कोरोना विस्फोट के मुहाने पर आ पहुंचा बिहार

केन्द्र सरकार आई हरकत में, बिहार पहुंच रही है उच्चस्तरीय टीम

राकेश रमण

बिहार में कोरोना की स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ रही है और सिर्फ दस दिनों में ही दो-गुना बढ़ रहे मामलों के साथ समूचा सूबा कोरोना विस्फोट के मुहाने पर आ पहुंचा है। मेडिकल जर्नल हेल्थ लांसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में यह आशंका व्यक्त की गई है कि आगामी दिनों में देश में जिन बीस जिलों में कोरोना की स्थिति भयावह होने की संभावना है उनमें आठ जिले बिहार के ही हैं। साथ ही अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि अगर स्थितियों में तेजी से सुधार की दिशा में कदम आगे नहीं बढ़ाया गया तो मध्य प्रदेश के बाद बिहार ही देश का ऐसा दूसरा सूबा बन कर उभर सकता है जहां कोरोना सबसे अधिक कोहराम देखा जाएगा। इन चुनौतीपूर्ण हालातों को देखते हुए अब केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पूरी तरह हरकत में आ गई है और स्थिति को संभालने व चुनौतियों पर काबू पाने के लिये केन्द्र की ओर से एक उच्चस्तरीय टीम की बिहार में तैनाती का आदेश जारी कर दिया गया है। केन्द्र की ओर से भेजी जा रही टीम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) लव अग्रवाल, एनसीडीसी के निदेशक डॉ एसके सिंह और नई दिल्ली स्थित एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर (मेडिसिन) डॉ नीरज निश्चल शामिल हैं। यह टीम आज ही बिहार पहुंच जाएगी। केन्द्र सरकार की ओर से औपचारिक तौर पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक बिहार में कोविड प्रबंधन के आकलन में राज्य की सहायता करने तथा सभी आवश्यक मदद उपलब्ध कराने के लिए इस केंद्रीय टीम की तैनाती की जा रही है।

दरअसल बिहार में कोरोना के प्रसार में लगातार आ रही तेजी का आलम यह है कि बीते दस दिनों में ही प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की तादाद दो गुनी हो गई है और सूबे में कुल मरीजों की संख्या 25 हजार के आंकड़े को पार कर रही है। उस पर कोढ़ में खाज की बात एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आई है जिसमें बताया गया है कि अगर स्थितियां बदस्तूर बिगड़ती रहीं और युद्धस्तर पर मामले को संभालने की पहल नहीं की गई तो जल्दी ही बिहार देश का दूसरा सबसे अधिक कोरोना प्रभावित सूबा बन जाएगा। ऐसी सूरत में बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए अब केन्द्र सरकार पूरी तरह हरकत में आ गई है और बिहार पर अपना ध्यान केन्द्रित कर लिया है। बिहार में कोरोना के खिलाफ जारी जंग में मौजूदा लचर व्यवस्था का ही नतीजा है कि प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के इस आरोप का कहीं से तथ्यात्मक जवाब सामने नहीं आ रहा है कि अब तक देश में सबसे कम जांच बिहार में ही हुई है। वाकई अगर राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान हुई 3,61,024 नमूनों की जांच के बाद अब तक पूरे देश में हुई कुल जांच की तादाद 1,34,33,742 हो गई है जो कि प्रति दस लाख की आबादी पर 9734 से भी अधिक है जबकि बिहार में इस तेजी के साथ जांच कराने की जहमत भी नहीं उठाए जाने और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए आंकड़ों के साथ हेराफेरी करने का आरोप भी प्रदेश की नितीश सरकार पर लग रहा है। यह कोरोना के खिलाफ जंग में प्रदेश सरकार को हासिल हो रही नाकामी का ही नतीजा है कि राजग का घटक होने के बावजूद लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार में हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए केन्द्र की ओर से उच्चस्तरीय टीम तैनात किये जाने पर कटाक्ष भरी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक तौर पर इसका स्वागत किया है।

 

 

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