संघ के स्थापना दिवस पर विशिष्ट अतिथि होंगी पद्मश्री संतोष यादव

नई दिल्ली(राकेश रमण)। राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के स्थापना दिवस के कार्यक्रम में विजय दशमी के दिन माउंट एवेरेस्ट पर पहली महिला द्वारा विजय हासिल करने वाली पद्मश्री सम्मान से सम्मानित संतोष यादव विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहेंगी।विदित है कि संघ अपने स्थापना दिवस पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर समाज के वैसे प्रतिष्ठित हस्ती को आमंत्रित करती है जो संघ के सदस्य न हों।इस क्रम में देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी अतिथि रह चुके हैं।

संतोष यादव का जन्म 10 अक्टूबर 1967 को रेवाड़ी जिले के जोनियावास गाँव में हुआ था, उन्होंने जयपुर के महारानी कॉलेज से 1987 में इकोनोमिक्स (Honors) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।अध्यन के दौरान उन्हें पहाड़ों पर चढ़ने का जनून सवार हो गया।अपने इस जूनून को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने उत्तरकाशी स्थित Nehru Institute of Mountaineering (NIM) से पहाड़ों पर चढ़ने का प्राथमिक कोर्स किया।1989 में वे नौ देशों के International Climbing Camp-cum-Expedition का हिस्सा बनी।31 सदस्यों वाले इस दल में वे अकेली महिला थी। नवम्बर 1990 में संतोष यादव ITBP (गृह मंत्रालय) से जुड़ गयी।अगले ही साल भारत-जापान कंचनजंघा अभियान में उनका चयन हो गया।वे इस दुर्गम पहाड़ी चढ़ाई पर 24,950 फीट की उंचाई तक पहुँच गयी लेकिन ख़राब मौसम के चलते आगे नहीं बढ़ सकी।

वर्ष 2009 में दिए एक साक्षात्कार में वे कहती है, “कंचनजंघा की चढाई के वक़्त मुझे याद है कि बात लगभग तय हो चली थी कि मैं जिंदा नहीं बचूंगी।मैं नेपाल की तरफ लटक गयी थी क्यूंकि तूफ़ान ने मुझे पूरे वेग से उड़ा लिया था।मैं पेंडुलम की तरह लटकी हुई थी और उस समय मैंने अपने आप को मजबूती से रस्सी में बांधे रखा. साथ ही मेरे दो साथी जिसमे में एक फुदोर्जे थे, उन्हें भी तूफ़ान उड़ा ले गया था। यह देखकर मुझे थोड़ी घबराहट ज़रूर हुई लेकिन उस वक़्त मुझे मेरे मानसिक संतुलन ने बचाया।कंचनजंघा विश्व की तीसरा सबसे उंचा पहाड है और उसकी कुल उंचाई 28,169 फीट है।
संतोष यादव ने 1990 में लद्दाख स्थित 25,170 फीट ऊँचे ससेर कांगरी 1 नामक पर्वत पर भी सफल चढाई की है। वे कामेत पर्वत पर्वत (25,447 फीट) पर भी चढ़ाई के प्रयास कर चुकी है लेकिन जब संतोष यादव पर्वत की चोटी से मात्र 100 फीट निचे थी तो ख़राब मौसम के चलते इस अभियान को वही समाप्त करना पड़ा था हालाँकि इस कामेत पर्वत की सहायक चोटी – अबी गमिन (24,131 फीट) पर वे सफलता हासिल कर चुकी है। हिमालय की यह पर्वत श्रृखंला चलोमी जिले में स्थित है।
एवरेस्ट पर्वत पर दो बार चढ़ने वाली विश्व की प्रथम महिला हैं।सबसे पहले उन्होंने 1993 में एवरेस्ट पर चढ़ाई कर विजय हासिल की और फिर 1994 में पुन: पर्वतारोहण किया और एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में सफलता प्राप्त की।इसके अलावा वे कांगसुंग (तिब्बत की तरफ से एक खतरनाक रास्ता)) की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने वाली विश्व की पहली महिला भी है।
संतोष यादव को 30 मार्च 2000 को उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।साल 2006 में हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में इनके नामपर एक सड़क का नाम घोषित किया। माउंट एवेरेस्ट पर पहली महिला द्वारा विजय हासिल करने के लिए इनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है। 2007 में  NCERT द्वारा इनकी जीवनी को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है।