एकता,सद्भाव और भाईचारा बढ़ाने का पर्यटन सबल माध्यम

अभिव्यक्ति

डॉ.प्रभात कुमार सिंघल,कोटा
शांति और आध्यात्म की चाह, धर्म से प्रेरित धार्मिक भावनाओं के वशीभूत, मौज – मस्ती से आंनद की अनुभूति, नये – नये स्थानों को देखने की लालसा, यात्रा का आंनद, खूबसूरत प्राकृतिक और रमणिक नजारों का रसास्वादन करने, जैसे विविध कारणों से लोग पर्यटन पर जाते हैं। पर्यटन की अवधारणा से मानव की धूमने और ज्ञान की पिपासा तो शांत होती ही है साथ ही अपने देश की संस्कृति और सभ्यता को जानने और समझने का अवसर भी प्राप्त होता है। इन सब से बढ़ कर देश और समाज की एकता, अखंडता , सदभाव और भाईचारे की भावना को भी बलवती करने का बेहतर माध्यम बनता है। पर्यटन देश ही नहीं अपितु  अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान करता है।
पर्यटन हमारी संस्कृति और संस्कारों को विकसित करने का सशक्त माध्यम बनता है वहीं  संस्कृति का संवाहक, संचारक और संप्रेषक भी है। यह ऐसा सशक्त माध्यम है, जिससे हम परस्पर संस्कृति और संस्कारों से परिचित होते हैं और आपसी सद्भाव और सहयोग की भावना का विकास करते हैं।
विभिन्न स्थानों की यात्रा करने से पर्यटकों को बहुत अधिक मानसिक संतुष्टि मिलती है। बहुत सी नई जगहों और चीजों को देखकर और अजनबियों के संपर्क में आने से मनुष्य के मन को खुशी मिलती है। पर्यटन से विभिन्न स्थानों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित होने से पर्यटकों के ज्ञान और दृष्टिकोण  समृद्ध होता है। विभिन्न स्थानों और देशों की यात्रा करने से उस सब स्थान के सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक रीति-रिवाजों आदि का ज्ञान प्राप्त होता है। इन सबका लाभ पर्यटकों को मिलता है और पर्यटन देशों ,राज्यों और व्यक्तियों के बीच प्रेम, सद्भावना, भाईचारे और दोस्ती को बढ़ाकर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में सहयोग करता है।
आज न सिर्फ नौजवान बल्कि बच्चे, बूढे सभी जुनून के साथ दुनिया का चप्पा-चप्पा देखने को उतावले हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत की अपनी खास विशेषताएँ हैं। पर्यटन से  व्यक्ति ‘मैं’ से “हम” की ओर उन्मुख होता है, झुकता से मुक्त होता है. प्रांत, भाषा, जाति, मत, पंथ एवं सम्प्रदाय की संकीर्णताओं से दूर होता है। पर्यटक तो वह है जो देश, जाति, धर्म से परे अपना धन मनोरंजन के नाम पर खर्च कर  इस संतोष के साथ लौटता है कि उसने तनाव से मुक्त हो कर कुछ न कुछ ज्ञान प्राप्ति के साथ मनोरंजन के सुनहरे पल बिताए। यात्रा में सभी धर्मो,जाती और मतों के लोग होते हैं पर पर्यटक के रूप में हम केवल पर्यटक होते हैं। समय पड़ने पर जाति और धर्म के बंधनों से मुक्त हो कर तुरंत सहयोग के लिए तैयार हो जाते हैं। साथ – साथ यात्रा करते हैं, एक साथ ठहरते हैं, भोजन करते हैं, एक दूसरे के स्मृति चित्र लेने में सहयोगी बनते हैं, तबीयत खराब होने पर सहायता को तत्पर हो जाते हैं और एक दूसरे से स्वतंत्र चर्चा करते हैं। जाते अकेले हैं पर सभी मिलकर समूह बना लेते हैं। यही सब बातें सहयोग, सहकार,सद्भावना,भाईचारे को बढ़ा कर देश की शांति और एकता को बढ़ाने में मजबूत सेतु का काम करती हैं।
