चाय की प्याली में तूफान ! राजस्थान

राजस्थान की सियासी हलचल

बाल मुकुन्द ओझा

राजस्थान की सियासी उठापठक राज्य सभा चुनाव की तरह अंततोगत्वा चाय की प्याली में तूफान साबित होगी। राजस्थान मध्य प्रदेश नहीं है जहाँ थोड़े बहुत बहुमत के सहारे सरकार खड़ी हो। इस राज्य में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार के पास 125 से अधिक विधायकों का जोरदार समर्थन प्राप्त है। यहाँ गहलोत के कथित विरोधी उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलेट नाराज अवश्य चल रहे है मगर सरकार गिराने का खतरा मोल लेने की ताकत उनके पास नहीं है।
राज्य सभा चुनाव के दौरान खरीद फरोख्त की बातें मीडिया की सुर्खी बनी थी। मगर कांग्रेस का एक भी वोट इधर से उधर नहीं हुआ और यह बाड़ा बंदी आखिर हव्वा हवाई साबित हुई। राजस्थान की राजनीति पर निगाह रखने वालों का कहना है पायलेट ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं है और न ही उनके पास इतना बड़ा जनाधार है की अपने बूते पर 20 – 30 विधायक जीता कर निकाल सके। गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान से पायलेट को उनके पदों से हटाने की मांग की है जो अब तक पूरी नहीं हुई है। गहलोत चाहते है वे निर्विघ्न होकर मंत्री परिषद् का विस्तार और राजनैतिक नियुक्तियां करें। उनके इस कार्य में पायलेट सबसे बड़ी बाधा है। पायलेट अपने लोगों को एडजस्ट करना चाहते है जो गहलोत को मंजूर नहीं है। गहलोत द्वारा गद्दारों से निपटने की बात भी सियासी हलकों में बेचौनी उत्पन्न करने वाली है।
अब सवाल यह पैदा होता है की अशोक गहलोत किस बिना पर अपनी सरकार के खरीद फरोख्त की बात कर रहे है। उन्हें एकमात्र खतरा किसी से है तो उनकी ही पार्टी के सचिन पायलेट से है। वह पायलेट से सीधे तौर पर निपटने के बजाय भाजपा को अपना हथियार बना रहे है। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा है राजस्थान को बकरा मंडी समझ कर भाजपा खरीद फरोख्त में लगी है। उन्होंने इस प्रकरण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी लपेटा। दूसरी तरफ भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे मनघडंत करार दिया। भाजपा विधायक दल के नेता गुलाब चँद कटारिया ने कहा की आरोप सिद्ध होने पर वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत के आरोपों को नकारते हुए सम्पूर्ण प्रकरण को गहलोत की गन्दी राजनीति का षड़यंत्र करार दिया। राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक बार फिर राज्य की सीमाओं को सील कर दिया गया है। सीमाओं को सील करने का आदेश ऐसे समय आया है, जब राज्य में कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिशों का मामला सामने आया है।
इस दौरान घोड़ों के साथ बकरा और हाथी जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया। राज्य में कांग्रेस की सरकार को गिराने की साजिश के आरोप में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बीजेपी के दो नेताओं को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार बीजेपी नेताओं पर कांग्रेस के विधायकों को प्रलोभन देने का आरोप है। साथ ही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने तीन विधायकों के खिलाफ विधायक की खरीद-फरोख्त की शिकायत दर्ज की है। इसमें निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, सुरेश टांक के अलावा कांग्रेस के विधायक सुखबीर सिंह जोजावर का भी नाम शामिल है। गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों और मंत्रियों को अपने आवास पर तलब किया है। बताया जाता है बीस के लगभग नाराज विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए है। यह गुट आलाकमान से मिलने के प्रयास में जुटा है। कुल मिलाकर प्रदेश की सियासत इस समय रहष्य, रोमांच और सस्पेंस में उलझ कर रह गयी है।

 

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