दो विधायकों के टूटते ही गहलोत सरकार का पतन निश्चित

बाल मुकुंद ओझा

राजस्थान में गहलोत सरकार को यह चिन्ता सताए जा रही है की केवल एक या दो विधायकों के समर्थन के बूते पर सरकार का बहुमत साबित करना आग से खेलने के बराबर है। यदि आदिवासियों की पार्टी बीटीपी के दो विधायकों ने ऐनवक्त धोखा दे दिया तो सरकार को बचाना मुश्किल होगा। हालाँकि सरकार 200 के सदन में 107 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। मगर असल में यह संख्या 100 से 102 के बीच बताई जा रही है इनमें भी 5 – 7 विधायकों की स्थिति संदेहास्पद बताई जा रही है। गहलोत सरकार का एक मंत्री हॉस्पिटल में भर्ती होने से जयपुर आने की स्थिति में नहीं है। भाजपा भी दो विधायकों के टूटने की बाट जोह रहे है। भाजपा के एक उच्च पदस्त सूत्र ने बताया गहलोत सरकार का पतन निश्चित है। इसमें कुछ विलम्ब हो सकता है। बताया जा रहा है पायलट खेमे की निगाह कम से कम छह ऐसे विधायकों पर है जो उनसे मिल सकते है। यदि ऐसा हुआ तो गहलोत सरकार को गिरने से कोई भी नहीं बचा पायेगा। दूसरी तरफ राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को बसपा की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और छह विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
राज्यपाल कलराज मिश्रा द्वारा 14 अगस्त से विधानसभा सत्र की अनुमति देने के बावजूद राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार का संकट कम नहीं हुआ है। विधानसभा सत्र वैसे तो कोरोना महामारी पर विचार को लेकर बुलाया जा रहा है। लेकिन गहलोत सरकार का असली मकसद बहुमत साबित करना है।
गहलोत सरकार अभी भी चौतरफा संकट से घिरी है। राज्यपाल का मामला निपटने से गहलोत सरकार ने संतोष की सांस ली है। फिलहाल गहलोत का पायलट और भाजपा से सीधा मुकाबला है। बीच में न्यायालय के आने से संकट बढ़ा है। भाजपा विधायक मदन दिलावर और बसपा ने छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनोतो दी है जिसकी सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है। पायलट खेमे ने विधानसभा सत्र में भाग लेने की घोषणा की है। कांग्रेस विधायकों की पांच सितारा होटल में बाड़ाबंदी बदस्तूर जारी है। यह अब लम्बी चलने की सम्भावना है।
वहीँ गहलोत ने राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह लड़ाई हम जीतेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्थायी व मजबूत है। गहलोत ने कहा, ‘केंद्र सरकार के सहयोग से, भाजपा के षड्यंत्र से, धनबल के प्रयोग से राज्य की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र चल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘यह जो माहौल बना है, उससे चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार स्थायी और मजबूत है।
प्रदेश में फ्लोर टेस्ट की ना तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ना ही भाजपा और ना ही सचिन पायलट ने मांग की है, जोकि राजस्थान के सियासी संग्राम को और भी दिलचस्प बना रहा है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि जिस तरह से हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी जैसे वकील सचिन पायलट के लिए कोर्ट में खड़े हो रहे हैं, बागी विधायक भाजपा शासित राज्य में ठहरे हैं, यह सब इस बात का प्रमाण है कि इस पूरे खेल के पीछे भाजपा का हाथ है।
दूसरी तरफ सचिन पायलट की चुप्पी को देश और प्रदेश में कोतुहल से देखा जा रहा है। लोग जानना चाहते है आखिर सचिन चाहते क्या है। हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इतनी फजीती के बाद भी सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी को छोड़ क्यों नहीं रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री गहलोत ने सीधे सचिन पायलट पर विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकार गिराने तथा निक्कमा और नाकारा होने का आरोप तक लगा दिया। अब हर किसी की नजरें सचिन पायलट पर टिकी हैं। क्योंकि सचिन पायलट बगावत करने के बाद से ही शांत हैं। पायलट ने यह जरूर कहा है कि वो भाजपा में शामिल नहीं होंगे। सचिन पायलट को जहां तक पार्टी से अभी तक न निकाले जाने की बात है तो सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सांसद राहुल गांधी सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं हैं। यही कारण है कि पार्टी की ओर से अभी तक सचिन पायलट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सचिन पायलट का भी कहना है कि उनका विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं बल्कि सीएम अशोक गहलोत है।

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