दूध अपनाये और दारू को भगाये

बाल मुकुन्द ओझा
विश्व दुग्ध दिवस देश और दुनिया में 1 जून को मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य दुग्ध का जन-जन तक प्रचार-प्रसार करना है। प्रथम विश्व दुग्ध दिवस 1 जून, 2001 को मनाया गया था। इसे मनाने के पीछे का मकसद ये हैं कि प्राकृतिक दुध के सभी पहलूओं के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता को और बढ़ाया जा सके। लोगों को दूध के बारे में अधिक जानकारी मिल सके ताकि उन्हें इस बात का एहसास हो दूध हमारे जीवन में कितना अहमियत रखता है। भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था क्योंकि यहाँ दूध दही की नदिया बहती थी। धीरे धीरे दूध दही की नदिया लुप्त होती गयी और आज एक समय ऐसा भी आ गया की दूध के दर्शन भी दुर्लभ होते जा रहे है। इस का एक मुख्य कारण गौपालन में हमारी अरुचि। जनसँख्या विस्फोट और शहरीकरण ने भी इसमें खासा योगदान दिया।
दूध हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का जतन रखता है और सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व पहुंचाता है जिसमें कैल्शियम , मैगनिशियम, जिंक, फॉसफोरस, ऑयोडीन, आइरन, पोटेशियम, फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी12, प्रोटीन,स्वस्थ फैट आदि शामिल है। ये बहुत ही ऊर्जायुक्त आहार होता है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराता है क्योंकि इसमें उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन सहित आवश्यक और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड और फैटी एसिड मौजूद होता है। भारत का विश्व दुग्ध उत्पादन में 18 प्रतिशत हिस्सा है। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कृषि के बाद डेयरी उद्योग की प्रमुख भूमिका है। वहीं दूसरे स्थान पर अमेरिका का नाम आता था। जबकि तीसरे स्थान पर पाकिस्तान का नाम आता है। वहीं चीन चैथे तथा जर्मनी पाँचवें स्थान पर स्थित है। दुग्ध उद्योग भारत का एक ऐसा उद्योग है जिस पर ग्रामीण क्षेत्र के सबसे ज्यादा लोग निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ साथ भारत में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला राज्य भी है। भारत में कुल दूध का यहां 17 प्रतिशत से भी ज्यादा उत्पादन किया जाता है।
दुग्ध उद्योग, कृषि की एक श्रेणी है। यह पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्यम है जिसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादन, उसकी प्रोसेसिंग और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। इसके वास्ते गाय-भैंसों, बकरियों या कुछेक अन्य प्रकार के पशुधन के विकास का भी काम किया जाता है। भारत गांवों में बसता है। हमारी आधी से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है तथा 60 प्रतिशत लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब 7 करोड़ कृषक परिवार में प्रत्येक दो ग्रामीण घरों में से एक डेरी उद्योग से जुड़े हैं। भारतीय दुग्ध उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार देश में 70 प्रतिशत दूध की आपूर्ति छोटे सीमांत भूमिहीन किसानों से होती है। भारत में कृषि भूमि की अपेक्षा गायों का ज्यादा समानता पूर्वक वितरण है। भारत की ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में डेरी-उद्योग की प्रमुख भूमिका है।
सच तो यह है हमने आज दूध की जगह दारू को अपना लिया है जिसके फलस्वरूप हमें शारीरिक क्षति उठानी पड़ रही है। दूध जहाँ हमारे शरीर को अनेक पौष्टिक तत्व पहुंचाता है वहां दारू से स्वास्थ्य कमजोर होकर बीमारू हो जाता है। आवश्यकता इस बात की है की हम दूध को अपनाये और दारू को भगाये तभी हमारा और देश का स्वास्थ्य बना रहेगा।

 

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