हत्यारे विकास दुबे की पकड़म पकड़ाई गिरफ्तारी या सरेंडर

बाल मुकुन्द ओझा

दुर्दांत हत्यारे विकास दुबे की गिरफ्तारी के साथ देश की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्ष के नेताओं ने भाजपा सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए सीबीआई जाँच की मांग की है। हालाँकि यह सर्व विदित है की विकास के सम्बन्ध विभिन्न सियासी दलों के नेताओं से रहे है। राजनीति में अपराधीकरण का यह कोई नया मामला नहीं है। मगर इतनी आसानी से गिरफ्तारी पर सवाल उठना लाजिमी है। सवाल यह पैदा होता है की वह विभिन्न प्रदेशों की सीमाओं को लांगते हुए कानपुर से उज्जैन कैसे पहुंचा। बताते है पहले उसने महाकाल के दर्शन किये और फिर सरेंडर किया। सूत्र बताते है विकास दुबे ने सरेंडर करने की सूचना स्थानीय मीडिया और पुलिस को दी थी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। यह भी बताते है उसने मंदिर प्रवेश की पर्ची अपने नाम से ही कटवाई। विपक्षी नेता कह रहे है सरकार बताये उसे गिरफ्तार किया है या उसने सरेंडर किया है। विकास की मां सरला देवी कह रही है वह महाकाल का भक्त था। उसने एनकाउंटर से बचने के लिए समर्पण किया। उसे पुलिस वालों ने ही अपराधी बनाया। इस भांति यह पकड़म पकड़ायी काफी संदेह तो पैदा करती ही है।
कानपुर गोलीकांड के आरोपी कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक ओर पुलिस इसे गिरफ्तारी बता रही है वहीं विपक्षी दल इसे फिक्स सरेंडर कह रहे हैं। एक दिन पहले ही यह खबरें आई थीं कि वह फरीदाबाद के एक होटल में कमरा लेकर रुका था। इसके सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए थे। लेकिन इसके बाद गुरुवार सुबह वह उज्जैन पहुंचा और सरेंडर के इरादे से ही वह महाकाल मंदिर में गया। सूत्रों ने बताया कि विकास दुबे यूपी पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए उज्जैन आया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 9 बजे के बीच नीली धारियों वाली टीशर्ट पहने और मास्क लगाए विकास बिना रोकटेक शंख द्वार वाले वीआईपी दर्शन के टिकट काउंटर पर गया। वहां उसने वीआईपी दर्शन के लिए 250 रुपए की पर्ची कटवाई। उसे पता था कि उसकी तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं और मंदिर में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के अलावा उज्जैन पुलिस भी तैनात है। इसके बावजूद पर्ची पर उसने अपना नाम विकास दुबे ही लिखवाया और मोबाइल नंबर भी दिया। बाद में वह प्रसाद की दुकान पर पहुंचा और कहा कि वह अपना बैग रखना चाहता है। बैग रखने के बाद वह महाकाल मंदिर के नई टनल वाले एक नंबर गेट से पर्ची दिखाकर दाखिल हुआ। अंदर जाने के दौरान एक सिक्योरिटी गार्ड को शक हुआ। उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखे। तब तक विकास महाकाल के दर्शन कर चुका था। पुलिस उसकी लोकेशन देखकर मंदिर के अंदर दाखिल हुई और उसे हिरासत में ले लिया।
जब पुलिस उसे बाहर लेकर आ रही थी तो उसने चिल्लाकर बोला- मैं ही विकास दुबे हूं। कानपुर वाला। इसके बाद पुलिस उसे गाड़ी में बैठाकर थाने ले गई। उज्जैन पुलिस ने विकास दुबे से करीब 2 घंटे तक पूछताछ की। पुलिस पूरी तरह से यह कन्फर्म कर लेना चाहती थी कि इतनी आसानी से गिरफ्त में आया आदमी विकास दुबे ही है। जब पुलिस को यकीन हो गया तो सुबह 10 बजे के करीब खबरें आईं कि विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी के बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान आया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट किया।
गौरतलब है दो और तीन जुलाई को उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के बिठूर इलाके के विकास दुबे नामक हिस्ट्रीशीटर और शातिर अपराधी को पुलिस मर्डर के एक आरोप में गिरफ्तार करने पहुंचती है। गांव में घुसते ही पुलिस बलों को बीच सड़क पर एक जेसीबी रास्ते रोके खड़ी दिखती है। पुलिस जब तक इस माजरे को समझ पाती, तब तक ऊपर छतों से विकास दुबे के गुर्गे अंधाधुंध फायरिंग करने लगते हैं। इस घटना में सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा, एसओ महेश यादव, चौकी इंचार्ज अनूप कुमार, सब इंस्पेक्टर नेबुलाल और कॉन्स्टेबल सुल्तान सिंह, राहुल, जितेंद्र और बल्लू शहीद हो जाते हैं। अपराधी इन पुलिसकर्मियों से एके-47 राइफल, इंसास राइफल और पिस्टल समेत गोलियां भी छीनकर ले जाते हैं। विकास पर विभिन्न धाराओं में लगभग पांच दर्जन मुकदमें में दर्ज है।

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