एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका ने अंग व टिशू के दान को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मोस्ट’ अभियान लॉन्च किया

पद्मश्री विजेता और खेल रत्न एवं अर्जुन अवार्ड विजेता, डॉ. दीपा मलिक ने अपने दिल और आँखों का दान करने का संकल्प लिया

दिल्ली(चलते फिरते ब्यूरो) । अंगदान एक महान कार्य है, जो उन हजारों लोगों को जीवन की एक नई उम्मीद देता है, जो अंगों के खराब हो जाने के कारण मृत्यु से जूझ रहे हैं। लोगों को बहुमूल्य जिंदगियाँ बचाने का प्रोत्साहन देने के लिए आज एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका ने पैरालंपिक गेम्स में भारत की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता, डॉ. दीपा मलिक और नोट्टो के डायरेक्टर, डॉ. रजनीश सहाय की उपस्थिति में एक नया अभियान, मणिपाल ऑर्गन शेयरिंग एवं ट्रांसप्लांट (मोस्ट) लॉन्च किया।

भारत में हर साल अंगों के खराब हो जाने के कारण लगभग 4,00,000 लोगों को अंगों का प्रत्यारोपण कराने की जरूरत पड़ती है। बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि ब्रेन डेथ के बाद एक व्यक्ति अपना दिल, फेफड़े, लिवर, किडनी, छोटी आँत, और पैन्क्रियाज़ का दान करके 8 ज़िंदगियाँ तक बचा सकता है। ब्रेन डेथ उन लोगों की होती है, जिनके सिर में चोट या आघात लगता है, जिसकी वजह से दिमाग की तो मृत्यु हो जाती है, पर दिल का धड़कना जारी रहता है, जिसके कारण शेष अंग कुछ समय तक जिंदा बने रहते हैं। दूसरी तरफ, आँख, स्किन बोन और हार्ट वॉल्व जैसे टिश्यू किसी भी तरह से मृत्यु होने के बाद 6 से 8 घंटों में दान किए जा सकते हैं।

इस अभियान की मदद से लोग हॉस्पिटल की वेबसाईट पर जाकर नोट्टो में अंगदान करने के लिए खुद का पंजीकरण करा सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. दीपा मलिक और एनसीआर में सभी मणिपाल हॉस्पिटल के 700 से ज्यादा कर्मचारियों ने अपने अंग और आँखों का दान करने का संकल्प लिया। हॉस्पिटल ने अपने एक नए विभाग का लॉन्च भी किया, जिसका उद्देश्य ब्रेन डेथ से मरने वाले लोगों के परिवारों को सहयोग व परामर्श प्रदान करना है, ताकि वो मृत के अंगों का दान करने के लिए प्रोत्साहित हों।

इस अभियान के लॉन्च के दौरान डॉ. दीपा मलिक ने कहा, ‘‘अंगदान एक महान कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवन की एक नई उम्मीद देता है, बल्कि मृत हो चुके व्यक्ति को उसके दान किए गए अंगों के माध्यम से इस दुनिया में बने रहने का अवसर भी प्रदान करता है। भारत में चिकित्सा क्षेत्र में हुई उन्नति के बाद भी अंगदान के प्रति जागरुकता बहुत कम है और लोगों को यह जानकारी नहीं कि अंगदान से कितने लोगों की जान बचाई जा सकती है। अंगों का प्रत्यारोपण कराने की आवश्यकता बहुत तेजी से बढ़ी है और इस आवश्यकता एवं अंगों की उपलब्धता के बीच का अंतर कम करने के लिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। मैं सभी भारतीयों से निवेदन करती हूँ कि वो इस उद्देश्य में मदद करें और आगे आकर अपने अंगों का दान करने का संकल्प लें।’’

इस उद्देश्य के बारे में डॉ. (कर्नल) अवनीश सेठ, वीएसएम, हेड – गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं मणिपाल ऑर्गन शेयरिंग एंड ट्रांसप्लांट, एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘हम सभी को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि भारत हर साल दुनिया में अंगों का प्रत्यारोपण करने के मामले में तीसरे स्थान पर आता है। इस देश में जीवित डोनर किडनी एवं लिवर प्रत्यारोपण के लिए दुनिया में गहन अनुभव और विस्तृत विशेषज्ञता है। हालाँकि, आज लोगों द्वारा अपनी मृत्यु के बाद अंगों व टिश्यू का दान किए जाने की जरूरत है। भारतीय स्वभाव से परोपकारी होते हैं। इस अभियान की मदद से मणिपाल हॉस्पिटल्स का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस महान कार्य से जुड़ने का प्रोत्साहन देना है।’’

इस अभियान के बारे में एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल्स में हॉस्पिटल डायरेक्टर, रमन भास्कर ने कहा, ‘‘मणिपाल हॉस्पिटल्स हमेशा से लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पहल करने में सबसे आगे रहा है| #TheMostNobelAct अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की हमारी एक बड़ी पहल है। एक व्यक्ति अपने अंगों को दान कर 8 लोगों की जान बचा सकता है। यह नेक कार्य न केवल एक व्यक्ति को स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने में मदद करता है, बल्कि यह उन परिवारों, दोस्तों, सहकर्मियों और परिचितों को भी प्रभावित करता है जो इन अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीज़ों से प्यार करते हैं और स्वस्थ्य देखना चाहते हैं। इस पहल के माध्यम से, हम ब्रेन-डेड रोगियों के परिवारों से इस नेक कार्य का हिस्सा बनने और जरूरतमंद लोगों को जीवन का उपहार देने का आग्रह करते हैं।“