देश के विकास में आयकर का बड़ा योगदान

आयकर दिवस-24 जुलाई पर विशेष

बाल मुकुन्द ओझा

दिवस मनाने की श्रृंखला में बहुत कम लग जानते है की देश में आयकर दिवस भी मनाया जाता है। भारत में प्रति वर्ष 24 जुलाई के दिन को आयकर दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज भारतीय आयकर विभाग का 160 वाँ जन्मदिन है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सरकार को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 24 जुलाई, 1860 को भारत में पहली बार सर जेम्स विल्सन द्वारा आयकर लगाया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए 24 जुलाई को आयकर दिवस मनाया जाता है। यह कर धनवानों, रजवाड़ों और देश में रहने वाले ब्रिटेन के नागरिकों पर लगाया गया था। पहले साल आय कर से सरकारी खजाने को 30 लाख रुपए मिले थे। भारत में 24 जुलाई 1860 को सबसे पहले एक शुल्क के तौर पर आयकर की शुरुआत की गई थी। इसलिए विभाग ने इसी दिन यानि 24 जुलाई को आयकर दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। वर्ष 2010 में पहला आयकर दिवस मनाया गया। आयकर वह कर है जो सरकार लोगों की आय में से लेती है। कानून के अनुसार, व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए तय है कि वे किसी भी करों को देने या कर वापसी के लिए पात्र हैं। हर साल आयकर रिटर्न फाइल करना होता है। आयकर धन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसे सरकार अपनी गतिविधियों निधि और जनता की सेवा करने के लिए उपयोग करता है।
ब्रिटिश शासन की ओर से लगाया गया आयकर कानून शक्तिशाली लोगों को पसंद नहीं आ रहा था, इसलिये 1865 में इस कानून को रद्द कर दिया गया था। इसके 2 साल बाद 1867 में इसे कुछ बदलावों के साथ फिर से लागू किया गया। उस समय कर की दरें उस समय के हालातों को देखते हुए तय की जाती थी। ब्रिटेन और रूस के युद्ध के समय जब अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता उत्पन्न हुई तो तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डुफ्रिन ने नया आयकर कानून 1886 पेश किया। यह आधुनिक भारत का पहला व्यापक आयकर कानून था। इससे 1886-87 में 1.36 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई थी। इसके बाद 1914-15 में 3.32 लाख आयकर दाता हो गये थे और कर वसूली 3.05 करोड़ रुपये तक पहुँच गई थी। प्रथम विश्व युद्ध के बाद धन की कमी को देखते हुए 1916 में पहली बार कर की अलग-अलग दरें तय की गईं और वर्ष 1917 में युद्ध प्रयासों के दौरान ‘सुपर टैक्स’ लगाया गया। इससे वर्ष 1918-19 में आयकर की वसूली 11 करोड़ रुपये तक पहुँच गई थी।
असहयोग आंदोलन के समय पहली बार वर्ष 1922 में आयकर कानून 1922 बनाया गया। इसी समय आयकर विभाग की विकास की कहानी शुरु हुई। वर्ष 1924 में केन्द्रीय राजस्व बोर्ड के हाथों कर प्रशासन दिया गया। 25 अप्रैल 2941 को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण अस्तित्व में आया।
देश के विकास में आयकर की बड़ी भूमिका है और आयकरदाता को इस बात का गर्व करना चाहिए कि ये देश उसके पैसे से चल रहा है। टैक्स का लाभ सभी को मिलता है। देश के विकास में 50 प्रतिशत से ज्यादा योगदान आयकर का होता है और ये पैसा देश के स्वास्थ्य, उर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और शिक्षा आदि के विकास पर खर्च होता है। वही गरीबों के लिए संचालित होने वाली अनेक योजनाओं का लाभ निम्न आय वर्ग के लोगों को सुलभ हो जाता है। यह आयकर देने वालों के लिए यह खुश नसीबी है कि उनके टैक्स से समाज का एक बड़ा तबका सामान्य जीवन व्यतीत करता है।

 

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