कोटा के 11 गांवों में घर-घर पहुंचेगा पानी, 27 गांवों को मिलेगी फ्लोराइडयुक्त पानी से मुक्ति

लोकसभा अध्यक्ष बिरला के प्रयासों से 41 करोड़ की योजना स्वीकृत

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र के अनेकों गांवों में पेयजल से जुड़ी समस्याएं दूर होने जा रही है। जलजीवन मिशन के तहत कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में पाइपलाइन के जरिए घर-घर पानी पहुंचाने की कार्य योजना पर काम प्रारंभ हो गया है। जल्द ही 11 गांवों में घर-घर तक पानी पहुंचेगा। वहीं कोटा-बूंदी के 27 गांवों को फ्लोराइडयुक्त पानी से मुक्ति मिल जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 41 करोड़ रूपए व्यय होंगे।
केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2024 तक भारत के सभी गांवों में पाइपलाइन के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में भी कई ऐसे गांव हैं जहां आज तक पाइपलाइन के जरिए घर तक पानी नहीं पहुंच पाया है। जल जीवन मिशन प्रारंभ किए जाने के साथ ही लोकसभा अध्यक्ष और कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने संसदीय क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों लिए पेयजल योजनाएं तैयार करवाने की कार्ययोजना पर काम प्रारंभ कर दिया था।
लोकसभा अध्यक्ष के लगातार प्रयासों के बाद अब इस दिशा में सफलता मिलने लगी है और रामगंजमंडी के आसकली गांव में 3.42 करोड़ लागत से पाइपलाइन के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचाने की योजना पर शुरू हो गया है। इसके अलावा दीगोद में 2.47 करोड़, बूढ़ादीत-ददियाखेड़ी-पाली में 4.63 करोड़, दरा में 6.21 करोड़, कनवास में 4.58 करोड़, झाड़आमली-पीसाहेड़ा 3.05 करोड़, तलाव गांव में 4.74 करोड़ तथा भीमपुरा गांव में 4.40 करोड़ की पेयजल योजना को स्वीकृति मिल गई है। इन जगहों पर भी जल्द काम प्रारंभ हो जाएगा। योजना के तहत काम पूरा होने के बाद इन गांवों में पाइपलाइन के जरिए घरों तक पानी पहुंचने लगेगा।
इसके अलावा बूंदी जिले के 7 गांवों के लिए भी 25.25 करोड़ लागत से जल जीवन मिशन के तहत पेयजल योजना के प्रस्ताव तैयार हो गए हैं। इनमें तीरथ गांव में 3.22 करोड़, बड़ौदियां में 3.07 करोड़, सथूर में 5.87 करोड़, बड़ा नयागांव में 5.28 करोड़, दुगारी में 3.08 करोड़, रड़ी-चड़ी में 2.59 करोड़ तथा करवर में 2.34 करोड़ की योजना शामिल है। इन योजना के लिए भी स्वीकृति दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी फ्लोराइड मुक्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा-बूंदी के 27 गांवों में सौर ऊर्जा आधारित डी-फ्लोराइड यूनिट लगाई जाएंगी। इस योजना पर 8.85 करोड़ रूपए व्यय किए जाएंगे।
कोटा-बूंदी के कई गांव फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। अनेकों लोग इस कारण फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से भी पीड़ित हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस समस्या का समाधान निकालने के लिए लम्बे समय से प्रयास कर रहे हैं।
इन्ही प्रयासों के तहत बूंदी के 25 तथा कोटा के 2 दो गांवों में सौर ऊर्जा आधारित डी-फ्लोराइड यूनिट की स्थापना की जा रही है। यह युनिट सौर ऊर्जा के माध्यम से पानी को शुद्ध कर ग्रामीणों को उपलब्ध करवाएगी।
बूंदी जिले में पावतीकला पंचायत के कतुनारा गांव, लालपुरा पंचायत के किशनपुरा गांव, नयागांव पंचायत के गणेशपुरा गांव, रिहाना पंचायत के छावनी, गुगपुरा तथा रिहाना गांव, उलेरा पंचायत के सींता गांव, देलुंदा पंचायत के देलुंदा गांव, गामछ पंचायत के गामछ गांव, सींता पंचायत के सींता गांव, बालोद पंचायत के खेड़ली व्यासन व पीपल्दा जागीर, गेंडोली खुराड पंचायत के गूंथा गांव, करवाली की झौंपड़ियां पंचायत की करवाली की झौंपड़ियां गांव व मेनोली गांव, फोलाई पंचायत के गोपालपुरा व मोरखुदाना गांव, बाछोला पंचायत के सुरगाली व उगेन गांव, मोडासा पंचायत के मोहब्बतपुरा गांव, ख्यावदा पंचायत के भाटों का खेड़ा, अजंदा पंचायत के अजंदा गांव, बलकासा पंचायत के लक्ष्मीपुरा, रामपुरिया व देवपुरा गांव में डीएफयू लगाई जाएगी।
इसी तरह कोटा जिले में लक्ष्मीपुरा पंचायत के धीधोरा गांव तथा भौंरा पंचायत के करीड़ का खेड़ा गांव योजना में शामिल किए गए हैं।

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