राजस्थान के सियासी सस्पेंस में कई पेंच 

बाल मुकुंद ओझा

राजस्थान का सियासी सस्पेंस लगातार बढ़ता ही रहा है। सोमवार को सियासी संग्राम की कई दिलचस्प और रोमांचक घटनाएं घटी। लगता है अब सियासी संग्राम गहलोत और पायलट खेमे में न होकर गहलोत सरकार और राज्यपाल के बीच हो गयी है। आज की गतिविधियों का मुख्य केंद्र बिंदु फिर हाई कोर्ट हो गया। स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी एसएलपी वापस ले ली। उनके वकीलों ने नए सिरे से याचिका दाखिल करने की बात कही है। राज्यपाल ने विधानसभा आहूत करने की राज्य सरकार की पत्रावली नयी जानकारी मांगने के साथ सरकार को आज फिर लौट दी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने प्रधान मंत्री को पत्र लिखने के बाद फोन पर भी बात की है। वहीँ हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक मदन दिलावर की बसपा विधायकों के दलबदल की याचिका को विड्रा करने पर ख़ारिज कर दिया ।
दिलावर की और से नयी याचिका दाखिल की जाएगी। बसपा की और से एक याचिका दलबदल को लेकर दाखिल करने की जानकारी मिली है। कांग्रेस के राष्ट्रीय
प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने घोषणा की है की पायलट गुट के तीन विधायक अगले 48 घंटे में वापस कांग्रेस में लौट जायेंगे। हाई कोर्ट में आज राज्यपाल को हटाने को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की। इसके अलावा कांग्रेस विधायक दल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजकर भाजपा पर राज्य सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है।
राज्यपाल ने विधानसभा का सत्र बुलाने की फाइल दूसरी बार लौटा दी है। राज्यपाल ने कहा है कि कोरोना के बीच विधायकों को सदन में बुलाना मुश्किल होगा। राज्यपाल ने सरकार से पूछा है कि क्या आप विश्वास मत प्रस्ताव चाहते हैं? इस बात का जिक्र आपके पत्र में नहीं है, लेकिन मीडिया में आप ऐसा ही बोल रहे हैं। साथ ही पूछा कि क्या आप सत्र बुलाने के लिए 21 दिन का नोटिस देने पर विचार कर सकते हैं? बसपा महासचिव सतीश मिश्रा ने अपने सभी 6 विधायकाें काे व्हिप जारी करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह के ‘अविश्वास प्रस्ताव’ या किसी भी तरह की कार्यवाही में कांग्रेस के खिलाफ वाेट देंं। बसपा के प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने कहा कि पार्टी के आदेश नहीं मानने पर इन विधायकों की विधानसभा की सदस्यता खत्म हाे सकती है। इस संबंध में स्पीकर और राज्यपाल काे भी पत्र भेजा गया है। प्रदेश में विधायकाें की खरीद-फराेख्त के ऑडियाे टेप सामने आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने 18 जुलाई को मांग की थी कि राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। गहलोत ने उनके विधायकों का दलबदल कराने के बाद अब फोन टेप कराकर एक और गैरकानूनी व असंवैधानिक काम किया है।