राजभवन और सरकार में जबरदस्त टकराव

बाल मुकुंद ओझा

राजस्थान में सियासी संग्राम चरम पर पहुंच गया है। सचिन पायलट गुट की याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट के यथास्थिति के आदेश के बाद सियासी हलचल जबरदस्त तरीके से तेज हो गई है। राजभवन और सरकार में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। यह टकराव राज्यपाल द्वारा सरकार की अनुशंसा के बाद विधानसभा का विशेष सत्र नहीं बुलाने को लेकर हुई है। सीएम ने कहा कि गुरुवार को राज्यपाल से मिलकर विधानसभा सत्र बुलाने की मांग रखी थीण् हमें उम्मीद थी राज्यपाल रात तक विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति देंगे। लेकिन हमें दुख है कि राज्यपाल ने कोई फैसला नहीं किया। ऊपर से दबाव के कारण वे सत्र बुलाने का निर्देश नहीं दे रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर विधायकों के साथ जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और विधायकों से हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल गहलोत गुट के विधायकों से भी मिले। विधायकों ने राजभवन में तानाशाही नहीं चलेगी और राज्यपाल न्याय करो के नारों से राजभवन को गुंजा दिया।
राजस्थान का सियासी संग्राम बेहद आक्रामक होता जा रहा है। हाई कोर्ट से फैसला आने के बाद अशोक गहलोत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजस्थान की सियासत के अंदर भले ही अशोक गहलोत पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पर भारी पड़ते दिखाई देते हों लेकिन कानूनी लड़ाई में पायलट की जीत ने गहलोत सरकार पर संकट ला दिया है।
राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा पायलट गुट की याचिका पर शुक्रवार को यथास्थिति का आदेश देने के बाद अब गेंद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो गयी है जहाँ सोमवार को सुनवाई की तिथि तय हुई है। दूसरी तरफ विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। गहलोत ने कहा है राज्यपाल सत्र आहूत नहीं करते है तो जनता राजभवन का घेराव करें तो वह जिम्मेदार नहीं होंगे। गहलोत पिछले कुछ दिनों से काफी आक्रामक हो रहे है। गांधीवादी कहे जाने वाले गहलोत ने पहले पायलट को नकारा और निक्कमा कहा फिर प्रधान मंत्री मोदी को लिखकर उनकी सरकार को असंवैधानिक तरीके से गिराने का आरोप लगाया। सियासी क्षेत्रों में गहलोत के इस आचरण को काफी अचरज से देखा जा रहा है। सीएम गहलोत द्वारा राज्यपाल को लेकर दिये गये बयान पर बीजेपी ने हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि गहलोत के बयान के बाद राजभवन की सुरक्षा खतरे में है। राजभवन पर तुरंत प्रभाव से सीआरपीएफ तैनात करनी चाहिए। प्रदेश की पुलिस पर अब भरोसा नहीं कर सकते हैं। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सीएम पर जवाबी हमला बोलते हुए कहा कि राज्यपाल के लिये गहलोत धमकी वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि राज्यपाल का पद संवैधानिक प्रमुख का है।
सचिन पायलट ने आज बड़ा बयान देते कहा. मेरी लड़ाई अशोक गहलोत से कांग्रेस में रहकर ही होगी लड़ाई, नहीं जाऊँगा बीजेपी में। कोर्ट के फैसले के बाद प्रेससवार्ता कर दूंगा जवाब।
नंबरगेम में अशोक गहलोत बहुमत के नज़दीक दिखाई दे रहे हैं। गहलोत के पास बहुमत के करीब या फिर बहुमत जितने ही विधायकों का समर्थन हासिल हैण् गहलोत को पता है कि उन्हें सरकार बचानी है तो फ्लोर टेस्ट को पास करना जरूरी होगा। ऐसे में गहलोत अपने मौजूदा विधायकों की एकजुटता कायम रखने के साथ ही पायलट गुट को अपनी ओर करने की रणनीति में काम कर रहे हैं। ऐसे में ये तय है कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान अगर 5 से 6 विधायक भी इधर से उधर चले जाते हैं तो समीकरण बिगड़ सकते हैं। दूसरी तरफ सचिन पायलट के गुट में अभी 22 विधायक हैं जिसमें 19 कांग्रेस के और 3 निर्दलीय विधायक हैं। ऐसे में अगर सचिन पायलट को बीजेपी समर्थन कर देती है तो गहलोत सरकार पर संकट गहरा सकता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तम्भकार हैं)

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