कोरोना जंग में मजूबती से अपनी भूमिका निभा रहे ये धुरंधर

बाल मुकुन्द ओझा

प्रत्येक व्यक्ति में कुछ कर गुजरने की क्षमता होती है मगर ऐसे चंद लोग ही है जो अपनी क्षमता का सकारात्मक उपयोग करते हो। किसी भी जंग को जीतने में सभी योद्धाओं का योगदान महत्वपूर्ण होता है लेकिन नेतृत्व करने वालों पर दारोमदार ज्यादा होता है। ऐसी ही कुछ सख्शियतों की हम यहाँ जानकारी दे रहे है जो कोरोना महामारी के दौरान दिन रात काम करते नहीं थकते। नेहरू युवा केंद्र राजस्थान में विभिन्न जिलों में लेखाकार के पद पर कार्यरत इन महारथियों ने कोविड 19 की जन जागरूकता गतिविधियों के नियोजन व क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हुऐ युवाओं के प्रेरक व मार्गदर्शक के रूप में कार्य किया है। भरतपुर के लेखाकार जगदीश डागुर, जैसलमेर के राजेंद्र पुरोहित, करौली के रवींद्र सक्सेना, बांसवाड़ा के अमृत लाल साल्वी, उदयपुर के महेश कुमार सैनी, जयपुर के रमेश गौतम, बाड़मेर के घेवरचंद प्रजापति, जालोर के अमित सचदेव,सिरोही में ज्ञान प्रकाश, टोंक में महेश जैमिनी, अलवर में तोला राम, कोटा में श्रुति शर्मा, पाली में भंवर सिंह राजपुरोहोत, धौलपुर में राघव खंडेलवाल, नागोरी में महेंद्र सिंह, सीकर में महावीर प्रसाद, झुंझुनू में सुरेंद्र शर्मा, झालावाड़ में हरिवल्लभ , श्री गंगानगर में वर्षा सुईवाल, राजसमंद में हनुवंत सिंह, बरन में अरुण कुमार, दौसा में रमा शंकर, हनुमानगढ़ में कैलाश कुमावत, अजमेर में शंकर सिंह, भीलवाड़ा में जगदीश शर्मा, बीकानेर में छोटू राम, चूरू में मधुसूदन आचार्य, डूंगरपुर में गोपाल वैष्णव, जोधपुर में हरिसिंह चारण, सवाई माधोपुर में अरविन्द कुमार ने इस दौरान अपने कार्य का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मुख्यालय के चालक मीठू सिंह ने इस दौरान पक्षियों के लिए नए तरीके के परिण्डे बनाये।
नेहरू युवा केन्द्र संगठन के राज्य निदेशक डॉ भुवनेश जैन के अनुसार ये लोग हर उपलब्धि के पीछे बैक बोन के रूप में नजर आते है। कोविड – 19 के तहत किये गये कार्यो से नेहरू युवा केन्द्र संगठन राजस्थान की प्रदेश और देश में एक नई पहचान बनी है। राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने भी इनके सराहना की है। टीम भावना से कार्य करते हुए इन लोगों ने कोरोना की रोकथाम में अहम् भूमिका निभाई और प्रदेश के गांव गांव में फैले युवा मंडलों को सक्रीय कर गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए प्रेरित किया। नेहरू युवा केंद्रों का ग्राम्य अंचलों में अपना सशक्त नेटवर्क है जिसके बुते कोरोना जंग के दौरान अधिक से अधिक लोगों से संपर्क का प्रयास किया गया। नेहरू युवा केंद्र के वर्तमान में प्रदेश में 32 जिलों में कार्यालय, दस हजार गांवों में युवा मंडल, 569 राष्ट्रीय युवा स्वयं सेवक और एक लाख सात हजार वॉलिंटियर्स है जो कोरोना जंग के योद्धा की भूमिका निभा रहे है। प्रदेश के लेखाकारों की टीम ने इस कार्य को पूरी मेहनत, लग्न और तत्परता से निभाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों और युवा मंडलों को दीवारों पर जागरूकता के लेखन और नारों से जागृत किया गया। सेनिटाइजेशन की माकूल व्यवस्था की गई। स्थानीय प्रशासन से तालमेल बैठाकर खाद्यान वितरण के काम में सहयोग दिया गया। हजारों की संख्या में मास्क बनवाकर वितरित करवाए गए। बहुत बड़ी संख्या में लोगों को सोशल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। आरोग्य सेतु एप्प डाउन लोड करवाया गया। भीषण गर्मी में पशु पक्षियों के लिए दाने पानी का इंतजाम करवाया गया। सोशल डिस्टेंसिंग सहित पोस्टर ,पेम्फलेट और स्वदेशी स्वावलम्बन अभियान, जूम वेबीनार पर प्रशिक्षण एवं संवाद स्थापित कर हजारों लोगों को लाभान्वित किया गया।

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