वंदे भारत ट्रेन प्रोजेक्ट में चीन के बहिष्कार की मांग तेज

‘लोकल के लिए वोकल’ होकर स्वदेशी कंपनियों को मौका देने की उठी मांग

संजीव कुमार

देश में चीन के खिलाफ बदस्तूर जारी गुस्से, आक्रोश और बहिष्कार की भावना का नतीजा है कि महत्वाकांक्षी सेमी हाईस्पीड ट्रेन-18 यानी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों को किसी भी हालत में भागीदारी करने का मौका नहीं देने की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। इसी क्रम में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अपने राष्ट्रीय अभियान ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ के तहत देश भर के खुदरा व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को औपचारिक तौर पर एक पत्र भेजकर मांग की है कि भारतीय रेलवे के सेमी हाई स्पीड स्वदेशी ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस परियोजना के लिए जारी की गई वैश्विक निविदा में भाग लेकर बोली लगाने वाली चीन के स्वामित्व वाली कम्पनी सीआरआरसी कॉर्पोरेशन को हर्गिज इस परियोजना में भागीदारी करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिये। कैट ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देने के लिये रेल मंत्री से ‘लोकल के लिए वोकल’ होने का अनुरोध करते हुए मांग की है कि चूंकि भारतीय रेलवे की यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया आह्वान का ही का एक हिस्सा है, इसलिए इस तथ्य और मौजूदा राष्ट्रीय व वैश्विक परिस्थितियों, चुनौतियों, जरूरतों व जन भावनाओं के मद्देनजर किसी भी चीनी कम्पनी या उसकी भारतीय सहायक कंपनी को इस परियोजना में भाग नहीं लेने देना चाहिए। बल्कि बेहतर होगा कि इस रेल परियोजना में भागीदारी के लिए स्वदेशी कंपनियों को ही मौका देने पर रेल मंत्रालय की ओर से अधिक से अधिक जोर दिया जाए।

दरअसल ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत चलाई जानेवाली सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 यानी वंदे भारत एक्सप्रेस के विभिन्न उपकरण, कोच इत्यादि की तकरीबन 15 हजार करोड़ रूपए से अधिक मूल्य की 44 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए विद्युतकर्षण किट या प्रणोदन प्रणाली की खरीद के लिए भारतीय रेल की चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) ने पिछले साल 22 दिसंबर को वैश्विक निविदा जारी की थी। इसके लिए कुल छह कंपनियों ने बोली लगाई है जिसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई की पॉवरनेटिक्स इक्विमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और हैदराबाद की मेधा ग्रुप के अलावा हरियाणा स्थित गुरुग्राम की सीआरआरसी पॉयनीयर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है जो चीन सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन लिमिटेड का संयुक्त उद्यम है। चीन से संबद्ध इस कंपनी द्वारा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के लिए किट की आपूति करने के लिये बोली लगाए जाने की खबर सामने आने के बाद से ही इसका भारी विरोध देखा जा रहा है। इसी क्रम में अगले साल तक चीन से कुल आयात में एक लाख करोड़ रूपये तक की कमी करने का लक्ष्य सामने रखकर चीनी सामानों का बहिष्कार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बेहद आक्रामक तरीके से ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ का अभियान चला रही देश के खुदरा व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था कैट ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर चीन से सम्बद्ध कंपनी को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के प्रोजेक्ट से जुड़ने का मौका हर्गिज नहीं दिये जाने की मांग की है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रेल मंत्री गोयल को भेजे पत्र में कहा है कि चीन की कम्पनी सीआरआरसी कॉर्पोरेशन गुड़गांव स्थित एक फर्म के साथ एक संयुक्त उद्यम के साथ वंदे भारत रेलों की प्रणोदन प्रणाली या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की खरीद के लिए जारी टेंडर के तहत प्रोजेक्ट में भागीदारी करने के लिए जो दावेदारी की है उसे तत्काल खारिज कर दिया जाना चाहिये। कैट ने अपने पत्र में आशा व्यक्त की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘लोकल के लिए वोकल’ होकर ‘आतमनिर्भर भारत’ का निर्माण करने का जो आह्वान किया गया है उसे ध्यान में रखते हुए इस महत्वाकांक्षी और प्रतिष्ठित वंदे भारत सेमी हाई स्पीड एक्सप्रेस ट्रेन परियोजना में चीनी कम्पनी को भाग लेने से रोकने के लिए रेल मंत्री की ओर से तुरंत ही आवश्यक कदम अवश्य उठाया जाएगा।

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