जाँच एजेंसियों ने किया राजस्थान संकट को हाईजेक

बाल मुकुन्द ओझा

राजस्थान में सियासी संकट कम नहीं बल्कि बढ़ता जा रहा है और पल-पल में नया मोड़ ले रहा है। सारा मामला कानूनी दाँवपेंचो में फंस गया है। ऐसा लगता है राज्य की जाँच एजेंसियों के खिलाफ केंद्र ने अपनी एजेंसियों को उतार दिया है। इस भांति अब केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों ने समूचे मामलों को हाईजेक कर लिया है। राज्य सरकार की एजेंसी एसओजी और एसीबी ने ऑडियो टेप और पैसे के लेन देन में जिस प्रकार की एफआईआर दर्ज कर आनन् फानन में कार्यवाही की वह केंद्र और भाजपा को हजम नहीं हुई है। एसओजी टीम कार्यवाही के लिए तुरंत मानेसर और दिल्ली पहुँच जाती है। विधायक नहीं मिले तो केंद्रीय मंत्री को नोटिस दे कर तलब किया जाता है। भाजपा का आरोप है की ये एजेंसिया राज्य सरकार के इसारे पर बदले की कार्यवाही कर रही है। वहीँ बुधवार को ईडी ने जोधपुर में मुख्यमंत्री के भाई अग्रसेन गहलोत के आवास और व्यावसायिक ठिकानों पर छपामारी की। कांग्रेस ने इसे बदले की कार्यवाही करार दिया। यह छापेमारी फर्टिलाइजर (उर्वरक) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हो रही है। ईडी यह छापेमारी देशभर के कई स्थानों पर कर रही है। ईडी ने कथित उर्वरक घोटाला मामले में सीमा शुल्क विभाग की शिकायत और आरोपपत्र के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया है।
दूसरी तरफ स्पीकर सीपी जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर हाईकोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने की बात कही। जोशी ने डायरेक्शन शब्द पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है एक संवैधानिक संस्था को इस प्रकार निर्देशित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों कॉन्स्टिट्यूशनल ऑथोरिटी में टकराव नहीं हो इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने का फैसला किया है। जोशी ने आरोप लगाया कि बागी विधायक नियमों के साथ खिलवाड़ कर रहे थे और इस वजह से राजस्थान में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता था। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी गई है, जिसे मंजूर कर लिया गया है। पायलट खेमे ने भी केविएट दाखिल की है।
कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी बुधवार को भी जारी रही। प्रदेश के विधायक जयपुर के एक पांच सितारा होटल में आराम फरमा रहे है वहां पायलट गुट के विधायकों के ठिकाने का अता पता नहीं चल रहा है। मगर एक बात बिलकुल साफ हो गयी है की गहलोत के संगीन आरोपों के बाद सुलह सफाई के रस्ते पूरी तरह बंद हो गए है। कांग्रेस पार्टी गहलोत और पायलट के दो अलग-अलग गुटों में बंट चुकी है। खास बात यह है कि गहलोत अपने कैंप के विधायकों को मोटिवेशन देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गहलोत ने होटल में बैठक के दौरान विधायकों से कहा कि सरकार स्थिर हैं और पायलट खेमे के विधायक हमारे सम्पर्क में हैं। गहलोत ने दावा किया कि जो विधायक अभी हमारे साथ नहीं दिखाई दे रहे हैं, वो भी हमें वोट करेंगे। फ्लोर टेस्ट होने की स्थिति में छह विधायक और आने की बात गहलोत खेमे की ओर से कही जा रही है। हालांकि, इनके नामों का खुलासा बैठक में नहीं किया गया। विधायक दल की बैठक में 103 विधायकों के उपस्थित होने का दावा किया गया।
भाजपा अभी भी किंकर्तव्यविमूढ़ हो रही है। न तो केंद्र और न ही राज्य इकाई ने कोई स्पष्ट स्टेण्ड लिया है। ऐसा लगता है पार्टी वेट एंड वाच में फंसी हुई है।

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