“भारतीय शिक्षा बोर्ड” की रूपरेखा तैयार करेगा पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट 

शिक्षा के 'स्वदेशीकरण के लिए सार्थक पहल

नई दिल्ली(चलते फिरते ब्यूरो)। एक ओर केंद्र सरकार ने आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृतमहोत्सव में देश के प्रत्येक नागरिक को भागीदारी देने को तत्पर है तो दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र में क्रन्तिकारी फैसले ले कर आजादी के अमृतकाल का भी मान बढ़ा दिया है और वो फैसला है भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन का।“भारतीय शिक्षा बोर्ड” का गठन करके उसके संचालन का जिम्मा बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट  को सौंपा है. बाबा रामदेव  ने यह जिम्मेदारी दिए जाने पर पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।स्वामी रामदेव ने कहा कि जब पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार ने आज भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन करके एक और ऐतिहासिक कार्य किया है। बता दें कि कि शिक्षा का ‘स्वदेशीकरण’ करने के लिए सीबीएसई की तर्ज पर एक राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड स्थापित करने का विचार सबसे पहले स्वामी रामदेव  ने ही सामने रखा था।वर्ष 2015 में उन्होंने अपने हरिद्वार स्थित वैदिक शिक्षा अनुसंधान संस्थान के जरिए एक नया स्कूली शिक्षा बोर्ड शुरू करने का विचार प्रस्तुत किया था। इस स्कूली शिक्षा बोर्ड में ‘महर्षि दयानंद की पुरातन शिक्षा’ और आधुनिक शिक्षा का मिश्रण करके भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना की जानी थी, जबकि  शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2016 में यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था।

 

इस उपलब्धि पर स्वामी रामदेव  ने कहा कि 1835 में मैकाले जो पाप करके गया था उसको साफ करने का कार्य पतंजलि भारतीय शिक्षा बोर्ड   के माध्यम से करने जा रहा है अब भारत के बच्चों का मानस भारतीयता के अनुसार तैयार किया जाएगा उन्होंने भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया है स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में हम वो युवा नेतृत्व गढ़ेंगे, जो भारत ही नहीं पूरे विश्व का नेतृत्व करेंगे

इसके बाद बाबा रामदेव  ने फिर से प्रयास किए और मोदी सरकार के मंत्रियों से मिलकर भारतीय शिक्षा बोर्ड  शुरू करने के फायदे बताएजिसके बाद वर्ष 2019 के आम चुनाव शुरू होने कुछ अर्सा पहले भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया था. जिससे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से कुछ घंटे पहले मंजूरी मिल जाए.वहीं शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले स्वायत्त संगठन उज्जैन स्थित महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान  ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थीदरअसल MSRVPP अपना खुद भारतीय शिक्षा बोर्ड शुरू करना चाह रहा था लेकिन सरकार ने उसकी आपत्तियों को खारिज कर दियाBSB देश का पहला राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड माना जाएगा और उसे सिलेबस तैयार करने, स्कूलों को संबद्ध करने, परीक्षा आयोजित करने और प्रमाण पत्र जारी करके भारतीय पारंपरिक ज्ञान का मानकीकरण करने का अधिकार होगा.वह आधुनिक शिक्षा के साथ इसे मिश्रित करके भारतीय परंपरा के अनुसार पढ़ाई करवाएगा
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