पाकिस्तान में फिर से कब बनेंगे राम मंदिर

 

आर.के. सिन्हा

एक पुरानी कहावत है कि चोर चोरी से भले ही चला जाए पर हेराफेरी से कभी बाज नहीं आ सकता । पाकिस्तान के हुक्मरानों के ऊपर यह कहावत शत-प्रतिशत लागू होती है। वह तो सुधरने का नाम ही नहीं लेतें। वैशिवक महामारी कोरोना के कारण जब सारी दुनिया परेशान है, तब पाकिस्तान अपने यहां बढ़ते कोरोना रोगियों के इलाज को लेकर तो कत्तई गंभीर नहीं है। वह तो भारत के मुसलमानों को राम मंदिर के सवाल पर भड़काने की चाल चल रहा है। वह भूल रहा है कि भारत का मुसलमान भी राम मंदिर निर्माण के हक में ही रहा है। शेख अब्दुल्ला तक ने अयोध्या जाकर “कार -सेवा” करने की इच्छा तक व्यक्त की है ।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होते ही पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में लिखा कि ‘जहां एक तरफ़ दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, वहीं संघ-भाजपा गठबंधन भारत में हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगा है।’

राम मंदिर पर पाकिस्तान की आपत्ति के जवाब में भारत ने उसके मुंह पर करारा तमाचा मारा है। भारत ने सही कहा कि राम मंदिर निर्माण का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। भारत में हर धर्म के लोगों को बराबर अधिकार दिये गये हैं। भारतीय मुस्लिमों ने भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाये गये फ़ैसले पर सहमति दी है।

इकबाल ने राम को कहा इमाम ए हिन्द

देखा जाए तो पाकिस्तान को भी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए भारत को बधाई देनी चाहिए थी। पर वह तो पैदाइशी नासमझ और जाहिल मुल्क है। पाकिस्तान के सर्वाधिक आदरणीय नायक और उर्दू के मशहूर शायर इकबाल ने तो राम पर एक पूरी नज्म ही लिखी थी। उसमें वे राम को इमाम-ए-हिन्द लिखते हैं। पर अब मालूम नहीं कि पाकिस्तान के हुक्मरामों को इस तथ्य की जानकारी है कि या नहीं। जाहिर है कि अगर पाकिस्तान सरकार को इकबाल और उनकी राम पर लिखी नज्म के संबंध में थोड़ी बहुत भी जानकारी होती तो वह अपने देश में तोड़ दिए गए राम मंदिरों का फिर से निर्माण तो करवा ही देता । क्या पाकिस्तान में अब एक भी राम मंदिर बचा है? क्या पाकिस्तान बनने से पहले भी वहां कोई राम मंदिर नहीं था? वस्तु स्थिति यह है कि वहा पर बहुत से राम मंदिर और अन्य हिन्दू मंदिर थे। पर सबको पता है कि उन मंदिरों को बर्बरतापूर्वक तोड़ दिया गया था । अब भी कुछेक मंदिर पाकिस्तान के सिँध प्रांत में हैं। उनकी हालत भी खस्ता है।

पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे पंजाब में तो आपको खोजने पर भी एक मंदिर या हिन्दू तक नहीं मिलेगा। आजादी से पहले वहां की आबादी में करीब 60 लाख हिन्दू थे। उनके वहां पर हर गली-मुहल्ले में सैकड़ों मंदिर थे। अब आप पंजाब के छोटे शहरों, गांवों और कस्बों की बात तो छोड़िए, वहां के लाहौर, स्यालकोट और मियांवाली जैसे शहरों में भी कोई मंदिर नहीं है। पाकिस्तान मूल के इतिहासकार डा. आई. अहमद कहते हैं कि पाकिस्तान के पंजाब में देश के बंटवारे के बाद ही सुनियोजित ढंग से सब मंदिर और हिन्दू खत्म कर दिए गए। डा. अहमद स्वीटजरलैंड में पढ़ाते हैं।

दरअसल पाकिस्तान राम मंदिर के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। अगर थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 19 जनवरी 2020 को कहा था कि संघ और मोदी सरकार भारत में मुसलमानों को दबा रहे हैं।

