मन की बात ने बढ़ाई आकाशवाणी की लोकप्रियता

बाल मुकुन्द ओझा

ये आकाशवाणी है अब आप समाचार सुनिए। अस्सी – नब्बे के दशक तक घरों में रेडियो की सुनाई देने वाली यह आवाज संचार के आधुनिक साधनों के बीच गायब सी हो गई थी। दूरदर्शन के बढ़ते प्रभाव ने इसकी उपयोगिता पर ही बड़ा संकट खड़ा कर दिया, रही सही कसर निजी चैनलों और मोबाइल ने पूरी करदी। मगर हाल के वर्षों में जहां लोगों में रेडियो की चाह बढ़ी है, वहीं इसकी बिक्री भी तेज हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम ने रेडियो की लोकप्रियता बढ़ा दी है। कह सकते है इसे नया जीवन मिला है।
आज ही के दिन 23 जुलाई को हुई थी भारतीय प्रसारण सेवा की स्थापना जिसका बाद में नामकरण हुआ था आकाशवाणी। पुराने जमाने में मनोरंजन का कोई साधन नहीं था ऐसे में आकाशवाणी की स्थापना के बाद लोगों को मनोरंजन ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार की जानकारी भी प्राप्त होने लगी। आज देश में चौबीसों घंटे समाचार और मनोरंजक चैनलों की कमी नहीं है। वह भी एक समय था जब केवल एक ही माध्यम ऐसा था जो समाचार के साथ हमारा मनोरंजन भी करता था। उसका नाम आकाशवाणी था। आकाशवाणी से प्रसारित समाचारों की देशभर में बड़ी प्रतिष्ठा थी। लोग आकाशवाणी के एक एक शब्दों पर आँख बंद कर विश्वास करते थे।
आकाशवाणी की स्थापना 23 जुलाई 1927 के दिन की गई थी। आकाशवाणी अथवा ऑल इंडिया रेडियो भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन संचालित सार्वजनिक क्षेत्र की रेडियो प्रसारण सेवा है। इस सेवा का नाम भारतीय प्रसारण सेवा रखा गया था। देश में रेडियो प्रसारण की शुरुआत मुंबई और कोलकाता में सन 1927 में दो निजी ट्रांसमीटरों से की गई। 1930 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। 1957 में इसका नाम बदल कर आकाशवाणी रखा गया। सरकारी प्रसारण संस्थाओं को स्वायत्तता देने के इरादे से 23 नवंबर 1997 को प्रसार भारती का गठन किया गया, जो देश की एक सार्वजनिक प्रसारण संस्था है और इसमें मुख्य रूप से दूरदर्शन और आकाशवाणी को शामिल किया गया है।
अकाशवाणी में जब भी किसी कार्यक्रम की शुरुआत होती थी तो सबसे पहले कहा जाता है ये आकाशवाणी है अब आप समाचार सुनिए। आकाशवाणी को पहले ऑल इंडिया रेडियों ही कहा जाता था। 1936 में मैसूर के विद्वान और चिंतक एम.वी.गोपालस्वामी ने इस शब्द का अविष्कार किया।
आकाशवाणी को हिंदी भाषा को जन जन तक पहुँचाने का श्रेय दिया जा सकता है। आजादी से पूर्व आकाशवाणी अनेकता में एकता का सशक्त माध्यम थी। एक दूसरे के पास इसी माध्यम से सारी जानकारी पहुँचती थी। आजादी के बाद प्रगति और विकास का एक मात्र सजीव माध्यम बना आकाशवाणी। बड़े बड़े नेता और महत्वपूर्ण व्यक्ति अपनी बात आकाशवाणी के माध्यम से देशवासियों के समक्ष रखते थे। प्रसारण का एक मात्र साधन होने से देश में इसकी महत्ता और स्वीकार्यता थी। मगर धीरे धीरे निजी क्षेत्र में प्रसारण माध्यम शुरू हुए। निजी चैनलों से चौबीसों घंटे समाचार और मनोरंजन की सामग्री प्रसारित होने लगी फलस्वरूप लोगों ने आकाशवाणी से मुंह मोड़ लिया। इससे आकाशवाणी बहुत थोड़े क्षेत्रों में सिमट कर रह गयी। मगर जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने इसकी सुध बुध ली तब से इसका महत्त्व एक बार फिर बढ़ा। विशेषरूप से प्रधानमंत्री का मन से बात कार्यक्रम प्रसारित होना शुरू हुआ तब से एक बार फिर आकाशवाणी लोगों के सिर चढ़ गयी। देश के लोग आकाशवाणी सुनने लगे और इसके कार्यक्रम लोगों की जुबान चढ़ने लगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में अपने पद को सम्भालने के बाद आम जनता तक रेडियों के माध्यम से अपनी पहुँच बनाने और लोगों को इसके माध्यम से अपनी मन की बात बताने के लिए रेडियों जैसे सरल माध्यम का इस्तेमाल किया। हर महीने के आखिरी रविवार को पीएम मोदी की ‘मन की बात’ हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं में प्रसारित होती है। मोदी अपने हर कार्यक्रम में राष्ट्रीय महत्त्व की बात उठाते है। इसके दो फायदे प्रत्यक्ष तौर पर हुए। एक तो मोदी अपनी बात शहरी और ग्रामीण जनता तक आसानी से पहुंचते है दूसरे आकाशवाणी के कार्यक्रम भी आम जनता में लोकप्रिय हुए है। गांवों में तो आज भी रेडियो सूचना और मनोरंजन का माध्यम है। अब रेडियो फिर से आमजन व घरों तक पहुंचने लगा है।

 

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