कोरोना संकट में ई लर्निंग की उपयोगिता

डॉ मोनिका ओझा खत्री

इंटरनेट ने देश और दुनिया की प्रगति में एक नया आयाम स्थापित किया है। यह ज्ञान का खजाना है। शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन एजुकेशन ने क्रांति उत्पन्न की है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पढ़ने एवं सीखने को ही ई-लर्निंग कहते है। कुछ साल पहले शायद यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में भी इतनी क्रांति आ सकती है लेकिन यह संभव हुआ और आज ई लर्निंग का जिस प्रकार तेजी से विस्तार हो रहा है वह तो सबके सामने ही है। ई-शिक्षा अनिवार्य रूप से कौशल एवं ज्ञान का कंप्यूटर एवं नेटवर्क समर्थित अंतरण है। ई-शिक्षा इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों और सीखने की प्रक्रियाओं के उपयोग को संदर्भित करता है। ई-शिक्षा के अनुप्रयोगों और प्रक्रियाओं में वेब-आधारित शिक्षा, कंप्यूटर-आधारित शिक्षा, आभासी कक्षाएं और डिजीटल सहयोग शामिल है। मगर लाख टके का सवाल यह है की देश में सब जगह इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। केपीएमजी के मुताबिक भारत में इंटरनेट की पैठ 31 प्रतिशत है जिसका अर्थ है देश में 40 करोड़ से कुछ अधिक लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह देश में इस समय 29 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं। ऑन लाइन शिक्षा के लिए ये माध्यम सबसे कारगर माना गया है।
शिक्षा किसी व्यक्ति के विकास और समुदाय की समृद्धि के लिए भी योगदान देती है। भारत में स्कूल कॉलेज समेत तमाम शैक्षणिक संस्थान को कोरोना संकट के चलते 24 मार्च से बंद कर दिया गया। कोरोना के इस संकट काल में ऑनलाइन शिक्षा मौजूदा समय की जरुरत बन चुकी है। इसके जरिए बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया गया है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में एक बात निकल कर सामने आ रही है कि क्या ऑनलाइन शिक्षा आने वाले समय में एक विकल्प बनकर रह जाएगी या फिर इसे प्रभावी रुप से हमारी शिक्षा व्यवस्था में अपनाया जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल किसी भी समय कहीं से भी सुलभ है। यह न केवल पुस्तकों और अन्य संसाधनों को लाता है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा फैलाने के लिए दूरस्थ शिक्षा पहलुओ को भी बढ़ावा देता है। ऑनलाइन शिक्षा ऑनलाइन समाधान के माध्यम से कम लागत पर सेवाएं प्रदान करता है। यह कम कीमत पर सामान्य आधारभूत संरचना प्रदान करता है। यह शिक्षकों, स्कूलों और परीक्षा बोर्डों के लिए पाठ्यक्रम प्रदान करने और कम लागत पर परीक्षा आयोजित करने और मूल्यांकन करने के लिए उपकरण प्रदान करता है।
आज सम्पूर्ण शिक्षा जगत में यह बहस हो रही है कि ऑनलाइन शिक्षा पद्धति ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्तरीय शिक्षा मुहैया करा पाने की संभावना देगा। यह प्रणाली लागु करने से पहले इसके गुण दोषों पर गहन जाँच पड़ताल की जरुरत है अन्यथा अधकचरा ज्ञान बच्चों का भविष्य खराब कर सकता है।

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