गांधी ने एलिज़ाबेथ की शादी में रुमाल उपहार में दिया था

      बाल मुकुन्द ओझा

ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने ब्रिटेन पर 70 सालों तक शासन किया। वह दुनिया की सबसे उम्रदराज साम्राज्ञी थीं। रानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटेन के अलावा 15 और देशों की भी रानी थी। गाँधी से मोदी तक के मिलने वाली वह दुनिया की एक मात्र जीवित साम्राज्ञी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा की 2015 और 2018 में ब्रिटेन की अपनी यात्राओं के दौरान मेरी महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ यादगार मुलाकातें हुईं। मैं उनकी गर्मजोशी और दयालुता को कभी नहीं भूलूंगा। एक बैठक के दौरान उसने मुझे वह रूमाल दिखाया जो महात्मा गांधी ने उसे उसकी शादी में उपहार में दिया था।आश्चर्य की बात तो यह है गांधी का दिया यह उपहार आज तक रानी ने सुरक्षित रखा। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय तीन बार भारत आई । 1961, 1983 और 1997 में वे भारत की शाही मेहमान बनी ।

भारत के तत्कालीन राष्ट्रपतियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था । भारत पहुंचने के बाद एलिजाबेथ उस स्थान पर (राजघाट) भी गई जहां महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। वहां पहुंचने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी सैंडल को निकाल कर अंदर प्रवेश किया। प्रिंस फिलिप ने भी ठीक ऐसा ही किया था। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की भारत की 1961 में भारत यात्रा के दौरान तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शाही जोड़े की अगवानी की थी। महारानी एलिजाबेथ और उनके पति, प्रिंस फिलिप ने पहली बार 1961 में देश का दौरा किया था। अपनी यात्रा के दौरान, शाही जोड़े ने कई राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की और ताजमहल सहित देश के सबसे पसंदीदा ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने नई दिल्ली में राजपथ पर भव्य गणतंत्र दिवस समारोह में भी भाग लिया। रानी ने आगरा, बॉम्बे (अब मुंबई), बनारस (अब वाराणसी), उदयपुर, जयपुर, बैंगलोर (अब बेंगलुरु), मद्रास (अब चेन्नई) और कलकत्ता (अब कोलकाता) का भी दौरा किया। वाराणसी में, उन्होंने बनारस के तत्कालीन महाराजा के आतिथ्य का आनंद लेते हुए एक शाही जुलूस में हाथी की सवारी की। यह जोड़ा उदयपुर भी गया था। महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ ने उनका स्वागत किया, जिन्होंने रानी को 50 से अधिक रईसों से मिलवाया, जो शाही जोड़े के स्वागत में उनके साथ शामिल हुए थे।
1961 के बाद, महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस फिलिप ने 1983 और 1997 में फिर से एक साथ भारत का दौरा किया, जब भारत ने अपनी स्वतंत्रता के 50वें वर्ष को चिह्नित किया। 1983 में, तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के निमंत्रण पर रानी और राजकुमार फिलिप ने देश का दौरा किया। इस बार, शाही जोड़ा राष्ट्रपति भवन के नवीनीकृत विंग में रुका और रानी ने मदर टेरेसा को मानद ऑर्डर ऑफ मेरिट प्रदान किया। उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री प. नेहरू से लेकर मौजूदा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को देखा। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी से मिलने का सौभाग्य भी उन्हें मिला था।
महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय 21 अप्रैल 1926 को पैदा हुई थीं. तब उनके दादा दादा जॉर्ज़ पंचम के शासन हुआ करता था। उनके पिता एल्बर्ट, जो बाद में जार्ज छठे के तौर पर जाने गए, वह जार्ज पंचम के दूसरे बेटे थे। उनकी मां एलिज़ाबेथ, यॉर्क की डचेज़ थी। यही बाद में एलिजाबेथ के नाम से जानी गई। तभी महारानी को एलिज़ाबेथ द्वितीय के तौर पर जाना गया। उनकी बहन राजकुमारी मार्गरेट और उन्हें घर पर ही मां और एक टीचर ने पढ़ाया। साल 1950 में उनकी नैनी क्राफोर्ड ने एलिज़ाबेथ और उनकी बहन पर द लिटिल प्रिन्सेज़ेज़ नाम की बायोग्राफी लिखी थी। इसी में उन्होंने महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के बारे में बताया गया कि उन्हें घोड़ों व पालतू कुत्तों से बेहद लगाव रहा। वह बेहद अनुशासन प्रिय होने के साथ ही जिम्मेदार स्वभाव वाली थीं। इसी में उनकी बहन चचेरी बहन मार्गरेट र्होड्स ने उन्हें एक चुलबुली छोटी लड़की, लेकिन बेहद संवेदनशील व सभ्य बताती हैं। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और प्रिंस फ़िलिप यानी ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा की शादी 20 नवंबर 1947 में हुई थी। एलिज़ाबेथ के पति फ़िलिप उनके दूर के रिश्तेदार थे। एलिज़ाबेथ को 13 साल में ही उनसे इश्क हो गया था। इस शाही जोड़े की एक झलक के लिए बकिंघम पैलेस के बाहर लोगों का सैलाब उमड़ा था। इस शाही जोड़े की शादी के वक्त भारत अपनी आजादी के जश्न मनाने की तैयारी में जुटा था। इस जोड़े के पहले बच्चे प्रिंस चार्ल्स 1948 में पैदा हुए। इसके बाद 1950 में बकिंघम पैलेस में राजकुमारी ऐनी का जन्म हुआ।
महारानी एलिज़ाबेथ ब्रिटेन के 14 प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुकी थीं, हालांकि 15वीं पीएम लिज ट्रस के साथ काम करने से पहले ही वह दुनिया से रूखस्ती कर गईं। तीन महीने पहले ही महारानी के राज के 70 साल पूरे होने पर ब्रिटेन प्लेटिनम जुबली सेलिब्रेट की. इसमें लाखों लोग शामिल हुए और टीवी पर इसे दुनियाभर के लोगों ने देखा।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)