आईएएस टॉपर श्रुति शर्मा ने गौरवान्वित किया बिजनौर का नाम

 डॉ दिनेश चंद्र सिंह
वैसे तो केंद्रीय सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी) 2021 के घोषित परिणाम के मुताबिक कुल 685 अभ्यर्थियों ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास की। लेकिन इस बार की केंद्रीय सिविल सेवा परीक्षा में जहां बिजनौर जनपद की धामपुर निवासी श्रुति शर्मा ने टॉप किया है, वहीं इसी जनपद से आने वाली स्मृति भारद्वाज ने 176 वीं रैंक और डॉ शुमाईला चौधरी ने 368 वीं रैंक हासिल करके जनपद का मान बढ़ा दिया है। वहीं, पड़ोसी जनपद मुरादाबाद जिसकी संस्कृति, आचार-व्यवहार एवं रिश्ते-नातेदारी भी बिजनौर से बहुतायत में है, वहां के भी प्रतिभाशाली बच्चों ने, यथा श्री अर्पित चौहान ने 20वीं रैंक, उत्तम भारद्वाज ने 121 वीं रैंक और आदित्य अग्रवाल ने 225 वीं रैंक लाकर इस खुशी एवं उत्साह के माहौल में चार चाँद लगा दिये हैं। इससे इस जनपद के लोगों का उत्साह दुगुना-तिगुना हो गया है।
हम सभी के लिए यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में जाने के सपने देखने वाले युवाओं का परीक्षाफल घोषित हुआ है, जिससे उनके अरमानों को एक नए पंख लग गए। इसलिए इस अहम परीक्षा में बाजी मारते हुए चयनित हुए सभी सफल आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और एलायड उम्मीदवारों को मैं अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाइयां देता हूं। साथ ही जो विद्यार्थी किन्ही कारणों से, अपनी अपनी विभिन्न परिस्थितियों से इस परीक्षा में असफल रहे हैं, उनकी सफलता का मार्ग भी इसी असफलता की कंटीली और संघर्षपूर्ण राहों से गुजरते हुए निकलेगा। इसलिए मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में उनको भी अवश्य ही सफलता मिलेगी।

ऐसे परम पुनीत भाव के साथ मैं आप सबको अवगत कराना चाहता हूं कि देश में प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना हर प्रतिभाशाली छात्र का होता है। लेकिन उसमें से सिर्फ मुट्ठी भर छात्र-छात्राओं को चयन बमुश्किल हो पाता है, यानी कि इस महत्वपूर्ण सेवा में जाने का अवसर मिलता है। लेकिन इस बार बिजनौर जनपद की जहां श्रुति शर्मा ने टॉप किया, वहीं इसी जनपद से आने वाली स्मृति भारद्वाज ने 176 वीं रैंक और डॉ शुमाईला चौधरी ने 368 वीं रैंक हासिल करके जनपद का नाम रौशन किया है। इससे जनपद के अन्य अभ्यर्थियों का भी उत्साह बढ़ेगा। वहीं, पड़ोसी जनपद मुरादाबाद के अर्पित चौहान ने 20वीं रैंक, उत्तम भारद्वाज ने 121 वीं रैंक और आदित्य अग्रवाल ने 225 वीं रैंक लाकर इस क्षेत्र के प्रतियोगी छात्रों सहित उनके सजग अभिभावकों में उत्साह भर दिया है कि
यदि लगन और मेहनत के साथ धैर्य व मनोयोग पूर्वक इस परीक्षा की तैयारी की जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है।
वाकई बिजनौर जनपद के हिस्से में आई यह ताजातरीन सफलता ऐतिहासिक है। इसकी प्राकृतिक वजह भी है। दरअसल जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र का एक ऐसा जनपद है जहां गंगा की उर्वर मिट्टी है, हिमालय की तराई की शीतल और मनभावन आबोहवा है। इन स्फूर्ति प्रदायक हवाओं के बीच पले बढ़े यहां के छात्रों का मन-मस्तिष्क बेहद उर्वर हो जाता है। यही वजह है कि यहां के छात्रगण भी प्रतिवर्ष कुछ ना कुछ ऐसा जरूर करते हैं जिससे उनकी प्रतिभा का डंका देश-प्रदेश में खूब बजता है। इस वर्ष जनपद की तीन छात्राओं द्वारा यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त करना उसी कड़ी की पुनरावृत्ति है, जबकि टॉप करना मील का एक पत्थर, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा और अन्य छात्रों को ऐसा ही करने की उपमा दी जाएगी।
