काव्य संग्रह ‘मुझसे कहते तो’ का भव्य रहा लोकार्पण 

नई दिल्ली।अपने दिल की बातें दिल में ना रखें, दिल की बातें दिल में रखने से हम कभी-कभी समस्या में भी आ सकते है। हमें लगता है कि हम घुट-घुटकर जी रहे हैं। बहुत ज़रूरी है एक दूसरे से कहना और ये ही संदेश मेरी किताब देती है ‘मुझसे कहते तो’। जो भी आपका अपना ख़ास मित्र है, करीबी है या फिर जिसको आप समझते हैं कि वो इस लायक है, आप उससे अपने दिल की बात ज़रूर कहें। जब भी कुछ अच्छा होता है तो मैं भावुक हो जाती हूं। आज इतना अच्छा मौका रहा सभी बडे बड़े लोग यहां पहुंचे और सभी का आशिर्वाद मुझे मिला। मैने कभी नहीं सोचा था कि, मेरी किताब इतने ज़ोर-शोर से लॉन्च होगी। इस बात से मैं काफी खुश हूं। यह विचार प्रसिद्ध आर.जे. रेखा ने अपनी किताब मुझसे कहते तो के लोकार्पण कार्यक्रम में व्यक्त किये। इस समय आर.जे.रेखा काफी भावुक हुई।
आकाशवाणी एफ.एम.गोल्ड की प्रसिद्ध आर.जे. रेखा के प्रथम काव्य संग्रह “मुझसे कहते तो” का लोकार्पण शनिवार 11 मार्च की शाम को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में संपन्न हुआ। आर.जे. रेखा के प्रथम काव्य संग्रह “मुझसे कहते तो” में विभिन्न विषयों पर आधारित ऐसी विविध 70 महत्वपूर्ण और दिलचस्प कविताओं का समावेश है। इस काव्य संकलन के लोकार्पण समारोह में फिल्म,मीडिया, रेडियो और साहित्य जगत के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उपस्थिती दर्शायी। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रुप में जाने माने फिल्म अभिनेता और रंगकर्मी राकेश बेदी, मारवाह स्टुडियो नोएडा के चेअरमैन संदीप मारवाह, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, प्रसिद्ध सायंटिस्ट डॉ. प्रभाकरराव चावरे, प्रसिद्ध कवि पत्रकार पंडित सुरेश नीरव, शिक्षाविद् कवि एवं उद्भव संस्था के चेअरमैन डॉ.विवेक गौतम तथा लेखक, निर्देशक और अभिनेता ज़ेड.एम.शाह मंच पर उपस्थित थे।
इस समारोह के संयोजन और संचालन में जिन संस्थाओं और व्यक्तियों का सहयोग और समर्पण रहा उनमें वरिष्ठ पत्रकार महानगर मेल के ग्रुप एडिटर रणवीर गहलोत, वॉयस ओवर आर्टिस्ट मनीष त्रिपाठी, आर.जे. और एन.पी.एन न्यूज़ के पत्रकार रविन्द्र सिंह, वरिष्ठ पत्रकार राजू बोहरा, समाजसेवी अजय बसोया, ओपन सर्च ग्रुप के एडीटर विजय कुमार, वीडियो एडिटर मुकेश टम्टा, पत्रकार नवीन खाती, सुनीता तिवारी, शीतल चौहान, विवेक राठोर, धर्मेन्द्र कुमार प्रमुखता से उपस्थित थे। इसके साथ ही परिवार से आर.जे. रेखा की माता निर्मला देवी, पिता मामचंद और पूर्व शिक्षकों सहित अनेक श्रोता गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उपस्थित सभी मान्यवरों ने आर.जे. रेखा के प्रथम प्रयास “मुझसे कहते तो” काव्य संग्रह की भूरी भूरी प्रशंसा की है। और उनका दिल खोलकर साहित्य जगत में स्वागत किया है।