पाकिस्तान में कंगाली आटे के लिए मचा कोहराम

बाल मुकुन्द ओझा

बात बात पर भारत को परमाणु बम की धमकी देने वाला पाकितान इस समय भूख से जूझ रहा है। महंगाई अपने चरम पर है। आटेके लिए कोहराम मचा हुआ है। आटा 150 रूपये किलो पार हो गया है। लोग मारामारी पर उतर आये है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उबाल से देश में ‘सामाजिक विरोध और अस्थिरता’ की स्थिति पैदा हो सकती है।वहां श्रीलंका जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।आटे के लिए लूटमार मच गई है। हालात इतने खराब हो चले हैं कि सरकारी खजाना पूरी तरह साफ हो चुका है और हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग एक वक्त की रोटी के लिए एक दूसरे को मार रहे है। इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। खासकर गेहूं के आटे के लिए तो देश के कुछ हिस्सों, खैबर पंहुतुनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में तो भगदड़ मची है। कई इलाकों से गेहूं की कमी से आटा के दाम में हुई भारी बढ़ोत्तरी के बीच भगदड़ की सूचना है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान अब तक के सबसे खराब आटे के संकट का सामना कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हज़ारों लोग रोज़ाना सब्सिडी वाले आटे के बैग के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। पाकिस्तान के कई इलाकों में गेहूं की किल्लत होने से आटे की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं. लोगों को रोटी नसीब नहीं हो रही है। सब्सिडी वाले आटे के लिए मची भगदड़ में लोगों की जानें जा रही हैं। न्यूज़ चैनलों पर मारामारी के दृश्य ह्रदय विदारक है।

पाकिस्तान में अनाज- बिजली के बाद रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा है। आम लोग डर के मारे गैस सिलेंडरों का स्टॉक जमा कर रहे हैं। इससे नया सिलेंडर चाहने वालों या रिफिल कराने वालों की शामत आ गई है क्योंकि गैस सिलेंडर 10 हजार रुपये में बिक रहा है। पेट्रोल-डीजल हो, खाने-पीने के सामान हों या फिर रसोई गैस और बिजली हर चीज स्थानीय लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक दिसंबर में 24.5 फीसदी हो गया। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) के डाटा को देखें तो एक साल पहले की समान अवधि में ये आंकड़ा 12.28 फीसदी दर्ज किया गया था। पाकिस्तान में अनाज- बिजली के बाद रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा है। आम लोग डर के मारे गैस सिलेंडरों का स्टॉक जमा कर रहे हैं. इससे नया सिलेंडर चाहने वालों या रिफिल कराने वालों की शामत आ गई है क्योंकि गैस सिलेंडर 10 हजार रुपये में बिक रहा है। महंगाई का आलम ये है कि पार्लेजी बिस्किट जो भारत में पांच रुपये का मिलता है वो पाकिस्तान में 50 रुपये का बिक रहा है। हमारे देश में जो ब्रेड 20 -3 रुपये की मिलती है वो पाकिस्तान में 150-200 की बिक रही है। रिफायंड ऑयल 850 प्रति लीटर हो गया है. कीमतों में 50 फीसदी तक का उछाल हुआ है यहां की आवाम सड़कों पर उतर गई है

पेट्रोल-डीजल हो, खाने-पीने के सामान हों या फिर रसोई गैस और बिजली हर चीज स्थानीय लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। महंगाई के साथ ही पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज भी लगातार बढ़ रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) दिसंबर में 24.5 फीसदी हो गया. पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) के डाटा को देखें तो एक साल पहले की समान अवधि में ये आंकड़ा 12.28 फीसदी दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि जनवरी 2022 में एसबीपी का विदेशी मुद्रा भंडार 16.6 अरब डॉलर था जिसमें 11 अरब डॉलर की गिरावट आई और यह 5.6 अरब डॉलर रह गया। ऐसे में पाकिस्तान सरकार के पास विदेशी कर्ज को चुकता करने के लिए मित्र देशों से और कर्ज लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। क़र्ज़ देने में अब चीन भी इंकार कर रहा है। 2022 में जून महीने से लेकर अक्टूबर महीने तक देश में विनाशकारी बाढ़ के प्रकोप ने पाकिस्तान में आर्थिक स्थिति बिगाड़ने में सबसे अहम भूमिका निभाई है। करीब चार महीने तक इससे हाल बेहाल रहा और अनुमानित करीब 33 मिलियन लोगों को इस बाढ़ ने प्रभावित किया। इसके कारण देश को करीब 30 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा। पाकिस्तान के हुकुमरान इस दौरान विदेशी मुल्कों से झोली फैलाकर भीख के रूप में आर्थिक सहायता की मांग कर रहे है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)