देखा जाए तो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व पुरातन गौरव धारण करने वाली यह वसुधा ही नहीं बल्कि यहां के बुद्धिजीवी भी इन उपलब्धियों से खुद को गौरवान्वित समझते/महसूस करते हैं। उसी का परिणाम है कि आज के घोषित परीक्षा में जनपद बिजनौर की एक होनहार छात्रा श्रुति शर्मा, जिसने अपने धैर्य, परिश्रम व संयम से, अपने गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा-दीक्षा से एवं अपने माता-पिता व अभिभावकों से प्राप्त संस्कारों के माध्यम से इस प्रतिष्ठित परीक्षा में प्रथम स्थान पाकर अपने और अपने परिवार का नाम रौशन की है। साथ ही जनपद बिजनौर और उत्तर प्रदेश दोनों का गौरव एवं मान बढ़ाया है।
वहीं, मैं यह भी कह सकता हूं कि एक लेखक के रूप में जो कल्पना मैंने हाल ही में प्रकाशित (रिलीज) हुई अपनी पुस्तक “काल-प्रेरणा” में नवचिंतन के माध्यम से अभिव्यक्त किया था, उस साकार करने में यूपीएससी में 1 ली रैंक हासिल करके टॉप करने वाली श्रुति शर्मा, 176 वीं रैंक प्राप्त करने वाली स्मृति भारद्वाज  और 368 वीं रैंक पर आने वाली डॉ शुमाईला चौधरी ने सम्पूर्ण जनपद का मान बढ़ाने में अपना-अपना अभिन्न योगदान दिया है। क्योंकि इनलोगों ने जनपद वासियों के लिए एक वैसा अनुकरणीय कार्य किया है, जिसके नक्शेकदम पर चलकर यहां के छात्रगण एक नहीं बल्कि अनेक प्रेरणा ग्रहण कर सकेंगे। इसलिए उन सभी को और उनके परिवारी जनों को भी ढेर सारी शुभकामनाएं और कोटिशः बधाइयां।
स्मरण करा दूं कि अपनी पुस्तक “काल-प्रेरणा” में मैंने लिखा था कि बिजनौर की पावन धरती वह कालजयी भूमि है जहां के शकुंतला पुत्र भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा। उस दिव्य भूमि को नमन करते हुए आप सबकी सफलता के प्रति बिजनौर वासियों में उमड़े उत्साह के दृष्टिगत सबकी की ओर से पुनः हार्दिक शुभकामनाएं व ढेर सारी बधाई देता हूं। यहां से जुड़े बुद्धिजीवियों व अधिकारियों के ग्रुप में अनेकों ऐसे नाम हैं जिन्होंने मुझे भी व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि बिजनौर की पावन भूमि से और ज्ञान की देवी मां सरस्वती जी की अनुकंपा से, प्रशासनिक क्षेत्र में यहां के और प्रतिभाशाली प्रतिभाओं का चयन होगा, जिससे हमारे इस ग्रुप में निरंतर होनहार अधिकारियों की वृद्धि होगी।
कहना न होगा कि यह बात जो मैंने महज कल्पना नहीं की थी बल्कि वहां के युवाओं की प्रतिभा को देखकर, उनके परिश्रम को देखकर, उन्हें उत्साहित करने के लिए यह बात मैंने अपनी पुस्तक में अभिव्यक्त किया था। क्योंकि यह मेरे अंतर्मन की अनुभूति थी। आपको पता है कि अंतर्मन की अनुभूति हमेशा मूर्त रूप धारण करती है। शायद यह इसका भी सकारात्मक परिणाम है कि आज इस प्रतिष्ठित सेवा में जहां श्रुति शर्मा को प्रथम स्थान मिला। वहीं, स्मृति भारद्वाज ने 176 वीं रैंक और डॉ शुमाईला चौधरी ने 368 वीं रैंक हासिल कर  जनपद का मान-सम्मान बढ़ाया है। वहीं, अन्य जिन लोगों ने भी इस अहम परीक्षा में सफलता प्राप्त की है, उनको और उनके परिजनों को भी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
वहीं, जनपद बहराइच में जहां पर मैं बतौर जिलाधिकारी पदस्थापित हूं, पिछले वर्ष श्री आनंद कुमार सिंह का चयन इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हुआ था और उनको भी मैंने उस समय शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि अभी भी आप तैयारी करिए, आपको निश्चित रूप से अभी भी आगे बढ़ने में सफलता मिलेगी। और इस वर्ष उनकी भी 206 रैंक है, जो पहले से सुधरी है। मैं उनको और उनके परिजनों को, उनके परिवार के लोगों को एक बार पुनः हार्दिक बधाई देता हूं कि उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा और अच्छी सफलता के लिए अच्छे ढंग से, उत्कृष्ट ढंग से कार्य करने का संकल्प लेते हुए पुनः सफलता प्राप्त की है।