पर्यटन की अवधारणा प्राचीन समय से ही देशाटन और तीर्थाटन जैसे शब्दों के रूप में प्रचलित रही है। पर्यटन और संस्कृति के बीच मजबूत संबंध भारत की युगों पुरानी विरासत है। हमारे देश में पर्यटन का उद्देश्य हमेशा से  कला-सौंदर्य के विकास के साथ ज्ञानार्जन और आध्यात्मिक समृद्धि रहा है। यह ऐतिहासिक तथ्य है कि अरब और यूनान देशों में दर्शन और गणित का ज्ञान वहां के पर्यटक ही भारतवर्ष से लेकर गए थे। चीनी पर्यटक ह्वेनसांग और फाह्यान ने भारतीय ज्ञान और संस्कृति की कई बातें यहां से सीख कर अपने देशवासियों तक पहुंचाई थी। भारत से विदेश जाने वाले कुमारजीव, कौडिन्य, महेंद्र,संघमित्रा और बौद्ध धर्मानुयायियों ने अपने आचरण, तप और ज्ञान से वहां के देशवासियों में ज्ञान का प्रसार किया। देश की पर्यटन-व्यवस्था ने कितने विदेशियों को भारत, भारतीयता और भारत की संस्कृति के बारे में सिखाने-बताने की कोशिश की। कह सकते हैं कि पर्यटन मात्र एक शब्द ही नहीं है, अपितु अपने भीतर सम्पूर्णता को संजोये हुये है, चाहे वह संस्कृति- सभ्यता हो, इतिहास, भूगोल, राष्ट्रीय एकता, कला आदि।
भारत की समूची संस्कृति और विचार शैली सदाशयता, सद्भावना और सदाचार पर टिकी है। पर्यटन की दृष्टि से भारत एक विशाल देश है, इसका अहसास  हमें यहाँ विद्यमान ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आधुनिक विकसित पर्यटन स्थलों से होता है । पर्यटन यहाँ एक वृहत्तर उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है।
भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जिसे ईश्वर ने अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य से श्रृंगारित किया है। हमारी ऐतिहासिक धरोहरें और प्राकृतिक संपदा सुदूर देश के पर्यटकों को यहां खींच लाती हैं। देश का अध्यात्म ज्ञान ऐसी विशिष्टता है जो सम्पूर्ण दुनिया से अलग करती है। आध्यत्म और शांति की खोज में आज भी बड़े पैमाने पर विदेशी पर्यटक भारत आते हैं। स्वदेशी और विदेशी पर्यटक प्रेमियों को जो भी चाहिए वह सब भारत में है। होटल, एयरलाइंस, सड़क परिवहन, हस्तकला, टूर आपरेटर के साथ दुकानदारी और मनोरंजन उद्योग को यह क्षेत्र सीधे-सीधे प्रभावित करता है।
 भारत में पर्यटन स्थलों के रखरखाव और पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए देश की राष्ट्रीय और प्रांतीय सरकारें पर्यटन के विकास के लिए प्रतिबद्ध हो कर कार्य कर रही हैं। दुर्गम पर्यटन स्थलों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। देश के पूर्वांचल पर्यटन के द्वार खोलने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। हर जगह की पर्यटन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी इंटरनेट पर सहज उपलब्ध है। टीवी, समाचार पत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, व्यापार मेलों, पर्यटन संगोष्ठियों, मानचित्रों और पर्यटन साहित्य आदि द्वारा पर्यटन क्षेत्र को खूब प्रचारित किया जा रहा है। किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है की भारत में पर्यटन उद्योग मजबूत हुआ है और विदेशी मुद्रा प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
इस प्रकार पर्यटन मानव जीवन के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देश के भीतर राष्ट्रीय एकता और भाईचारा स्थापित करने में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर कर सामने आता है। इस भावना को और अधिक मजबूत बनाने के लिए हम एक अच्छे पर्यटक बने और इस व्यवसाय से जुड़े लोग अतिथि देवो भव की भावना से सामने आकर अपना सहयोग करें और देश की एकता को सुदृढ़ करने में सार्थक भागीदारी निभाएं।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)