इंडिया टीवी सर्वे : राजस्थान में बदलाव की आंधी

बाल मुकुन्द ओझा

इंडिया टीवी और मैटराइज सर्वे की माने तो आज राजस्थान विधानसभा के चुनाव होते है तो पांच साला बदलाव की परम्परा का निर्वहन करते हुए राजस्थान से गहलोत सरकार का पाटिया साफ़ हो सकता है। सर्वे के मुताबिक राजस्थान एक बार फिर सरकार बदलने की कगार पर है। भाजपा को यहां बहुमत मिलता साफ नजर आ रहा है। इंडिया टीवी सर्वे में लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में जाती दिखाई गई है। यदि यही स्थिति बरक़रार रहती है तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार निश्चित है। विधानसभा के सर्वे में भाजपा को 148 सीटों के साथ काबिज बताया जा रहा है तो कांग्रेस मात्र 42 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी।

यदि यही स्थिति रही तो सत्ता का बदलाव निश्चित है। यह सर्वे 11 से 24 जुलाई के बीच किया गया। सर्वे में मोदी को सबसे बड़ा चुनावी चेहरा बताया गया है। सर्वे में 52 प्रतिशत के साथ 148 सीटें भाजपा के पक्ष में बताई गई है। सर्वे के दौरान 27 प्रतिशत लोगों ने वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीएम के चेहरे के रूप में अपनी पहली पसंद बताई है। वहीँ वसुंधरा के पक्ष में 22 और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के पक्ष में 19 प्रतिशत और सचिन पायलेट को 11 प्रतिशत लोगों ने अपनी पसंद बताई।
राजस्थान में पिछले 30 सालों से हर चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा चली आ रही है। विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नज़र डालें तो यह साफ तौर पर सामने आता है कि हर टर्म के बाद सरकार का बदलना जारी है। राज्य में 200 विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2003 में 120 सीटें भाजपा ने जीतीं तो कांग्रेस के पास 56 सीटें आईं और बाकी पर अन्यों ने जीत दर्ज की। वर्ष 2008 में कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरा और करीब 96 सीटों पर विजय प्राप्त की तो वहीं भाजपा की झोली में करीब 78 सीटें आईं। वर्ष 2013 में भाजपा ने 162 सीटों के साथ भारी भरकम जीत दर्ज की। वहीं काँग्रेस के पास 21 सीटें ही रह गईं। इन परिणामों में कभी भाजपा सरकार बनाती है तो कभी काँग्रेस। हर पांच साल में कार्यकाल पूरा होने के बाद होने वाले चुनावों में कांग्रेस या भाजपा, दोनों में से एक पार्टी सत्ता पर काबिज़ हो जाती है। इस बार बारी भाजपा की है।
कांग्रेस नेता सचिन पायलेट पिछले दो वर्षों से यह लगातार कहते आ रहे है की यह परम्परा बदलनी चाहिए और इसके लिए उन्होंने एक फार्मूला कांग्रेस आलाकमान को सुझाया है। वहीँ भाजपा आशान्वित है की पांच साल में सत्ता बदलेगी। कांग्रेस की तरह भाजपा भी यहाँ गुटबंदी में फंसी है। कांग्रेस में गहलोत बनाम पायलेट का संघर्ष जग जाहिर है तो भाजपा में वसुंधरा के सामने पूनिया ताल ठोके हुए है। बताया जाता है पूनिया को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त है। वसुंधरा भी हार मानने को तैयार नहीं है। वसुंधरा ने आरएसएस मुख्यालय की परिक्रमा शुरू करदी है।
गौरतलब है काँग्रेस और भाजपा के अलावा राजस्थान में तीसरी पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है। दशकों से काँँग्रेस और भाजपा ही राजस्थान की राजनीतिक ज़मीन पर काबिज रही है। इस प्रदेश में कुम्भाराम आर्य, नाथूराम मिर्धा सहित किरोड़ी लाल मीणा और घनश्याम तिवाड़ी ने तीसरे मोर्चे की आधारशिला रखने की तैयारी की थी मगर सफल नहीं हुए। वर्तमान में हनुमान बेनीवाल तीसरे मोर्चे की कमान संभाले हुए है मगर उनकी तरकश के तीर भी निशाना भेदने में सफल नहीं हुए है। यहाँ फिलहाल भाजपा और कांग्रेस में ही आमने सामने की लड़ाई है। और इस बार बारी एक बार फिर भाजपा की है जिसकी भविष्यवाणी इंडिया टीवी के सर्वे ने करदी है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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