साथ ही, यह भी कहना चाहूंगा कि जो लोग असफल हुए हैं, उनकी मंजिल अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि सफलता का मार्ग हमेशा असफलता के बीच से होकर ही जाता है। कोई भी सफल व्यक्ति या सफल छात्र, परीक्षा में केवल एकबार ही सफल हुए हैं और पहली कमियों से सीख लेते हुए दूसरी बार भी अपनी रैंक सुधारते हुए सफलता हासिल की है। लेकिन इसके पहले भी उन्होंने कुछ न कुछ असफलता का स्वाद अवश्य चखा होगा, तभी आज सफल हुए हैं। इसलिए असफल होकर भी आप अपने जीवन में निराश ना हो, क्योंकि आपके भी जीवन में नित नूतन खुशियों का एक अपार कल आने वाला है। इसलिए उस खूबसूरत पल का इंतजार करें। आप उसी मनोयोग से, उसी धैर्य से तैयारी करें। आप अपने संघर्ष के बीच एक साहसिक निर्णय लेते हुए, एक बार फिर परीक्षा में पूरे मनोयोग से बैठें, निश्चित रूप से आने वाले समय में आपको भी सफलता मिलेगी।
इस अवसर पर परमपिता परमेश्वर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम और रामभक्त श्री हनुमान जी से मैं उनकी ओर से प्रार्थना करता हूं कि आने वाले वर्ष में भी निश्चित रूप से जनपद बिजनौर की गौरवशाली भूमि से अनेकों प्रतिभाओं का चयन इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं में हो। क्योंकि होने वाली  हर उन चयन से निश्चित रूप से मैं और मेरा परिवार भी गौरवान्वित महसूस करेगा। इसी भाव के साथ एक बार फिर सभी सफल अभ्यर्थियों को व उनके परिजनों को हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई देता हूँ।
वहीं, परीक्षा में असफल हुए छात्रों को और जो अगली परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन तमाम छात्रों को उनके आने वाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए यह सुझाव देना चाहता हूं कि आपलोग पूरे मनोयोग से परीक्षा में सम्मिलित हों। सफलता की मंजिल आपके कदम को अवश्य चूमेगी। क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो संघर्ष की राह को चुनते हैं। संघर्ष करने की क्षमता उन्हीं में होती है, जो स्वस्थ शरीर को धारण करते हैं। इसलिए योग के माध्यम से अपने शरीर को स्वस्थ बना कर अपनी इच्छा के अनुरूप सफलता पाइए। अपना अनुभव मैं आपको अवश्य दूंगा यदि आप उसे हासिल करने की चेष्टा करेंगे। इसलिए आप अपनी सफलता के लिए विभिन्न कोटियों के लिए आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग कर अपनी अपनी मंजिल को प्राप्त करने के लिए कटिबद्ध होकर कार्य करें। जिससे सफलता आपके कदम चूमेगी।
एक बार फिर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आप सब लोगों से मैं यह अनुरोध करूंगा कि सफलता के माध्यम से प्राप्त सेवाओं में आकर अपने राष्ट्रहित के कार्य को करना कदापि ना भूलें। आप सदैव अपने व्यक्तिगत सफलताओं से ऊपर उठकर प्रदेश और राष्ट्र की सफलता के लिए कार्य करने का पुनीत संकल्प लें। जिससे कि आपकी योग्यता व परिश्रम का लाभ देश और देशवासियों को मिल सके। क्योंकि आपके परिश्रम से ही हमारा राष्ट्र सशक्त व समृद्ध राष्ट्र की श्रेणी में आकर विश्व के मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।
मेरा विनम्र सुझाव है कि आपलोग केवल योग के मानचित्र पर नहीं, केवल योग गुरु के रूप में ही नहीं अपितु अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर, अपनी आर्थिक ताकत के रूप में भी विश्व पटल पर प्रमुखता के साथ अपना स्थान बनाएं। जैसा कि हमारे भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी का व्यापक चिंतन है। हमारे ये दोनों महान राजनेता भी  चाहते हैं कि विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की स्थापना हो और इसे करने की सार्थक कोशिश और प्रयास भी हम सभी देशवासियों को मिलजुल कर करना है ताकि सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा साकार हो और राष्ट्र कल्याण हो। जय हिंद, जय भारत।
(लेखक जिलाधिकारी, बहराइच, यूपी हैं)
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