बारिश के साथ ही बह गए दिल्ली सरकार के दावे-आदेश गुप्ता

केजरीवाल बताएं कि आने वाले दिनों में मानसून से निपटने के लिए उनका क्या एक्शन प्लान है

नई दिल्ली। मानसून की पहली बारिश में ही पूरी दिल्ली में जलभराव हो गया जिसने केजरीवाल सरकार की बदइंतजामी के पोल खोल दिया। दिल्ली सरकार के मनगढ़ंत दावों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता व दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  रामवीर सिंह बिधूड़ी ने आज प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रमुख  अशोक गोयल देवराहा उपस्थित थे।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में कल की एक बारिश ने पूरे शहर को एक जलमग्न कर दिया। मॉन्सून से पहले जो तैयारी करनी थी वो दिल्ली सरकार ने नहीं की। मिंटो ब्रिज पर हर साल पानी भरता है लेकिन फिर भी दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी ने बारिश के पानी की निकासी के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की। यहां तक की कल भी जलभराव की जगह पर पंप से पानी निकालने की व्यवस्था नदारद थी और न मौके पर पीडब्ल्यूडी का कोई कर्मचारी आया। दिल्ली में लगभग 1400 किलोमीटर लंबाई की सड़क पीडब्ल्यूडी विभाग के अंदर आती है और उसके दोनों ओर 2518 किलोमीटर के नाले हैं। इन नालों से प्रति वर्ष लगभग दो लाख टन गाद निकाली जाती है। लेकिन इस बार मानसून से पहले नालों की डीसिल्टिंग नहीं की गई और न ही बारिश के पानी की निकासी के लिए जल बोर्ड की लाइन की डीसिल्टिंग की गई। दिल्ली सरकार दावा कर रही थी कि बरसात से पहले सभी नालों और सीवर की सफाई की जा चुकी है, लेकिन रविवार को मिन्टो ब्रिज, आईटीओ, कीर्ति नगर, यमुना पार और पुरानी दिल्ली समेत 100 से अधिक इलाकों में जलभराव रहा जिसने मॉनसून को लेकर दिल्ली सरकार की तैयारियों की हकीकत बयां की।

उन्होंने कहा कि केजरीवाल कहते हैं कि इस साल दिल्ली सरकार कोरोना नियंत्रण में लगी हुई थी इसलिए इस बार इतनी मुस्तैदी से नालों की साफ सफाई नहीं हो पाई। लेकिन सभी जानते हैं कि कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कोई तैयारी नहीं की थी सिर्फ झूठा आश्वासन दिया और लोगों को डराने का काम किया। दिल्ली में कोरोना के मामले 14 जून माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी के हस्तक्षेप के बाद नियंत्रित हुआ, दिल्ली के लोगों को समय पर सभी प्रकार के स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी। उससे पहले तक तो दिल्ली के लोगों ने भी यह उम्मीद छोड़ दी थी कि वह सुरक्षित रह पाएंगे क्योंकि केजरीवाल सरकार ने उन्हें इस वैश्विक महामारी के दौर में भी राम भरोसे छोड़ दिया था। कोरोना की तैयारियों का बहाना बनाकर मुख्यमंत्री केजरीवाल अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं।

आम आदमी पार्टी नेताओं की बयानबाजी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि क्या उन्हें नहीं पता कि मिंटो ब्रिज का क्षेत्र पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आता है, अन्ना नगर के घर किसके कारण बहे, दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी, जल बोर्ड के अंतर्गत कौन से क्षेत्र आते हैं। मेरा केजरीवाल सरकार से यही अनुरोध है कि ट्विटर पर हवा हवाई बातें न करें बल्कि जमीनी स्तर पर काम करें। अन्ना नगर में नाले में घर बहने से प्रभावित हुए लोगों को मुआवजा दें, बारिश के कारण जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनके परिवारजनों को भी मुआवजा दें। मानसून की तैयारियों को लेकर काम करने वाली सभी एजेंसियों की बैठक लें, सर्वदलीय बैठक बुलायें ताकि सभी के कार्य निर्धारित हो सके और यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाले दिनों में इस तरह के भयावह हादसे दोबारा न हो और दिल्ली के लोगों को राहत मिले।

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली में यह परम्परा रही है कि बारिश से पहले मुख्यमंत्री सभी दल के नेताओं और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर मानसून की तैयारी की समीक्षा करते थे और सभी की जिम्मेदारी तय करते थे लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल के आने के बाद ऐसा कुछ नहीं होता है। न वो खुद कुछ करते हैं न ही कभी विपक्ष के नेताओं या संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकर समस्याओं के निवारण की योजना बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 4 दिन पहले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के समक्ष पीडब्ल्यूडी के नामों को सड़क की सफाई का मुद्दा उठाया था, लेकिन फिर भी केजरीवाल सरकार ने डीसिल्टिंग का काम शुरू नहीं करवाया। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि उनके पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए भी पैसे नहीं है। केजरीवाल सरकार का यह रवैया बहुत ही दुखद है। अपनी लापरवाही से सबक लेते हुए केजरीवाल सरकार को आने वाले दिनों में मानसून से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिये।

 

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