गहलोत के गले पर लटकी रहेगी तलवार

बाल मुकुन्द ओझा

राजस्थान में पिछले एक सप्ताह से चल रहा सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस की बाड़ेबंदी बुधवार को भी जारी रही। सत्ता बचाने की सियासी जंग के शुरुआती दौर में भले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों का अपेक्षित समर्थन जुटाकर अपनी सरकार पर मंडराते खतरे को फौरी तौर पर फिलहाल टाल दिया है मगर सियासतदारों के अनुसार तलवार अभी भी लटकी हुई है।
किसी के मन में क्या है, यह थाह लगाना असम्भव नहीं तो मुश्किल जरूर है। सचिन पायलट के मामले में स्थितियां कुछ ऐसी ही बन रही है। पायलट ने कांग्रेस से बगावत का बड़ा कदम तो उठा लिया मगर अब उनकी हालत जल बिन मछली जैसी हो रही है। वे कह रहे है भाजपा में नहीं जा रहा हूँ। पायलट ने कांग्रेस की ओर से हुई कार्रवाई के बाद ट्वीटर पर अपना बायो भी बदल दिया है। पायलट ने अब अपना बायो बदलकर लिखा है, टोंक से विधायक द्य भारत सरकार के आईटी, दूरसंचार और कॉर्पोरेट मामलों के पूर्व मंत्री द्य कमीशंड अधिकारी, टेरिटोरियल आर्मी। उधर कांग्रेस ने दल बदल कानून के तहत विधानसभा में एक याचिका लगायी जिस पर स्पीकर ने पायलट सहित उनके समर्थक 19 विधायकों को नोटिस देकर 17 जुलाई तक जवाब तालाब किया है। इसका मतलब है अब सारी स्थितियां कानूनी दावपेंच में उलझ गयी है। कुछ संविधान विशेषज्ञों का कहना है विधान सभा के बाहर व्हिप के उल्लंघन से दल बदल का कोई मामला नहीं बनता। भाजपा कांग्रेस सरकार तो गिराना चाहती है। उसके मन में सत्ता के लड्डू भी फुट रहे है मगर सचिन के पास आकड़े कम होने से वह कोई स्पष्ट निर्णय लेने की हालत में नहीं है। सचिन पायलट कोई बोल्ड स्टेप नहीं ले पाए इससे उनकी इमेज को धक्का लगा है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने आज सचिन और उनके साथ के विधायकों पर पैसे के लेन देन का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया हमारे यहाँ उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष खुद ही पैसे की डील कर रहे है। उन्होंने कहा केंद्र सरकार मीडिया को फाइनेंस कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है जिसे समझने की जरूरत है। कांग्रेस के नेता इस सम्पूर्ण खेल के पीछे भाजपा का हाथ बता रही है। मगर सचिन ने साफ तौर पर भाजपा में जाने से इंकार कर दिया है। सचिन स्याने और समझदार नेता है किन्तु उनकी हालत जल बिन मछली सी हो रही है। भाजपा कह रही है गहलोत ने समय समय पर मदेरणा, नवल किशोर जैसे वरिष्ठ नेताओं को किनारे लगते देर नहीं की। अब बारी सचिन की है जिसने गहलोत के नेतृत्व को चुनौती दी है।
सचिन ने बगावत के बाद अब तक पत्ते नहीं खोले है। वे प्रेस के सामने भी अभी तक नहीं आये है। यह भी कहा जा रहा है पद से हटाए जाने के बाद भी उनका राहुल और प्रियंका से संपर्क बना हुआ है। वे अभी भी कांग्रेस के विधायक है। कांग्रेस कह रही है सचिन के लिए अभी उनके दरवाजे बंद नहीं हुए है। सचिन की खामोशी भी सियासत को रहष्यमय बना रही है। सायलेंट मोड़ पर होने से सचिन की सियासत क्या गुल खिलाने जा रही है, यह बताने वाला कोई नहीं है। सचिन के पत्ते नहीं खोलने से मामला उलझता ही जा रहा है। अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ वह दिल्ली -हरियाणा में हैं। बर्खास्त किए जाने के बाद उनके पास विकल्प सीमित हैं। जानकारों का मानना है कि अब भी उनके पास विकल्प खुले हैं, उन्हें पद से हटाया गया है पार्टी से नहीं। कांग्रेस को युवाओं की जरूरत है और अगर सचिन कांग्रेस में रहते हैं तो उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। उनके समर्थक रहे और अब गहलोत के साथ विधायक दानिश अबरार का मानना है सचिन अभी भी कांग्रेस में है।
राजस्थान का सियासी संग्राम चरम पर पहुँच गया है। प्रदेश कांग्रेस का संगठन चरमराकर धराशाही हो गया है। संगठन के सभी अध्यक्षों को बर्खास्त कर दिया गया है। अब आमने सामने की लड़ाई खुलकर दंगल में बदल गयी है। सचिन पायलट ने ट्वीट कर कहा है सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं। कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ षड़यंत्र के लिए भाजपा को पूरी तरह जिम्मेदार बताया है। अब गेंद भाजपा के पाले में है। यह गेंद अब कहाँ जाकर गिरती है यह देखने वाली बात है। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग भी की जारही है। गहलोत खेमे के बहुमत के दावे के बावजूद सरकार पर मंडराया खतरा कम नहीं हुआ है। ऐसे में अब बीजेपी जल्द खुलकर ऐक्शन मोड में आ सकती है।
राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में 200 सदस्य है। इनमें कांग्रेस के पास 107 और भाजपा के पास 72 सदस्य है। 13 निर्दलीय और शेष छोटी पार्टियों के है। कांग्रेस निर्दलीयों के समर्थन का दावा कर रही है। सचिन खेमे के 19 विधायक भाजपा के पास आ जाते है तो गहलोत सरकार खतरे में पड़ जायेगी। शह और मात का खेल खेला जा रहा है।

 

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