दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आज पंडित दीन दयाल उपाध्याय पुस्तकालय का उद्घाटन किया

दीनदयाल जी एक विचारक होने के साथ वे अपनी समृद्ध संस्कृति के आधार पर देश का विकास करना चाहते थे-मनोज तिवारी

नई दिल्ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आज उत्तर पूर्व जिले में यमुना विहार स्थित जिला कार्यालय में एक कार्यक्रम में पंडित दीन दयाल उपाध्याय पुस्तकालय का उद्घाटन किया। दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी, वरिष्ठ नेता कुलवंत वाठ, ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष  गौरव खारी, जिला अध्यक्ष एवं विधायक अजय महावर, पूर्व जिला अध्यक्ष सीताराम गुप्ता, महामंत्री चैधरी भंवर सिंह, जोन चेयरमैन के के अग्रवाल, राजा इकवाल सिंह, निगम पार्षद  राजकुमार बल्लन, कल्पना झा, प्रदेश मीडिया सह प्रमुख आनंद त्रिवेदी सहित कई जिला एवं प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित थे।
उपस्थित दायित्वान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आदेश गुप्ता ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने कहा था कि स्वतंत्रता का तभी कोई अर्थ है, जब हम हमारी संस्कृति को व्यक्त करने के लिए साधन बनें। नैतिकता के सिद्धांत किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं बनाये जाते, बल्कि उन्हें खोजा जाता है। भारत में नैतिकता के सिद्धांत को धर्म के रूप में जाना जाता है यह जीवन का नियम है। दीनदयाल जी मानवतावाद को अधिक बढ़ावा देते थे, उन्होंने मानवतावाद को एक अलग तरीके से परिभाषित किया। उनका कहना था कि ‘मानव एक शरीर मात्र नहीं है, बल्कि वह एक मन, बुद्धि और आत्मा भी है, इसके बिना मानव शरीर का कोई अर्थ नहीं है’। साथ ही उनका कहना था कि स्वतंत्र भारत को व्यक्तिगत, समाजवाद, पूंजीवाद आदि जैसी पश्चिमी अवधारणाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह भारत की सोच के विकास और उसके विस्तार में अड़चन डालने के लिए हैं इससे देश का विकास नहीं हो सकता है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में मनोज तिवारी ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय छोटी उम्र से ही संघर्षो भरा जीवन जी रहे थे जो समाज के लिए एक मिसाल है। दीनदयाल जी एक विचारक भी थे, वे अपनी समृद्ध संस्कृति के आधार पर देश को बढ़ावा एवं उसका विकास करना चाहते थे और अंग्रेजों द्वारा छोड़ी गई पश्चिमी अवधारणाओं को खत्म करना चाहते थे। आजादी के तुरंत बाद भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई थी, लेकिन दीनदयाल जी गुलामी के इन वर्षों के बाद भारत के बारे में थोड़ा चिंतित थे। उन्होंने लोगों की सोच बदली कि लोकतंत्र लोगों, मजदूरों की समस्याओं को दूर करने के लिए हैं। वे अपनी समस्या लेकर सरकार के पास उसके निवारण के लिए जा सकते हैं, उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति को अपने दृष्टिकोण को सामने रखने का पूरा अधिकार है। प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए और शासन में शामिल किया जाना चाहिए इस विचारधारा के चलते उन्होंने देश में लोकतंत्र की एक अलग परिभाषा को जन्म दिया।
विधायक  अजय महावर ने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध साहित्य का अध्ययन कर कार्यकर्ता न सिर्फ पार्टी के विचार से रूबरू होंगे बल्कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय से प्रेरित राजनैतिक आचरण को अपने जीवन में उतार कर पार्टी को उंचाइयों तक ले जाने का काम करेंगे और पार्टी के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए अपना अमूल्य योगदान देंगे।
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