राखी में बहनें लगाएंगी चीन को चार हजार करोड़ की चपत

राकेश रमण

‘‘रेशम की डोर नहीं तो बस मौली बांध देना भाई की कलाई पर, याद रखना कि एक और भाई भी खड़ा है सीमा की चढाई पर।’’ यह संदेश दे रही हैं बहनें इस बार राखी के त्यौहार पर। अब तक भारत के त्यौहारों की रौनक चीन में बने सामनों से बढ़ती थी और मुनाफा सरहद पार बैठे चीनी बटोरते थे। लेकिन इस बार सरकार और बाजार ने एकजुट होकर ऐसी नाकाबंदी करने की कोशिश की है जिसमें भारतीय त्यौहार में भारत में बना हुआ सामान ही इस्तेमाल हो ताकि लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलें और मुनाफा भी देश के लोगों का ही हो। इस साल के त्यौहारी सीजन के दौरान हर मांग की आपूर्ति स्वदेशी स्तर से करने की कोशिशों का ही नतीजा है कि बाजार में राखी की मांग को पूरा करने के लिये भारतीय महिलाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और इसमें उन्हें बाजार की ताकतों का भी पूरा साथ मिल रहा है। नतीजन इस बार ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को गति देते हुए इस बात का पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है कि चीन में बनी राखी की जरूरत ही ना पड़े। ‘लोकल के लिए वोकल’ होने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वाह को आत्मसात करते हुए देश के खुदरा व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की देख-रेख में भारतीय बाजारों में घरेलू राखी की पर्याप्त आपूति सुनिश्चित की जा रही है जिसके नतीजे में राखी के मौके पर हर साल चार हजार करोड़ की कमाई करनेवाले चीन को इस बार भारी चपत लग रही है। इस अभियान की सबसे अच्छी बात यह है कि इस बार राखी निर्माण में महिलाओं को रोजगार के भरपूर अवसर भी उपलब्ध हुए हैं और उन्हें अपना हुनर, कलात्मकता और दक्षता दिखाने का भी मौका मिला है जिससे बाजार में सुंदर, सुलभ और सस्ती स्वदेशी राखियों की भरपूर आपूर्ति हो रही है।

दरअसल भारत के साथ बेवजह उलझना और सरजमीन-ए-हिन्दुस्तान की ओर बुरी निगाह डालने का दुस्साहस करना चीन को कितना महंगा पड़नेवाला है इसकी एक झलक राखी के त्यौहार में दिखने जा रही है जिसमें चीन को चार हजार करोड़ की करारी चपत लगाने के लिये भारतीय महिलाओं ने पूरी मजबूती के साथ कमर कस ली है। कैट की मानें तो इस वर्ष देश भर में राखी का त्यौहार ‘हिन्दुस्तानी राखी’ के रूप में मनाया जाएगा और राखी बनाने अथवा बेचने में चीन का बना कोई भी सामान उपयोग में नहीं लाया जाएगा। कैट के मुताबिक राखी वो पहला त्योहार होगा जिससे चीन को पता लगेगा की किस मजबूती से देश चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर उसे बड़ा सबक देने की ठान चुका है। कैट के कहना है की राखी के इस यह त्यौहार पर भारत की बहनें चीन को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का घाटा पहुंचाएगीं। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की इस अनूठे अभियान में दिल्ली सहित देश भर में व्यापारियों तथा महिला उद्यमियों द्वारा आंगनवाड़ी तथा घरों में काम करने वाली एवं कच्ची बस्तियों में रहने वाली महिलाओं से हाथ की बनी राखियां बनवाई जा रही हैं। साथ ही 10 राखी के एक पैकेट के साथ रोली एवं चावल भी दिया जा रहा है और मिठाई के तौर पर एक पैकेट में मिश्री भी रखी जा रही है और एक बहुत सुन्दर राखी थाल भी बनाया गया है। इस प्रकार के पैकेट देश भर में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के माध्यम से व्यापारियों एवं उनके कर्मचारियों को दिए जा रहे हैं। खंडेलवाल ने बताया कि कैट ने अपनी इस पहल को अंजाम देते हुए दिल्ली के अलावा नागपुर, भोपाल, ग्वालियर, सूरत, कानपुर, तिनसुकिया, गौहाटी, रायपुर, भुवनेश्वर, कोल्हापुर, जम्मू, बंगलौर, चेन्नई, हैदराबाद, पांडिचेरी, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, वाराणसी, झाँसी, इलाहाबाद सरीखे विभिन्न शहरों में राखियां बनवा कर व्यापारियों को वितरित करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।

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