तियार कर रखा है और अब तक मीडिया के सामने आकर अपना मुंह नहीं खोला है। इसी भांति वसुंधरा ने भी अब तक अपना मुंह खोलने में परहेज कर रखा है। सारी राजनीति का केंद्र बिंदु ये नेता बने हुए है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार बयानों पर बयान झाड़ रहे है।
वसुंधरा राजे बड़ी चतुर राजनेता है। मोदी और शाह ने उनकी नाक में नकेल डालने की कई बार चेष्टा की मगर सफल नहीं हुए। राजे को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना कर प्रदेश की सियासत से दूर करने का प्रयास किया मगर उसमें भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी। अब वसुंधरा अपने बाड़े से निकलकर दिल्ली पहुंची है और राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई नेताओं से मुलाकात की है। इन मुलाकातों के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गयी है।
सचिन पायलट को भी सियासत का चतुर खिलाडी समझा जाता है। उन्होंने बगावत जरूर की है मगर अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले है। उनकी चुप्पी भी डरावनी है। वे क्या चाहते है इसका स्पष्ट खुलासा उन्होंने अब तक नहीं किया है।विधायकों की बाड़ेबंदी फ़िलहाल बरक़रार है। गहलोत खेमे के विधायक जहाँ जैसलमेर के पांच सितारा होटल में है वहीँ सचिन खेमे के विधायक दिल्ली में बताये जा रहे है। बाड़ेबंदी की आलोचना करने वाली भाजपा ने भी अब बाड़ेबंदी का आखिर सहारा ले ही लिया है। उन्होंने अपने कुछ विधायकों को गुजरात भेज दिया है।
बसपा से कांग्रेस में मिलने वाले विधायकों को लेकर भी काफी संशय का वातावरण है। अब न्यायालय ही इस पर ११ अगस्त को कोई निर्णय करेगा।यह भी बताया जाता है गहलोत खेमे के पास १०० के लगभग विधायक है। भाजपा के पास ७५ विधायक है वहीँ पायलट के पास २२ विधायक बताये जाते है। तीन चार विधायकों की निष्ठां संदेहास्पद है। इस दौरान यदि बसपा विधायकों को प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो गहलोत सरकार खतरे से घिर जाएगी। बहरहाल १४ अगस्त से शुरू हो रही विधान सभा में ही फ्लोर टेस्ट में कोई अंतिम निर्णय हो पायेगा, जिस पर पूरे देश की निगाह है।

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