बेहतर हुई भारत की वैश्विक छवि

( वैश्विक परिदृश्य)

संजीव ठाकुर

भारत में वर्तमान में अपनी वैश्विक छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व क्षमता के दम पर पहले से बहुत अधिक बेहतर बनाया हैl विदेशों में भारत की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। इस समय बहुत बड़ा योगदान भारत के हर क्षेत्र के डिजिटलाइजेशन का भी बहुत ज्यादा रहा हैl भारत की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति भारतीय हित के लिए बेहतर परिणाम लाने वाली होगी। ईश्वर ना चाहे कि विश्व युद्ध हो पर यदि वैश्विक युद्ध छेड़ा गया तो भारत एकमात्र राष्ट्रों का जिस की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष थक गई होगी और संभव है कि भारत विश्व का गुटनिरपेक्ष नेता होगा l
भारत में डिजिटलाइजेशन के नए आयामों को छुआ है और विश्व में इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका भी निभा रहा हैl इसमें दो मत नहीं कि इसमें वर्तमान एवं पूर्व के प्रधानमंत्रियों को भी बड़ा योगदान रहा हैl प्रथम जवाहरलाल नेहरू की पंचशील के सिद्धांत की नीति और उनके भविष्य की कल्पना ने भारत को विकास की नई दिशा में अग्रसर किया है। पिछले 8 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेश नीति में खुलापन तथा विदेशी निवेशकों को भारत में आमंत्रित किया है उससे इसमें बड़े परिवर्तन की संभावनाओं इजाफा किया हैl भारत विश्व का एकमात्र सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश हैl कई वर्षों से ब्रिटिश उपनिवेश में रहने और स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात गरीबी, भुखमरी ,बेरोजगारी जैसे बड़े रुकावटी कारकों का से जिस तरह डटकर मुकाबला कर उस से निजात पाने का प्रयास किया है वह अत्यंत उल्लेखनीय है।स्वतंत्रता मिलने के पश्चात भारत में नियोजन की नीति अपनाई तथा वर्ष 1951 में प्रारंभ पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत सभी चुनौतियों का सामना करते हुए सराहनीय प्रगति की हैl वर्ष 1951 से लेकर अब तक 12 पंचवर्षीय योजनाएं क्रियान्वित की जा चुकी हैl वर्ष 2015 में राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान की स्थापना की गई जो भारत को वैश्विक स्तर पर महाशक्ति बनाने की दिशा में सहयोग कर रहा हैl वैश्विक स्तर पर भारत की खेती 1990 के पश्चात निरंतर बढ़ रही है इस दिशा में 1990 के दशक में भारत सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली उदारीकरण निजीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति का महत्वपूर्ण योगदान भी माना जा रहा हैl उक्त समय में भारत की दशा अत्यंत दयनीय थी इसके अतिरिक्त मुद्रास्फीति बेरोजगारी जैसी स्थित ने विकराल रूप धारण कर लिया था, किंतु विकास की नीति को अपनाने के पश्चात से भारत ने इन परिस्थितियों से निपटने के साथ ही आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया भारत ने अपने प्राकृतिक संसाधनों एवं विशाल जनसंख्या के उपयोग कर विश्व पटल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई हैl भारत की विशाल जनसंख्या को आर्थिक सफलता के मजबूत स्तंभ कहा जा सकता है। भारत ने अपने प्राकृतिक संसाधनों एवं विशाल जनसंख्या का उपयोग कर उत्पादन को कई गुना बढ़ाया हैl आज की स्थिति में भारत को एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में देखा जा सकता है और इसे तथाकथित भावी विश्व शक्ति चीन का सबसे ताकतवर प्रतिनिधि तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भावी सदस्य के रूप में भी देखा जा रहा हैl भारत में समय के अनुसार अपनी नीतियों तथा विकास के प्रति मानको में परिवर्तन कर निरंतर आर्थिक विकास की दर को प्राप्त करते हुए अधिकांश विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की हैl वास्तव में वर्तमान समय में भारत के ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जिससे विश्व के सभी देश किसी न किसी रूप से जुड़कर प्रभावित भी हुए हैंl 1974 उल्लेखनीय रहा है क्योंकि भारत ने पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया गया इसका विरोध विश्व के तमाम विकसित देशों ने बहुत जोरदार ढंग से किया भारत को काफी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा थाl वर्ष 2008 में हमारे देश और अमेरिका रूस फ्रांस ब्रिटेन तथा चीन को छोड़कर पी5 के सभी सदस्य देशों के मध्य हुए असैन्य परमाणु समझौता से यह स्पष्ट हो गया था कि अब वैश्विक पटल पर भारत की अनदेखी नहीं की जा सकती हैl 2009 में भारत के प्रधानमंत्री का अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यालय में राजकीय अतिथि के रूप में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री का स्वागत करके कहा कि भारत अब एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बन चुका है। यह भारत के छठे परमाणु संपन्न राष्ट्र के तौर पर मिली औपचारिक मान्यता ही थीl भारत यात्रा पर आए बराक ओबामा ने कहा कि भारत अब उभरती हुई परमाणु शक्ति ही नहीं है, वह स्थापित परमाणु शक्ति बन चुका हैl भारत की जनसंख्या को देखते हुए भारत की क्रय शक्ति की क्षमता के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी दूरसंचार के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा हैl भारत अब विश्व में एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित होने की ओर अग्रसर हैl भारत में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अत्यधिक ख्याति प्राप्त की है, जिससे अमेरिकी विश्लेषकों के मन में भय पैदा हो गया हैl भारतीय औद्योगिक घराने अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी कंपनियों को खरीद कर दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी समूह बन गए हैंl भारत लक्ष्मी मित्तल विश्व के सबसे बड़े स्टील उत्पादक है, मुकेश अंबानी का नाम विश्व के सर्वोच्च पांच धनी व्यक्तियों में लगातार प्रत्येक और शामिल होता रहा है। टाटा स्टील ने अपने आकार से लगभग 6 गुनी बड़ी कंपनी कोरस को भी खरीद लिया तो दूसरी तरफ टाटा मोटर्स ने विश्व प्रसिद्ध ब्रांड जगुआर लैंडरोवर को खरीद कर इसे b.m.w. की प्रतियोगिता में लाकर खड़ा कर दियाl भारतीय मूल के विदेशी उद्योगपतियों ने भारत के बाहर रहकर भी भारत की प्रसिद्धि में वृद्धि की है। इन उद्योगपतियों में इंदिरा नूई, अरुण सरीन, सबीर भाटिया, विनोद घोसला का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता हैl भारत मूल के ही सलमान रुश्दी लेखक, अमर्त्य सेन अर्थशास्त्री, झुंपा लहरी लेखिका, वेंकटरमन रामकृष्णन नोबेल पुरस्कार विजेता आदि भारतीय मूल के विदेशी नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैंl वर्ष 2014 में केंद्र में बनी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने अपनी पूर्ववर्ती सरकारों की तरह भारत को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में कार्य किया हैl जिसके अंतर्गत भारत के प्रधानमंत्री ने विश्व के प्रमुख देशों जैसे अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा ,जर्मनी, जापान, चीन, फ्रांस और अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को द्विपक्षीय वार्ता तथा विभिन्न समझौता के माध्यम से मजबूती प्रदान की हैl अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात की दृष्टि से दूसरे देशों देशों में निवेश करने के मामले में विश्व कीर्तिमान स्थापित किया हैl भारत के आर्थिक विकास से इसके राजनीतिक प्रभाव में वृद्धि हुई है, इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय मंच एवं वार्ताओं में भारत को नियमों में छूट देने की सुविधा प्राप्त हो गईl 2018 में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा विश्व आर्थिक मंच में चार दिवसीय बैठक का उद्घाटन किया जाना भारत की बढ़ती विश्व ख्याति को प्रतिबिंबित करता है l भारत इस दशक के अंत तक निसंदेह विकसित देशों के समूह में शामिल हो जाएगा और भारत की वैश्विक ख्याति में चारों तरफ वृद्धि होने की पूरी संभावना हैl

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)