अब मोदी सरकार के खिलाफ महंगाई को मुद्दा बना रहा विपक्ष  

संजीव कुमार

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बीते 18 दिनों से रोजाना हो रही औसतन तकरीबन 50-60 पैसे की वृद्धि के सिलसिले पर रोकथाम की संभावना नहीं दिखने के बाद अब विपक्ष का सब्र जवाब दे गया है और उसने सड़क पर उतर कर इसके खिलाफ आम लोगों की आवाज बुलंद करने की राह पकड़ ली है। विपक्ष की कोशिश है कि महंगाई के मसले पर सरकार की जोरदार घेराबंदी की जाए क्योंकि इन दिनों महंगाई सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ही नहीं दिख रही है बल्कि रसोई गैस से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों और सेवाओं कीमतों में भी बीते कुछ समय से लगातार बेहिसाब इजाफा हो रहा है। ऐसे में एक ओर रोजगार व कमाई के अवसरों में आई कमी के कारण भारी आर्थिक परेशानियों का समाना कर रहे आम लोगों पर लगातार बढ़ रही चैतरफा महंगाई की दोहरी मार ने विपक्ष के लिये सरकार को घेरने का सुनहरा मौका मुहैया करा दिया है। इस मौके को भुनाने और आम लोगों की तकलीफों व परेशानियों को मुखरता के साथ उठाने के लिये विपक्ष ने सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक में जोरदार मोर्चा खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी सिलसिले को रफ्तार देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भी केन्द्र सरकार को घेरने के लिये कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मोर्चा खोलने में कोई कोताही नहीं बरती है। जहां एक ओर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अनवरत हो रही वृद्धि और दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार हो रहे इजाफे को एक साथ दर्शानेवाला ग्राफ साझा करते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने कोरोना महामारी और पेट्रोल-डीजल की कीमतें ‘अनलाॅक’ कर दी हैं वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चुटीले अंदाज में याद दिलाया कि जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा को अवसर में बदलने की बात कही थी तो अब उन्होंने कोरोना की आपदा को पैसा कमाने का अवसर बना लिया है।

दरअसल बीते अठारह दिनों से लगातार की जा रही डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और उसके नतीजे में लाॅकडाउन की शुरूआत के साथ ही रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि की गति में और अधिक तेजी आने के मसले को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। इसी सिलसिले में देश के कई हिस्सों में कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन भी किया है और साइकिल रैली से लेकर धरना व मोर्चा-मार्च भी आयोजित किया है। खास तौर से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व बिहार सरीखे भाजपा शासित राज्यों में विपक्ष अधिक मुखरता और आक्रामकता के साथ कोरोना के प्रसार की संभावना का जोखिम उठाकर भी आमलोगों के आक्रोश को अपने लिये हमदर्दी में तब्दील करने की जी-तोड़ कोशिशों में जुट गया है। खास तौर से कल वित्त मंत्रालय द्वारा औपचारिक तौर पर यह जानकारी सार्वजनिक किये जाने के बाद से विपक्ष का आक्रोश और अधिक मुखर हो उठा है जिसमें केन्द्र सरकार ने बताया है कि वैश्विक स्थितियां भी भारत के आर्थिक हितों के नजरिये से बेहद अनुकूल हैं क्योंकि अन्य वजहों के अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी के कारण भी बीते 12 जून तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 507.6 बिलियन अमरीकी डालर के रिकार्ड स्तर पर आ गया था और इसमें लगातार वृद्धि भी हो रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक डीजल-पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का चैतरफा असर होने के नतीजे में महंगाई के बेलगाम होने की संभावना को भांपते हुए अब विपक्ष ने इस मोर्चे पर सरकार को पुरजोर तरीके से घेरने की रणनीति बना ली है और इस सिलसिले में आगामी दिनों में सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक में सरकार की रीति-नीति के खिलाफ जोरदार अभियान चलाने की रूपरेखा बनाई जा रही है।

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