कथाकार विजय जोशी के कहानी – संग्रह  ” सुलगता मौन ” का विमोचन 

सामाजिक जीवन और जगत के यथार्थ को विश्लेषित करती कहानियाँ ' - डॉ. नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी

कोटा।  कथाकार-समीक्षक विजय जोशी के सद्य प्रकाशित कथा-संग्रह ” सुलगता मौन ” का विमोचन सादा समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार एवँ कथाकार द्वय डॉ. क्षमा चतुर्वेदी और डॉ. नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने किया।
 डॉ. नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि- ‘ सामाजिक जीवन और जगत के यथार्थ को विश्लेषित करती विजय जोशी की कहानियाँ, सामाजिक सरोकार को प्रभावी तरीके से व्यक्त ही नहीं करती वरन् सूक्ष्म विवेचना भी करती हैं। यह संग्रह अपनी सहज प्रभावी भाषा तथा अपनी विषय-वस्तु की उद्भावना के कारण उल्लेखनीय तो है ही पठनीय भी है। ‘
डॉ. क्षमा चतुर्वेदी ने कहा कि- ‘ विजय जी की कहानियों की यह विशेषता है कि समाज में आ रहे परिवर्तनों और मूल्यहीनता को सूक्ष्म दृष्टि से आकलन करते हुए पात्रों के मनोजगत में जाकर, उनके व्यवहार को उभारती हैं। ‘
मुख्य वक्ता कहानीकार- समीक्षक डॉ.गीता सक्सेना ने कहा कि- ‘ व्यक्ति व समाज के वास्तविक चित्रण के साथ युगबोध के स्वर और जीवन-मूल्यों के संरक्षण को उजागर करती विजय जोशी के ये कहानियाँ संवेदनाओं के धरातल पर परिवेश को शब्दांकित करती हैं।
कथाकार विजय जोशी ने संग्रह की कहानियों में समाहित भाव- संवेदनों को बताते हुए कहा कि- ‘इन कहानियों में युग के सापेक्ष बदलते परिदृश्यों और उससे उत्पन्न परिस्थितियों का वह मौन मुखर है जो व्यक्ति के अन्तस में समुच्चय-सा एकत्रित एवँ ऋणात्मक और धनात्मक सन्दर्भों से रूपायित कोष्ठकों के द्वारा आबद्ध रहता है।
डिबोक सेल्स एण्ड मार्केटिंग लि. के क्षेत्रीय प्रबंधक मुकेश कुमार सक्सेना ने कहा कि – ‘ विजय जी की तमाम कहानियाँ अपने समय और परिवेश का जीवन्त दस्तावेज़ हैं जिनके पात्र जाने- पहिचाने और सहज रूप से बतियाते लगते हैं।

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