निराश किया इमरान खान ने

दरअसल इमरान खान ने अपने लाखों भारतीय प्रशसंकों को बहुत निराशा किया है। वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए भारत पर प्रत्यक्ष और परोक्ष आरोप लगाते ही रहते हैं। उन्होंने ही कहा था कि भारत में नागरिकता कानून के लागू होने के बाद लाखों मुस्लिमों को भारत छोड़ना पड़ेगा। यानी वे घोर बे-सिर पैर की बातें करते रहे हैं। उन्हें पता ही नहीं कि भारत में नागरिकता कानून का किसी मुसलमान पर कोई असर ही नहीं होगा। भारत में मुस्लिम और बाकी सभी अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसीलिए, इमरान को अपने देश के अल्पसंख्यकों की ही चिंता करनी चाहिए। इमरान को समझ लेना चाहिए कि भारत का मुस्लिम समाज भी देशभक्त है और वह भारत में शतप्रतिशत सुरक्षित है। भारत का कोई मुसलमान भले ही सरकार की कितनी भी आलोचना कर ले, लेकिन, पाकिस्तान तो हरगिज जाने को तैयार नहीं है । वह भारत में कहीं ज्यादा सुखी है ।

इमरान खान की दोहरी मानसिरता पर हंसी ही आती है। वे भारतीय मुसलमानों को लेकर घड़ियाली आंसू बहाते रहते हैं। पर वे चीन में मुसलमानों पर हो भीषण अत्याचारों पर पूरी तरह मौन हैं। चीन के मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में मुसलमानों पर जुल्मों-सितम हो रहे है। उन्हें वह सब भी जबर्दस्ती खाना पड़ रहा है जो मुसलमानों के लिए खाना निषेध है। पर मजाल है कि पाकिस्तान एक बार भी बोले। पाकिस्तान ने चीन में मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों पर कभी कोई विरोध नहीं जताया। यह हाल है अपने को इस्लामिक देशों का नेता कहने वाले का। क्या इमरान खान को पता नहीं है कि शिनजियांग प्रांत के मुसलमानों को कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा से जोड़ा रहा है।

भारत के मुसलमानों के लिए बोलने वाले इमरान खान क्यों बांग्लादेश में नारकीय जीवन जी रहे उर्दू भाषी बिहारी मुसलमानों को वापस पाकिस्तान में नागरिकता देकर वापस क्यों नहीं बुला लेते ? बांग्लादेश में लाखों बिहारी मुसलमान अभी तक शरणार्थी कैम्पों में नारकीय जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं। इन्होंने बांग्लादेश के मुक्ति आंदोलन में पाकिस्तान सेना का साथ दिया था। यही तो इनका एकमात्र दोष है । इस कारण से बिहारी मुसलमानों को बांग्लादेश में नफरत की निगाहों से देखा जाता है। ये 1947 में भारत के विभाजन के वक्त बिहार से पूर्वी पाकिस्तान ( अब बाग्लादेश ) चले गए थे। पर बांग्लादेश के बनने के बाद बंगाली मुसलमानों ने बिहारी मुसलमानों को भयंकर रूप से प्रताड़ित करना चालू कर दिया सिर्फ इसलिये क्योंकि बिहारियों ने पाकिस्तानी फौज का साथ दिया था। ये अब वापस पाकिस्तान जाना चाहते हैं। पर इमरान खान को इनकी कोई चिंता नहीं हैं।

खैर बात राम मंदिर के निर्माण पर पाकिस्तानी आपत्ति को लेकर चालू हुई थी। यह भी बात हुई थी कि इकबाल ने राम को इमाम ए हिन्द कहा था । ये वहीं इकबाल हैं जिन्हें पाकिस्तान अपना नायक मानता है। बेहतर होगा कि पाकिस्तान उसी इकबाल की बात को मानते हुए पाकिस्तान के सभी तोड़ दिए गए मंदिरों, जिनमें राम मंदिर शामिल हैं, की मरम्मत करवाए। यहीं नहीं वहां के सभी अल्पसंख्यकों को भी इंसान माने।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तभकार और पूर्व सांसद हैं)

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