अफ्रीका के गांधी भारत रत्न नेल्सन मंडेला

बाल मुकुन्द ओझा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा अफ्रीका के गाँधी नेल्सन मंडेला का जन्मदिन 18 जुलाई दुनियाभर में नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है। अन्याय, अत्याचार और रंग भेद के विरुद्ध संघर्ष के जुझारू योद्धा नेल्सन मंडेला को दुनिया दूसरे गाँधी के नाम से भी जानती है। इसीलिए मंडेला को 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इसके बाद 2001 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार भी प्रदान किया गया। उनका भारत से रिश्ता काफी पुराना और मजबूत था। मंडेला, भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी हैं। साल 1993 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। मंडेला गांधी की शिक्षाओं और उनके जीवन दर्शन के अनुयायी थे। वह भारत आते रहते थे। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन के चलते 27 साल जेल में बिताने के बाद जब मंडेला रिहा हुए तो सबसे पहले 1990 में भारत का दौरा किया।
मंडेला गाँधीजी की तरह अहिंसा में विश्वास करते थे। उनका पूरा नाम नेल्सन रोलीह्लला मंडेला है जो दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। 23 साल की उम्र में शादी से भागकर वे जोहानिसबर्ग आ गए थे। विद्यार्थी जीवन में उन्हें रोज याद दिलाया जाता कि उनका रंग काला है और सिर्फ इसी वजह से वह यह काम नहीं कर सकते। उन्हें रोज इस बात का एहसास करवाया जाता कि अगर वे सीना तान कर सड़क पर चलेंगे तो इस अपराध के लिए उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। ऐसे अन्याय ने उनके अन्दर असंन्तोष भर दिया।
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद को खत्म करने में नेल्सन मंडेला ने अग्रणी भूमिका निभाई थी और दुनिया भर में अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बने। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहाँ उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। मंडेला ने अपने देश को एक राष्ट्र के रूप में विश्व के मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नेल्सन मंडेला का जन्म दक्षिण अफ्रीका के बासा नदी के किनारे ट्रांस्की के मवेंजो गाँव में 18 जुलाई, 1918 को में हुआ था। लम्बी बिमारी के बाद उनका 5 दिसंबर, 2013 को निधन हो गया था। नेल्सन मंडेला, अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के विचारों से बेहद प्रभावित थे। उनकी माता का नाम नोमजामो विनी मेडीकिजाला था। वह एक मैथडिस्ट थीं। पिता का नाम गेडला हेनरी था। वे गाँव के प्रधान थे। उनके बचपन का नाम रोहिल्हाला था, जिसका अर्थ होता है पेड़ की डालियां तोड़ने वाला या उपद्रवी बच्चा। बारह वर्ष की अल्प आयु में उनके सर से पिता का साया उठ गया था।
दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से बाहर फेंके जाने की घटना महात्मा गांधी के लिए अहम प्रेरणा बनी, वैसी ही रंगभेद से जुड़ी दो घटनाओं ने मंडेला की लड़ाई को दिशा दी थी। नेल्सन मंडेला के विचार आज भी दुनिया को अपनी और आकर्षित करते है। उनके विचार थे जब तक काम किया ना जाए वो असंभव ही लगता है। बड़े गर्व की बात कभी न गिरने में नहीं है बल्कि हर बार गिर कर उठने में है। शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है, जिसका इस्तेमाल दुनिया को बदलने के लिए किया जा सकता है। एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा से विजयी जोड़ी रहे हैं। आप किसी व्यक्ति से जिस भाषा को वह समझता हो उसमें बात करें तो बात उसकी समझ में आती है. लेकिन आप अगर उससे उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह उसके दिल में जाती है। एक ऊंची पहाड़ी चढ़ने के बाद आपको हमेशा दूसरी पहाड़ियां फतह करने के लिए दिखनी चाहिए। कोई भी इंसान जन्म से ही रंग, हालात और उसके धर्म के प्रति नफरत लेकर पैदा नही होता। जिंदगी को जीने के लिए जज्बे और जुनून की जरूरत होती है फिर ये कोई मायने नही रखता कि आप कोई छोटा काम कर रहे हो या बड़ा। मैंने ये जाना है कि डर का ना होना साहस नही है, बल्कि डर पर विजय पाना साहस है। बहादुर वह नहीं है जो भयभीत नहीं होता, बल्कि वह है जो इस भय को परास्त करता है।
निश्चय ही नेल्सन मंडेला का जीवन सभी के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने भेदभाव और विपत्ति का निडरतापूर्वक और साहसपूर्ण मुकाबला कर दुनिया के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया।


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