दिल्ली में जलभराव के लिए दिल्ली सरकार के विभाग जिम्मेदार – महापौर

तीनों निगम अपने-अपने क्षेत्रों मे लगाएंगी एक-एक लाख पौधे

नई दिल्ली। हल्की बारिश में दिल्ली ने जल जमाव का अभूतपूर्व नजारा दिखा दिया है। इसके तत्काल बाद से ही नगर निगम सक्रिय नजर आ रही है लेकिन दिल्ली सरकार के अंतर्गत विभाग अब भी उदासीन बने हुए हैं।इन्ही बातों को लेकर तीनों जोन के मेयर ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर जल जमाव के लिए दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले विभागों को जिम्मेदार ठहराया और कहा तय समय पर उन्होंने अपने नाले से गाद नहीं निकाले फलस्वरूप जल जमाव झेलना पड़ा।

उत्तरी दिल्ली के महापौर जय प्रकाश ने बताया कि मानसून से पहले दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले पीडब्ल्यूडी, डीएसआईआईडीसी और बाढ़ नियंत्रण व सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मानसून की तैयारी को लेकर बैठक हुई थी। जिसमें दिल्ली सरकार के विभागों द्वारा नालों से गाद निकालने के कार्य को लेकर दावा किया गया था। जोकि रविवार को हुई मूसलाधार बारिश में झूठे साबित हुए। उन्होंने बताया कि उत्तरी निगम के अंतर्गत आने वाले नालों की लंबाई 166 किलोमीटर है जिनसे 11 हजार मीट्रिक टन गाद निकाली गई है। साथ ही जलभराव की समस्या से निजात पाने के लिए निगम द्वारा 154 अतिरिक्त पंप की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कल वो जलभराव की स्थिती का जायजा लेने के लिए किराड़ी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे जिसे के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर आमंत्रित किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने अभी तक निगम का बकाया फंड जारी नहीं किया है जिसके संबंध में उन्होंने गत सप्ताह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्होंने फंड देने का आश्वासन दिया था, हालांकि अभी तक हमें फंड जारी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा उत्तरी दिल्ली नगर निगम की पहली और दूसरी तिमाही की 1108 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। जिसे दिल्ली सरकार तुरंत जारी करें।
इसके साथ ही महापौर ने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने क्षेत्र में पर्यावरण को हर-भरा बनाने के लिए एक लाख पौधे लगाएगी।
महापौर अनामिका ने कहा कि दिल्ली की सभी एजेंसियों को एक साथ मिलकर जलभराव की समस्या का समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि द.दि.न.नि. ने मानसून से पूर्व ही अपने सभी 247 नालों के गाद निकालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया था। सभी नालों में से लगभग 28000 मी.टन गाद निकाली गई। निगम द्वारा दिल्ली सरकार के कई विभागों के साथ जलभराव की समस्या को लेकर अनेकों बैठकें की गई और उनके द्वारा आश्वासन भी दिया गया कि डीसिल्टिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है, परन्तु दिल्ली में भारी बारिश जलभराव ने दिल्ली सरकार के खोखले दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने दिल्ली सरकार को ही जलभराव की समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
मेयर अनामिका ने दक्षिणी निगम की वित्तिय स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि निगम को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इस स्थिति से निपटने के लिए सभी संभव राजस्व प्राप्ति के विकल्पों और स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण निगम को दिल्ली सरकार से वित्तीय सहायता की उम्मीद करने के बजाय स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिणी निगम ने पहले ही विशाल पौधारोपण अभियान शुरू कर दिया है और अपने चार क्षेत्रों में लगभग 7000 पौधे लगाए हैं। सुश्री अनामिका ने कहा कि इस वर्ष हम क्षेत्र के पार्षदों, आरडब्ल्यूए बाजार संघों और धार्मिक संगठनों के सहयोग से सभी जोन में एक लाख पौधे लगाएंगे।
पूर्वी दिल्ली के महापौर  निर्मल जैन ने कहा कि निगम के अंतर्गत आने वाले 223 नालों की सफाई कर 58 हजार मीट्रिक टन गाद को निकाला गया। उन्होंने कहा कि कोरोना की जंग में भी हम बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। इसके तहत सरकार द्वारा जीटीबी अस्पताल को कोविड अस्पताल के रूप में घोषित करने के बाद स्वामी दयानंद अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ गया था। इसको देखते हुए हमने वहां डबल ओपीडी की व्यवस्था भी की है। इसके साथ ही जून तक का वेतन भी कर्मचारियों को जारी कर दिया है।

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