सोनिया और राहुल की चुप्पी आश्चर्यजनक

बाल मुकुंद ओझा
राजस्थान के सियासी संग्राम का सस्पेंस सोमवार को जाँच एजेंसियों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया है। राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिली है।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुनाया जाने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की इस सियासी लड़ाई के कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई का फैसला किया है।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा और सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम होगा।
दूसरी तरफ हालाँकि पायलट गुट ने अभी तक कोई साफ़ स्टेण्ड नहीं लिया है मगर कहा है हम अभी भी कांग्रेस में है और पार्टी में रहकर नेतृत्व परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे है। वहीँ आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने पायलट पर अपना मुंह खोला है। कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी से भी ख़बरें बाहर आ रही है। कहा जाता है दोनों गुटों के पांच छह विधायक दूसरे खेमे में जाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री अदालत के फैसले का इंतज़ार कर रहे है। फैसले के बाद विधानसभा का सत्र सोमवार को बुलाने की चर्चा हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि यह केवल किसी विधायक/विधायकों के की सदस्यता और अयोग्यता का मामला नहीं है। यहाँ अहम सवाल ये है कि ऐसे में लोकतंत्र कैसे चलेगा? इसलिए इसपर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है। कोर्ट ने सोमवार को विस्तृत सुनवाई के लिये मामले को
सूचीबद्ध किया है। सोमवार को कोर्ट राजस्थान मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं, स्पीकर के दलबदल कानून से जुड़े अधिकारों और स्पीकर के अधिकारक्षेत्र में अदालतों के दखल से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई करेगा।भाजपा गहलोत सरकार को हटाना तो चाहती है मगर संख्याबल नहीं होने से आग में घी नहीं डाल रही है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सचिन पायलट के ढुलमुल रवैये से परेशान है। सचिन के तीस विधायकों का साथ रहने का दवा भी अभी अधरझूल में है। सचिन के पास पर्याप्त विधायक होने पर ही भाजपा उनका साथ देगी।

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