जल जीवन है या जहर

बाल मुकुन्द ओझा

भारत सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि आज हम जो पानी पी रहे हैं वह जहर बन गया है। सरकार ने राज्यसभा में जो आंकड़े दिए हैं वो न सिर्फ चौकाने वाले हैं बल्कि डराने वाले भी हैं। जहां भूजल में जहरीली धातुओं की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है। आंकड़ों के अनुसार देश के 25 राज्यों के 209 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक का स्तर 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। 29 राज्यों के 491 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में लौह तत्व 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। 21 राज्यों में 176 जिले ऐसे हैं जहां भूजल में लेड का स्तर कुछ हिस्सों में 0.01 मिलीग्राम प्रति ली टर से अधिक है। वहीँ 11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में कैडमियम का स्तर 0.003 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाया गया।

जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी को इसका पानी भूजल से मिलता है। दुनिया में उपलब्ध कुल जल में मात्र 0.6 फीसदी जल ही पीने योग्य है। यह पानी समुद्रों नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों में मौजूद है। मानव सभ्यता के विकास के साथ हमारे जलस्रोत जबरदस्त प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। इनमें जल प्रदूषण मुख्य कारक है। जल प्रदूषण के कारण विभिन्न जलस्रोतों में जीवन के लिए जहर रूपी खतरनाक रसायनों के मिश्रण का घोल बन रहा है। हमारे देश में शुद्ध जल की प्राप्ति दूभर होती जा रही है। प्रदूषित के बाद संदूषित जल ने हमारे स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को बिगाड़ कर रख दिया है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा दिये आँकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ ग्रामीण पीने के लिये धातु-संदूषित जल का उपयोग करते हैं। जल में पाए जाने वाले प्रमुख भारी धातु फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट हैं। आर्सेनिक संदूषण में बंगाल और राजस्थान शीर्ष पर हैं। जल जीवन का आवश्यक तत्व है। वनस्पति से लेकर जीव जन्तु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल के माध्यम से करते हैं। जीवन पानी पर निर्भर करता है। मनुष्य एवं प्राणियों के लिए पीने के पानी के स्त्रोत नदियाँ, सरिताएँ, झीलें, नलकूप आदि हैं। मानव पानी का उपयोग स्नान, धुलाई, उद्योग, सिंचाई, नेविगेशन, निर्माण कार्य आदि के लिए करता है यह हम सब जानते है। जल का दूषित होना मनुष्य के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है ।

हमारे देश के भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाईट्रेट, लोहा, कैडमियम, क्रोमियम, तांबा, निकल, सीसा, जस्ता व पारा जैसी भारी धातु का मिश्रण तेजी के साथ घुलता जा रहा है। जिससे जलजनित बीमारियां हमारे जीवन के लिए खतरा बन गई हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की माने तो विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और जल गुणवत्ता की निगरानी के दौरान केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा तैयार भूमि जल गुणवत्ता के आंकड़े देश के विभिन्न राज्यों के भागों के अलग-अलग हिस्सों में भूमि जल संदूषण की पुष्टि कर रहे हैं। हालत यह हो गई है की लोग धीमे जहर वाले पानी को पीने के लिए विवश हैं। मंत्रालय का दावा है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर इस चुनौती से निपटने के लिए संदूषित भूजल की समस्या और विशुद्ध जल के सेवन से प्रभावित नागरिकों के उपचार के लिए जागरूकता और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा जारी की एक रिपोर्ट में भूमि जल की गुणवत्ता वाले आंकड़े पर गौर किया जाए तो भूजल में विषैले पदार्थो की सांद्रता भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसे 16 राज्यों के 212 जिलों की सांद्रता आंकी गई है। जबिक 20 राज्यों के 335 जिले फ्लोराइड, 21 राज्यों के 387 जिले नाईट्रेट और 153 जिले आर्सेनिक से प्रभावित हैं, जबिक 25 राज्यों और एक संघ शासित प्रदेशों के 302 जिलों के भूजल में लोहा की मात्रा मानकता से ज्यादा पाई गई है। इसके अलावा डेढ़ दर्जन राज्य में सीसा, क्रोमियम और कैडमियम जैसी भारी धातु के मिश्रण वाले भूजल से ग्रस्त हैं। आँकड़ों के अनुसार, भारत का सबसे अधिक 39 प्रतिशत प्रभावित आबादी वाला राज्य पश्चिम बंगाल है। बंगाल के लगभग 1.57 करोड़ ग्रामीण धातु-संदूषित जल का सेवन करते हैं। राजस्थान में 65 लाख ग्रामीण पीने के लिये संदूषित जल का प्रयोग करते हैं जिससे उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित है, जबकि बिहार में 43 लाख लोग दूषित जल का सेवन करते हैं। आँकड़ों के अनुसार, धातु-संदूषित जल सेवन के आधार पर 16 राज्यों में एक लाख से अधिक ग्रामीण आबादी है। जबकि सात राज्यों – पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। फ्लोराइड संदूषण के क्षेत्र में 33 लाख, लवणता संदूषण के क्षेत्र में 25 लाख तथा नाइट्रेट संदूषण के क्षेत्र में 7 लाख आबादी के साथ राज्यों की सूची में राजस्थान सबसे उपर है।
बाल मुकुन्द ओझा
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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