शेरे राजस्थान मुरलीधर व्यास

शेरे राजस्थान मुरलीधर व्यास
बाल मुकुन्द ओझा

समाजवादी भारत की कल्पना करने वाले शेरे राजस्थान मुरलीधर व्यास ने पिछड़ी, दलित, गरीब और वंचित जनता के लिए सुनहरा सपना देखा था। वे एक जोशीले वक्ता और आंदोलनकारी थे। 1957 और 62 में दो बार बीकानेर से दो बार विधायक रहे व्यासजी ने अपना जीवन गरीबों और मजदूरों को समर्पित कर दिया। राजस्थान में सुखाड़िया सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले एकमात्र नेता थे। विधानसभा में उनके द्वारा दिए गए भाषण आज भी याद किए जाते हैं। लोहिया, जयप्रकाश और आचार्य नरेंद्र देव का उन पर बहुत प्रभाव था। अपनी सादगी, ईमानदार छवि के लिए विख्यात व्यासजी क्रांतिकारी और आंदोलनधर्मी राजनीति को दिशा देने वाले बिरले नेताओं में से एक थे।
आजादी के बाद देश और प्रदेश में भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और महंगाई के विरुद्ध आंदोलन का अलख व्यासजी ने ही सर्वप्रथम जगाया था। बीकानेर और प्रदेश में अनेक जनांदोलनों का नेतृत्व करते हुए व्यासजी दर्जनों बार जेल गए। महिलाओं को घर से बाहर आकर आंदोलन में शामिल करने का श्रेय व्यासजी को जाता है। लोकप्रियता के कारण उन्हें शेरे राजस्थान कहा जाता था।
मुरलीधर व्यास पूर्व विधायक बीकानेर 30 मई 1971 को इस दुनिया से विदा हो गए। मुरलीधर व्यास आदर्श लोकसेवक थे उन्होंने सदैव मूल्यों की राजनीति की। वे छत्तीस कौम को साथ लेकर चलते थे। मुरलीधर व्यास विशाल हृदय के स्वामी थे। वे विरोध करने वालों के प्रति भी समभाव रखते थे तथा बिना किसी भेदभाव सहयोगी स्वभाव से प्रत्येक व्यक्ति के काम करने के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने जीवन पर्यन्त लोगों की सेवा की। वे भ्रष्टाचार, अन्याय तथा अनीति के विरूद्ध संघर्ष करते रहे। जनांदोलनों में कई बार लाठियों के शिकार हुए। व्यासजी का जन्म 4 जुलाई 1918 में महाराष्ट्र के एक गांव में हुआ था। 53 वर्ष की आयु में ही 30 मई 1971 को उनका निधन हो गया।
प्रजा समाजवादी पार्टी के बड़े नेता के रूप में व्यासजी की ख्याति पूरे भारत में थी। वे प्रदेश में घूम घूम कर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लोगों की आवाज उठाते थे। इस लेखक ने अपनी तरुणाई के दौरान व्यासजी के विचारों को नजदीकी से सुना था। अपनी मृत्यु से पूर्व चूरू की एक जनसभा में व्यासजी ने रहस्योद्घाटन किया था की सुखाड़िया और शेखावत आपस में मिले हुए है। इसी कारण शेखावत सुखाड़िया के भ्रष्टाचार को प्रभावी ढंग से विधानसभा और उसके बाहर नहीं उठाते। उन्होंने कहा वे शीघ्र सुखाड़िया को जेल के सींकचों में पहुंचाएंगे। दूसरे दिन प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्र राष्ट्रदूत में एक कार्टून प्रथम पृष्ठ पर छापा जिसमें एक पिंजरे में सुखाड़िया को दिखाया गया था। छल कपट की सियासत से दूर रहने वाले व्यासजी आखिर छल कपट के ही शिकार हो गए। 1967 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने एक रणनीति के तहत व्यासजी को हराने के लिए उनके स्वजातीय पुष्करणा नेता गोकुल प्रसाद पुरोहित को जैसलमेर से बीकानेर लाकर व्यास जी के खिलाफ कांग्रेस की टिकिट पर खड़ा किया। सुखाड़िया की साम, दाम और दंड भेद नीति के सामने व्यासजी परास्त हो गए। उस दिन पूरा बीकानेर रोया था। जनसंघ ने भी व्यासजी के सामने अपना उम्मीदवार खड़ा कर उनको पराजित करने में अपनी भूमिका निभाई।
वे स्वाभाव से निडर और दबंग नेता थे और अपनी बात बिना हिचक कहते थे। वे सभी प्रकार के प्रलोभनों से दूर थे और हर समय लोगों की पीड़ाओं को दूर करने में तत्पर रहते थे। समाजवादी नेता प्रो केदार व्यासजी के बारे में कहते थे वे जनसेवा के लिए पैदा हुए है। समाजवादी पार्टी के बड़े नेता एन जी गोर, मधु दंडवते आदि भी व्यासजी के जुझारूपन से काफी प्रभावित थे।

 

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