कोरोना से खतरा है डायबिटीज के मरीजों को

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में डायबिटीज के मरीजों की हालत खस्ता है। डब्ल्यूएचओ द्वारा 155 देशों में कराए गए सर्वे के मुताबिक कोरोना संकट के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज पाने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। देश और दुनिया में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना वायरस की चपेट में बुजुर्गों, बच्चों के अलावा ऐसे लोगों आसानी से आ रहे हैं जिन्हें डायबिटीज, बल्ड प्रेशर या पहले से कोई बीमारी है। ऐसे लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है इसलिए ये लोग आसानी से वायरस के शिकार हो जाते हैंडायबिटीज से पीड़ित लोगों में कोविड-19 से मरने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए घर में व्यायाम करने तथा खून में ग्लूकोज की मात्रा की लगातार जांच करने का सुझाव दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक डायबिटीज के अलावा, जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, किडनी की पुरानी बीमारी और दिल संबंधी समस्याओं जैसे गंभीर रोग हैं, वे भी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। जिस तरह से कोरोनावायरस से लोग संक्रमित हो रहे हैं और बुजुर्गों या किसी और बीमारी से पीड़ित लोगों को यह बीमारी ज्यादा प्रभावित कर रही है तो ऐसे में कोरोनो वायरस से बचने के लिए सभी को स्वच्छता और सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है, और अगर आप डायबिटीज जैसी बीमारी से पीड़ित हैं तो सावधानी बरतना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। संक्रमण जैसी बीमारियों में आपका इम्यून सिस्टम काफी मददगार होता है।
कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, जो इन्हें कोविड – 19 के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 400 मिलियन से भी ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलता देख डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की गई हैं। यह गाइडलाइंस विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जारी की है, जिनमें डायबिटीज के मरीजों को संक्रमण से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों को बताया गया है। दरअसल, ऐसे लोगों की स्वास्थ्य समस्या को ध्यान में रखते हुए या देखा गया कि ऐसे रोग से पीड़ित होने के कारण इन्हें संक्रमण होने के बाद तेजी से अन्य कई प्रकार की समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए उन्हें कुछ खास सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है। इनमें भीड़भाड़ वाली जगह में जाने से बचने, लोगों से न मिलेने, नियमित जाँच कराने आदि शामिल है।
मधुमेह या डाइबिटीज जिसे बोलचाल की भाषा में शुगर भी कहा जाता है आखिर है क्या जिसकी चर्चा आजकल घर घर में सुनी जा रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक हर आयु का व्यक्ति इस बीमारी का शिकार हो रहा है। अस्पतालों और जाँच केंद्रों पर मधुमेह के रोगी बड़ी संख्या में देखे जा रहे है। भारत में हर पांचवें व्यक्ति को इस बीमारी ने घेर रखा है। स्वस्थ व्यक्ति में खाने के पहले ब्लड में ग्लूकोस का लेवल 70 से 100 एमजी डीएल रहता है। खाने के बाद यह लेवल 120-140 एमजी डीएल हो जाता है और फिर धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। मधुमेह हो जाने पर यह लेवल सामन्य नहीं हो पाता और बढ़ता जाता है। मधुमेह एक गंभीर मेटाबॉलिक रोग है जो अग्नाशय द्वारा इंसुलिन कम उत्पन्न करने या इंसुलिन न उत्पन्न कर पाने की स्थिति में होती है।
मधुमेह पहले अमीरों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन आज इसने हर उम्र और आय वर्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। एक दशक पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र 40 साल थी, जो अब 25-30 साल हो चुकी है। भारत में मधुमेह रोगियों की स्थिति पर नजर डाले तो आकड़े बेहद भयानक और चौकाने वाले हैं। 1991 में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 2 करोड़ के आस-पास थी जो 2006 में बढ़कर 4 करोड़ 20 लाख हो गईं। भारत में 2015 में लगभग 7 करोड़ लोग इससे पीडित थे। 2018 में यह संख्या आठ करोड़ को पार कर गई । अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में मधुमेह रोगियों की संख्या 2030 तक 55 करोड़ पार कर जाएगी।
मधुमेह वर्तमान में हमारी जिंदगानी का एक अहम् हिस्सा बन गयी है। यदि आपको मधुमेह है तो इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सावधानी और सजगता की। खानपान और अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव की। आप डरेंगे तो यह आपको डराएंगी। मगर आप सावचेत रहे तो इसका मुकाबला आसानी से कर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकेंगे।

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