आखिर सचिन चाहते क्या हैं !

बाल मुकुंद ओझा

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार एक पखवाड़े से चौतरफा संकट से घिरी है। सचिन पायलट की बगावत के बाद पहला संकट पायलट खेमे से था। दूसरा भाजपा का था।तीसरा संकट न्यायिक था और चौथा संकट कोरोना का था जो राज्य में बढ़ता ही जा रहा है। अब पांचवां संकट और आ खड़ा हुआ। यह संकट राज्यपाल द्वारा विधानसभा सत्र आहूत न करने की इज़ाज़त का है। राज्यपाल ने तीसरी बार पत्रावली लौटा दी। मुख्यमंत्री गहलोत ने बुधवार को एकबार फिर राज्यपाल से मिले और जानना चाहा की आखिर वे चाहते क्या है। बताते है राज्यपाल विधानसभा आहूत होने की स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर चिंतित है जिसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। सियासी संकट के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र के बीच लगातार तनाव बरकरार है। मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं कि राज्यपाल रिमोट से चल रहे हैं और संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जबकि कलराज मिश्र इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। प्रदेश में फ्लोर टेस्ट की ना तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ना ही भाजपा और ना ही सचिन पायलट ने मांग की है, जोकि राजस्थान के सियासी संग्राम को और भी दिलचस्प बना रहा है।
कांग्रेस आरोप लगा रही है कि जिस तरह से राज्यपाल ने रुख अख्तियार किया है और हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी जैसे वकील सचिन पायलट के लिए कोर्ट में खड़े हो रहे हैं, बागी विधायक भाजपा शासित राज्य में ठहरे हैं, यह सब इस बात का प्रमाण है कि इस पूरे खेल के पीछे भाजपा का हाथ है।
सरकार अब अंतिम हथियार के रूप में दिल्ली जा कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात का प्रोग्राम बना रही है ताकि राज्यपाल की शिकायत की जिसके।दूसरी तरफ सचिन पायलट की चुप्पी को देश और प्रदेश में कोतुहल से देखा जा रहा है। लोग जानना चाहते है आखिर सचिन चाहते क्या है। हर व्यक्ति के मन में यह सवालउठना लाज़मी है कि आखिर इतनी फजीती के बाद भी सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी को छोड़ क्यों नहीं रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री गहलोत ने सीधे सचिन पायलट पर विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकार गिराने तथा निक्कमा और नाकारा होने का आरोप तक लगा दिया। अब हर किसी की नजरें सचिन पायलट पर टिकी हैं। क्योंकि सचिन पायलट बगावत करने के बाद से ही शांत हैं। पायलट ने यह जरूर कहा है कि वो भाजपा में शामिल नहीं होंगे। सचिन पायलट को जहां तक पार्टी से अभी तक न निकाले जाने की बात है तो सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष और वर्तमान सांसद राहुल गांधी सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं हैं। यही कारण है कि पार्टी की ओर से अभी तक सचिन पायलट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सचिन पायलट का भी कहना है कि उनका विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं बल्कि सीएम अशोक गहलोत से है।

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