रुकम में नबराज की हत्या की घटना हमारे राष्ट्र के लिए शर्मनाक

नबराज की हत्या में शामिल लोगों को दंडित किया जाना चाहिए ताकि यह हमारे राष्ट्र के लिए एक महत्वपूर्ण और मजबूत मिसाल बन जाए

बीस वर्षीय नबराज बीके और सुषमा मल्ल आपस में प्यार करते थे । और कुछ संदेश तथा कुछ स्क्रीनशॉट जो उनके प्यार की निशानी हैं, साबित करते हैं कि वह एक-दूसरे के प्यार में पागल थे। नबराज और सुषमा मल्ल दोनों ही अपना शेष जीवन एक साथ बिताना चाहते थे।हालांकि जाति की सीमाएं थीं मगर वह उनको लांघ कर, एक-दूसरे को स्वीकार करके खुशी से रहना चाहते थे । नबराज, उसके परिवार या सुषमा ने कभी नहीं सोचा था कि इस का ऐसा दुखदायी परिणाम निकलेगा । नबराज और उसके दोस्तों की शनिवार रात बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रुक्म के चौरजाहरी -8, सोती में एक तथाकथित “निचली जाति” के किसान परिवार में जन्मे, नबराज वास्तव में एक अच्छे वॉलीबॉल खिलाड़ी थे। सुषमा को इस युवा हैंडसम एथलीट ने आकर्षित किया और उसे प्यार हो गया। लड़की जो कि उच्च जाति वाले परिवार की सदस्य थी। इस प्रेमी जोड़े के विरुद्ध हुए स्थानीय लोगों ने नबराज और उसके साथियों की हत्या करने का फैसला किया और इस त्रासदी को रोकने के लिए किसी ने भी कदम नहीं उठाया। सुषमा,और नबराज के माता-पिता और समुदाय अभी आगे क्या कदम उठाएंगे यह तो अभी आगे ही पता चलेगा लेकिन इतना सच है कि इस कांड ने सबको झकझोर दिया है। और इस की गूँज संसद तक में सुनायी दी है। यकीनन एक युवा लड़के को एक “उच्च जाति” की लड़की से प्यार करने के उसके “अपराध” के लिए जान से मार देना आज के आधुनिक युग में जाति-आधारित भेदभाव से छुटकारा पाने के लिए जारी संघर्ष पर एक काली छाया डालता है। जबकि हमारे कानून इस तरह के भेदभाव को रोकते हैं, लेकिन लगता है कि चीज़ें आगे नहीं बढ़ी हैं। और लगता है कि हम कुछ कदम आगे ले जाते हैं और फिर वापस पुराने युगों में पहुंच जाते हैं। आखिर इस अन्धकार का अंत कब होगा ? कब हमारे अधिकारी इस तरह के अपराधों को गंभीरता से लेना सीखेंगे ?

एक वार्ड अध्यक्ष का हत्या में शामिल होना एक और परेशान करने वाला भाग है। जिन्हें लोगों ने समाज का नेतृत्व करने के लिए चुना। समुदाय में सभी का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना।कौन सोच सकता है कि वह एक युवा लड़के की हत्या का नेतृत्व करने वाला होगा?
हालांकि हमें आशा है कि नबराज की हत्या के मामले की जांच के लिए गठित पांच-सदस्यीय समिति अपना काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेगी। और हम यह भी आशा करते हैं कि अतीत में कई बार की तरह, निष्कर्ष हमारे मंत्रालयों के कोनों में नहीं रह जाएंगे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामलों की पूरी जांच करेंगे ताकि अपराधियों को मुक्ति न मिल सके।

रुकुम में यह जातिवादी हत्या की त्रासदी एक राष्ट्रीय प्रतिध्वनि बननी चाहिए। क्योंकि काठमांडू के महंगे होटलों में अनगिनत सेमिनार और सम्मेलन, जाति आधारित भेदभाव को समाप्त नहीं करते हैं। जाति-आधारित भेदभाव ने हमें सदियों से त्रस्त किया है, और यह इस देश के 13 प्रतिशत से अधिक दलितों के लिए हानिकारक है। यदि संयुक्त राज्य अमेरिका में एक काले रंग के व्यक्ति को मारने वाले एक सफेद पुलिसकर्मी का वीडियो हमें गुस्सा दिलाता है, तो रुकुम में हुई त्रासदी भी हमें अंदर से हिला देना चाहिए। नबराज की मृत्यु को नहीं भूलना चाहिए। उनका युवा जीवन उस क्रूरता से छोटा था जो हमारे समाज में हमेशा के लिए रही है। हमें जाति-आधारित भेदभाव के भंवर को नष्ट करने के लिए अपनी भूमिका को ठीक करने का कर्तव्य करना चाहिए। नबराज की हत्या में शामिल लोगों को दंडित किया जाना चाहिए ताकि यह देश के समाज, न्याय और कानून के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सके।

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